ह्यूगो चावेज़: अमरीका की नाक में दम करने वाला नेता

ह्यूगो चावेज़

ह्यूगो चावेज़ चौथी बार दक्षिण अमरीकी देश वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. अगले छह साल के लिए राष्ट्रपति पद संभालनेवाले चावेज़ 1998 से वेनेज़ुएला का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्हें लैटिन अमरीका के सबसे चर्चित, मुखर और विवादास्पद शख्सियतों में से एक माना जाता है.

राजनीति में आने से पहले वायुसैनिक रहे चावेज़ ने 1992 में वेनेज़ुएला में एक असफल सैनिक विद्रोह का नेतृत्व किया था.

और छह साल बाद उन्होंने परंपरागत राजनीति में भूचाल लाते हुए लोगों का भारी जनसमर्थन हासिल किया और देश के राष्ट्रपति बन गए.

उसके बाद चावेज़ ने कई चुनाव और जनमत संग्रह में जीत हासिल की.

जनता के भारी समर्थन के बल पर उन्होंने राष्ट्रपति के असीमित कार्यकाल संबंधी सांविधानिक बदलाव पर भी जनमत संग्रह में विजय हासिल की.

चावेज़ के समर्थक कहते हैं कि वो गरीबों के हित की बात करते हैं जबकि उनके आलोचक उनपर निरंकुश होने का आरोप लगाते हैं.

कैंसर

ह्यूगो चावेज़ और क्यूबाई नेता फ़िदेल कास्त्रो गहरे दोस्त हैं
इमेज कैप्शन, ह्यूगो चावेज़ और क्यूबाई नेता फ़िदेल कास्त्रो गहरे दोस्त हैं

1954 में पैदा हुए चावेज़ को 2011 में कैंसर का मुकाबला करना पड़ा. कई ऑपरेशनों कीमोथेरेपी के बाद बताया जाता है कि वो कैंसर से उबर गए हैं लेकिन उनकी बीमारी की सही स्थिति की जानकारी कभी सार्वजनिक नहीं हो सकी.

अमरीका विरोधी और वामपंथी विचारधारा के समर्थक ह्यूगो चावेज़ क्यूबाई नेता फिदेल कास्त्रो और उनके भाई राउल कास्त्रो के क़रीबी दोस्त माने जाते हैं.

यहां तक कि कैंसर का इलाज करवाने के लिए भी वो क्यूबा ही गए.

चावेज़ अक्सर ये तर्क देते हैं कि वेनेज़ुएला में सामाजिक क्रांति की जड़ें मज़बूत बनाने के लिए उन्हें और समय की ज़रूरत है.

वेनेज़ुएला में 1958 से लोकतांत्रिक सरकार थी और देश की दो मुख्य पार्टियों पर लगातार भ्रष्टाचार और तेल संसाधनों के ग़लत इस्तेमाल के आरोप लगते रहे थे.

ह्यूगो चावेज़ ने देश की जनता को क्रांतिकारी सामाजिक नीतियों का वादा किया और लगातार देश की सत्ता पर बैठे दलों और उसके नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय पूंजी के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाते रहे.

देश को संबोधित करने का कोई मौका नहीं चूकने वाले चावेज़ ने एक बार तेल के कथित ठेकेदारों को व्यभिचार और शराब में डूबे विलासी की संज्ञा दी थी.

चावेज़ ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार चर्च को भी आड़े हाथ लिया. उन्होंने चर्च पर ग़रीबों की अवहेलना करने, विपक्ष का साथ देने और अमीरों का बचाव करने का आरोप लगाया था.

अमरीका से संबंध

चावेज़ ने अमरीकी राष्ट्रपति पर 2001 में आतंक से आतंक का मुक़ाबला करने का आरोप लगाया था
इमेज कैप्शन, चावेज़ ने अमरीकी राष्ट्रपति पर 2001 में आतंक से आतंक का मुक़ाबला करने का आरोप लगाया था

अमरीका के साथ उनके संबंध हमेशा तल्ख़ रहे लेकिन संबंधों में और कड़वाहट तब पैदा हुई जब उन्होंने बुश प्रशासन पर 2001 के अफगानिस्तान युद्ध को लेकर आरोप लगाया कि अमरीका सरकार आतंक का मुकाबला आतंक से कर रही है.

चावेज़ ने अमरीका पर 2002 के उस तख्तपलट में शामिल होने का आरोप भी लगाया जिसकी वजह से उन्हें कुछ दिनों के लिए सत्ता से बेदखल होना पड़ा था.

संकट की इस घड़ी से दो साल बाद चावेज़ और मज़बूत होकर उभरे जब देश की जनता ने एक जनमत संग्रह में उनके नेतृत्व का भारी समर्थन किया.

उसके बाद 2006 के राष्ट्रपति चुनाव में वो फिर चुन लिए गए.

चावेज़ की सरकार ने अपने सामाजिक कार्यक्रमों के तहत वेनेज़ुएला में कई सुधार लागू किए जिनमें सबके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं.

हालांकि इन सुधारों और धनी तेल संपदा के बावजूद देश में बड़े पैमाने पर ग़रीबी और बेरोज़गारी है.

चावेज़ अपने भाषण के ख़ास अंदाज़ के लिए मशहूर हैं और इसका इस्तेमाल वो साप्ताहिक टीवी कार्यक्रम में जमकर करते हैं.

इस टीवी कार्यक्रम का नाम है 'हलो प्रेसीडेंट' जिसमें वो अपने राजनीतिक विचारों के बारे में बात करते हैं, मेहमानों का इंटरव्यू लेते हैं और नाचने और गाने से भी परहेज़ नहीं करते.

अब एक बार फिर से वेनेज़ुएला की जनता ने ह्यूगो चावेज़ के नेतृत्व में भरोसा जताया है और अगले छह साल के लिए उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी प्रदान कर दी है.