चीन में मस्जिद गिराने का विरोध, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, क्या है मामला?

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- Author, निकोलस यॉन्ग
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चीन के यूनान प्रांत में एक मस्जिद के गुंबद और मीनारें गिराने की कोशिश के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में लोगों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं.
सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो के मुताबिक 13वीं सदी की नाजियिंग मस्जिद यूनान प्रांत के नागू क़स्बे में है.
झड़पें पुलिस और मस्जिद के गुंबद को गिराने के फ़ैसले का विरोध कर रहे लोगों की बीच शुरू हुईं.
सैकड़ों सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रण करने का प्रयास किया.
दक्षिण चीन के यूनान प्रांत में कई समुदायों के लोग रहते हैं जिनमें मुसलमान आबादी भी अच्छी तादाद में है.
चीन आधिकारिक रूप से एक नास्तिक देश है और वहाँ की सरकार सभी धर्मों को स्वतंत्रता देने का दावा करती है.
लेकिन जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में चीन में संगठित धर्मों के विरुद्ध सरकारी कार्रवाई बढ़ी है.
नागू की नाजियिंग मस्जिद एक बड़ा लैंडमार्क है. बीते कुछ सालों में इस मस्जिद का विस्तार किया गया है. इस दौरान नई मीनारें जोड़ी गई हैं और एक नया गुंबद भी बनाया गया है.
लेकिन साल 2020 में एक अदालती फ़ैसले में कहा गया कि मस्जिद में किए गए निर्माण अवैध हैं और उन्हें तुरंत हटा दिया जाए.
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अदालत का आदेश


अदालत के इसी फ़ैसले की तामीर किए जाने के प्रयास होते रहे हैं. इस कारण इलाक़े में भारी प्रदर्शन हुए हैं.
बीते शनिवार को हुए प्रदर्शनों के वीडियो सामने आए हैं जिनकी बीबीसी पुष्टि करता है. वीडियो में मस्जिद के प्रवेश द्वार के बाहर कतार बंद पुलिसकर्मियों को देखा जा सकता है.
वहीं प्रदर्शनकारियों का समूह पुलिस का घेरा तोड़कर मस्जिद में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है. इन्हीं लोगों में कुछ को पुलिस पर पत्थर फेंकते हुए भी देखा जा सकता है.
एक अन्य वीडियो में पुलिस को पीछे हटते हुए देखा जा सकता है. इसके बाद लोगों का हुजूम मस्जिद में दाख़िल होते दिखता है.
नागू पुलिस ने रविवार को इस घटना के बारे में एक बयान जारी किया है. बयान में प्रदर्शनकारियों से छह जून तक सरेंडर करने को कहा है. इसके अलावा दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पुलिस ने अपने नोटिस में कहा है, "जो लोग खुद छह जून तक सरेंडर करते हुए अपना बयान दर्ज कराएंगे उन्हें कम सज़ा मिलेगी."
चीनी अधिकारियों ने इस घटना को कानून व्यवस्था में बाधा डालने की एक गंभीर कोशिश बताया है और कहा है कि अगर कोई व्यक्ति प्रदर्शन करता दिखाई दे, तो उसके बारे में पुलिस को सूचित किया जाए.
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कोविड के बाद बढ़े विरोध प्रदर्शन


चीन में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन बहुत कम होते हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बाद इनकी संख्या में ख़ासी बढ़ोतरी हुई है.
लोगों ने चीन में सख़्त कोविड लॉकडाउन का कई इलाक़ों में डटकर विरोध किया है.
जो समुदाय मस्जिद के निर्माण को गिराने का विरोध कर रहा है उसे चीन में 'हुई' समुदाय कहा जाता है. यूनान चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आता है.
इस प्रांत में करीब सात लाख हुई मुसलमान रहते हैं. पूरे चीन में इस समुदाय की आबादी करीब एक करोड़ है.
स्थानीय मीडिया इन्हें चीनी मुसलमान कह कर पुकारता है. ये लोग चीनी समाज में रचे-बसे हैं और स्थानीय लोगों के साथ शादी-विवाह के रिश्ते भी कायम करते रहे हैं.
चीनी समाज और राजनीति पर नज़र रखने वाले लोग कहते हैं कि चीन ने हाल के वर्षों में धार्मिक समूहों की गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ाया है.
साल 2021 में राष्ट्रपति शी ने धर्म के चीनीकरण का नारा दिया था. जिसका अर्थ था कि धार्मिक आस्थाओं को चीनी संस्कृति और समाज के अनुकूल बनाना.

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2018 में भी इसी हुई समुदाय के लोग चीनी सरकार के लिए ख़िलाफ़ डटकर लड़े थे. तब सरकार निंगशिया में एक मस्जिद गिराने जा रही थी.
विरोध के बाद सरकार ने अपने क़दम पीछे खींच लिए थे लेकिन कहा था कि मस्जिद के अरबी वास्तु को हटाया जाना चाहिए.
2018 में ही यूनान में तीन मस्जिदों पर ताला जड़ दिया गया था. सरकार ने कहा था कि इनमें अवैध धार्मिक शिक्षा दी जाती है.
चीन पर शिनजियांग प्रांत में वीगर मुसलमानों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते रहे हैं.
शिनजियांग में सरकार ने कई मस्जिदों गिरा दी हैं और वहां इस्लामी धार्मिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है.
चीन वीगरों के ख़िलाफ़ किसी भी मानवाधिकार के उल्लंघन से इनकार करता रहा है.
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