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जी-7 समिट में ज़ेलेंस्की से नहीं मिल पाने से परेशान हैं ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला
जी-7 देशों की बैठक से अलग यूक्रेन के राष्ट्रपति से मुलाक़ात न हो पाने के बाद उठते सवालों के बीच ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईस इनासियू लूला डा सिल्वा ने बयान दिया है.
उन्होंने कहा कि वो जी-7 बैठक में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से न मिल पाने की वजह से 'परेशान' थे. लूला डा सिल्वा ने ये भी दावा किया कि रूस के साथ शांति स्थापित करने में यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की कोई रूचि नहीं दिखी.
जापान के हिरोशिमा में हुई जी-7 देशों की बैठक के बाद दुनिया के शक्तिशाली देशों से कूटनीतिक समर्थन हासिल कर के निकले ज़ेलेंस्की ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा से आमने-सामने मिलना चाहते थे.
लूला डा सिल्वा पर अक़्सर यूक्रेन पर हमले के मामले में रूस के प्रति नरम रुख़ अपनाने का आरोप लगता रहा है.
दोनों नेताओं ने मुलाक़ात न होने के पीछे व्यस्तता वजह बताई. हालांकि, यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने बयान में ब्राज़ीलियाई नेता पर चुटकी ली और कहा कि 'शायद वो हताश' थे.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को मीडिया से कहा, "मैं लगभग सबसे मिला, हर नेता से. सभी की व्यस्तताएं थीं, शायद इसीलिए हम ब्राज़ीलियाई राष्ट्रपति से नहीं मिल सके."
वहीं, लूला ने जापान से वापसी के वक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "मैं निराश नहीं था. मैं परेशान था क्योंकि मैं उनसे (ज़ेलेंस्की) से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहता था."
"लेकिन ज़ेलेंस्की समझदार हैं. वो जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं."
जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गए थे.
मोदी ने वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और लूला डा सिल्वा दोनों से ही अलग-अलग मुलाक़ात भी की.
ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
लूला डा सिल्वा ने कहा कि उनकी टीम ने ज़ेलेंस्की के साथ रविवार दोपहर के लिए मुलाक़ात का समय तय किया था. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति देरी से आए और उसके बाद उनका ख़ुद का एजेंडा पूरा हो चुका था.
ज़ेलेंस्की को इस शिखर सम्मेलन में जी-7 देशों का जमकर समर्थन मिला.
अमेरिका ने यूक्रेन को एफ़-16 लड़ाकू विमान भी देने का वादा किया.
इस दौरान जी-7 से इतर देशों ने भी ज़ेलेंस्की को मदद का भरोसा दिया.
भारत की ओर से पीएम मोदी ने भी ज़ेलेंस्की से कहा कि वो इस संघर्ष को रोकने के लिए 'जो बन पाएगा वो करेंगे.'
मोदी ने ज़ेलेंस्की से कहा, "मैं आपका दर्द समझता हूं."
हालांकि, ब्राज़ील की ओर से ऐसा कोई आश्वासन या समर्थन नहीं दिखा.
लूला ने कहा कि फिलहाल ज़ेलेंस्की से मिलने का कोई मतलब नहीं बनता, क्योंकि ऐसा नहीं लगता कि वो और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शांति चाहते हैं.
"अभी, दोनों ये मान रहे हैं कि वो ये युद्ध जीतेंगे."
समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार लूला दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर ज़ोर दे रहे हैं.
इसके लिए उन्होंने ब्राज़ील के मध्यस्थता का प्रस्ताव भी दिया था, जिसमें चीन और इंडोनेशिया जैसे अन्य 'निष्पक्ष' देशों को शामिल करने की भी बात की.
लेकिन धुर वामपंथी नेता लूला की बीते महीने उस वक्त ख़ूब आलोचना हुई जब उन्होंने अमेरिका पर युद्ध को 'बढ़ावा' देने का आरोप लगाया.
व्हाइट हाउस की ओर से जब लूला पर "रूस और चीन के प्रॉपेगेंडा में आंख मूंदकर साथ देने" का आरोप लगाया गया तो ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने अपने तेवर में थोड़ी नरमी दिखाई.
लेकिन सोमवार को एक बार फिर से उनकी आलोचना शुरू हो गई.
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