जेल से 90 कैदी फरार होने के बाद कर्फ्यू

इराक के तिकरित शहर में एक जेल पर हुए हमले के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है.
इस हमले में चरमंथियों ने 12 सुरक्षा कर्मियों की हत्या कर दी और 90 कैदियों को रिहा करा लिया.
जेल से फरार कैदियों में कई अल कायदा के सदस्य बताए जा रहे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि आत्मघाती हमलावर ने तसफिरात जेल के बाहर एक कार बम से हमला किया.
इसके बाद सुरक्षा कर्मियों और चरमपंथियों की झड़प शुरू हो गई.
तसफिरात जेल में सैकड़ों कैदी रखे गए हैं जिनमें से कइयों को मौत की सजा मिली हुई है.
अज्ञात बंदूकधारियों ने गुरुवार रात इस जेल पर हमला किया था.
शुक्रवार सुबह तक सुरक्षा कर्मियों से उनकी झड़प चलती रही.
गृह मंत्रालय का कहना है कि जेल में अपने रिश्तेदारों से मिलने आने वाले लोगों ने उन्हें हथियार ला कर दिए.
'भ्रष्टाचार बड़ी वजह'
इराक के जिस सलाहुद्दीन प्रांत में ये घटना हुई, वहां की स्थानीय परिषद के उप प्रमुख सभान अल मुल्लाह चियाद का इस हमले की वजह भ्रष्टाचार बताया.
वे कहते हैं, ''कुछ तो मिली भगत रही होगी. किसी ने तो उन्हें बंदूकें, कार और लोहे की रॉड दी होंगी. दुर्भाग्य की बात है कि ये मिली भगत भ्रष्टाचार के कारण हुई है. भ्रष्टाचार आंतकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है. ये देश भ्रष्टाचार से ही चल रहा है.''
इस घटना के बाद सलाहुद्दीन प्रांत के पुलिस प्रमुख को हटा दिया गया है.
एक इराकी सांसद हाकिम अल-जामिली का कहना है कि जेल से भागने वालों में अल कायदा के कई कट्टर चरमपंथी हैं.
उन्होंने बताया कि फरार लोग अपने साथ उन दस्तावेजों को भी ले गए हैं जिनमें ये जानकारी दर्ज है कि उनके बारे में अधिकारियों को किन लोगों ने जानकारी दी.
बगदाद में बीबीसी संवादाता रामी रुहायेम का कहना है कि ऐसा लगता है कि बंदूकधारियों और कुछ कैदियों के तालमेल से इस हमले को अंजाम दिया गया.
चरमपंथी इससे पहले भी कई इराकियों को जेलों के इस तरह निशाना बना चुके हैं.
अमरीकी सेना के इराक छोड़ने के एक साल बाद तक भी स्थानीय सुरक्षा बल देश की सुरक्षा स्थिति को स्थिर नहीं कर पाए हैं.












