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थाईलैंड में नशीले पदार्थों का साम्राज्य कैसे फल-फूल रहा है
- Author, जोनाथन हेड
- पदनाम, साउथ ईस्ट एशिया संवाददाता
थाईलैंड की राजधानी बैंकाक की सबसे ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सैलानियों की भीड़ वाली सड़क है सुखुमवित रोड.
रंग-बिरंगी रोशनी से गुलज़ार ये जगह एक अनोखी दुनिया का नमुना पेश करती है.
अचानक हुई गांजे की भरमार ने थाईलैंड में इसके कारोबारियों के बीच ख़ुशी पैदा की है, क्योंकि पिछले साल जून में देश में गांजे के कारोबार को वैध कर दिया गया था.
बैंकॉक में बीबीसी के दफ़्तर से दो किलोमीटर पूरब की ओर चलने पर रास्ते में 40 से ज़्यादा दवाई की दुकानें नज़र आती हैं.
इन दुकानों पर गांजे के फूलों की कलियां और धूम्रपान से जुड़े तमाम सामान बिकते हुए नज़र आते हैं.
इसके विपरीत दिशा में चलने पर मशहूर खाओ सैन रोड पर मारिजुआना-थीम वाला शॉपिंग मॉल 'प्लांटोपिया' है.
मॉल की दुकानें ग्राहकों के द्वारा बनाई गई धुएं की धुंध के पीछे धुंधली नज़र आती हैं. ये जगह सैलानियों की पसंदीदा जगहों में से एक है.
थाईलैंड में वेबसाइट 'वीड' देश भर में गांजे और इसके डेरिवेटिव बेचने वाले 4,000 से ज़्यादा आउटलेट्स को सूचीबद्ध करती है जो गांजा और उससे जुड़े उत्पाद बेचती हैं.
ये वही थाईलैंड है जहां पिछले साल के जून महीने तक गांजा रखने पर 5 साल तक की सज़ा का प्रावधान था और इसे उपजाने पर 15 साल तक जेल हो सकती थी.
वहीं दूसरी नशीली दवाओं के अपराधों में मौत की सज़ा मिलती थी. देश में बदलाव की ये गति रोमांचित करती है.
थाईलैंड में गांजे के कारोबार में सलाह देने वाली कंपनी एलिवेटेड एस्टेट की संस्थापक और नए नियमों को पारित करने की कोशिश कर रही संसदीय समिति का हिस्सा रही किट्टी चोपका कहती हैं, "ये उलझाने वाला है, लेकिन ये थाईलैंड है और गांजे के कारोबार में उदारीकरण के बिना मुझे नहीं लगता कि आज ऐसी स्थिति हुई होती."
लेकिन किट्टी चोपका सरीखे मुहिम चलाने वाले लोगों ने गांजे की जिस उदारीकरण की कल्पना की थी ये वैसा नहीं है.
किट्टी चोपका कहती हैं, "हमें नियामक व्यवस्था चाहिए जिसमें इसका ज़िक्र हो कि आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं."
"यह काफ़ी भ्रम पैदा कर रहा है. बहुत से लोग नहीं जानते कि उनकी हदें क्या हैं."
गांजे पर सियासत
यदि इसकी छूट भी है तो इसके साथ कुछ नियम हैं, लेकिन उन्हें बेतरतीब ढंग से लागू किया जा रहा है.
सभी दवा दुकानों के पास गांजे को बेचने का लाइसेंस नहीं है. दुकानों से अपेक्षा की जाती है कि गांजे की उपज से लेकर ग्राहकों के व्यक्तिगत डिटेल दर्ज किए जाएं.
बिना प्रोसेस किए गए गांजे के फूलों को छोड़कर किसी भी उत्पाद में टीएचसी की मात्रा 0.2 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए. टीएचसी गांजे में मौजूद साइकोट्रोपिक रसायन है. इन उत्पादों की ऑनलाइन ब्रिक्री पर पाबंदी है.
लेकिन इसके बावजूद सप्लायर ज़्यादा टीएचसी वाले गांजे को ऑनलाइन बेच रहे हैं. इन उत्पादों में भांग की बनी ब्राउनी और गमी शामिल हैं. इसकी डिलीवरी एक घंटे के भीतर कर दी जाती है.
गांजा 20 साल से कम उम्र के किसी भी ग्राहक को नहीं बेचा जा सकता है. लेकिन मोटरसाइकिल पर क्या उत्पाद डिलीवर किया जा रहा है ये कौन जानता है?
वहाँ कई रेस्तरां हैं जो भांग या गांजे से बने व्यंजन परोसते हैं. यहां मारिजुआना चाय और मारिजुआना आइसक्रीम भी मिलती है. किराने की दुकानों पर पानी में गांजा और भांग मिला कर बेचा जा रहा है.
थाईलैंड पुलिस इस बात को स्वीकार करती है कि वे इस बारे में काफ़ी दुविधा में हैं कि क्या क़ानूनी है और क्या नहीं. वे गांजे को लेकर काफ़ी कम नियमों को लागू कर पाई है.
भांग और गांजे के नियमों में बदलाव एक राजनीतिक संयोग है.
थाईलैंड की सबसे बड़ी पार्टी के प्रमुख नेता अनुतिन चरणविरकुल ने 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में भांग और गांजे को वैध करने की बात कही थी.
इस वादे ने चुनाव जीतने में उनकी मदद की. ज़्यादातर लोग इस धारणा के शिकार हो गए कि भांग की फ़सल ग़रीब किसानों के लिए एक लाभदायक वैकल्पिक नक़दी फसल हो सकती है.
नई सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद अनुतिन चरणविरकुल ने अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द प्रतिबंधित नशाले पदार्थों को प्रतिबंधित सूची से हटाने को प्राथमिकता दी.
जब तक कि भांग के उत्पादों के नए व्यवसाय को नियंत्रित करने के लिए नियम तैयार किए जाते तब तक भांग और गांजे को डिक्रिमिनलाइज़ किया जा चुका था और नए क़ानून अंतर-दलीय कलह में फंस गए थे.
मई 2023 में एक और आम चुनाव होने के बाद भी इस साल के अंत तक संसद से क़ानून पारित होने की काफ़ी कम संभावनाएं हैं.
विपक्षी पार्टियां पहले से ही अनियमित गांजे के ख़तरों के बारे आगाह कर रही हैं और सत्ता में आने पर इसे दोबारा अपराध घोषित करने की चेतावनी दे रही हैं.
गांजे का जड़ी-बूटी और भोजन में होता था इस्तेमाल
इस बेलगाम नए उद्योग का भविष्य अनिश्चित है.
पिछले साल यूनिवर्सिटी की 21 वर्षीय छात्रा तुक्ता ने गांजे के खेल में क़दम रखा और बैंकॉक के क्लोंग टोई ज़िले में हर्ब क्लब नामक एक डिस्पेंसरी और कॉफी शॉप में दस लाख बहत (30,000 डॉलर) से ज़्यादा की पूंजी का निवेश किया.
वह भांग के पौधे के फूलों की 16 अलग प्रकार बेचती हैं जिसकी क़ीमत 10 डॉलर से 80 डॉलर प्रति ग्राम है. लेकिन वह क़ानून में संभावित बदलावों को लेकर चिंतित हैं.
किट्टी चोपका कहती हैं, "गांजे की भरमार की वजह से क़ीमत गिर रही है."
"यहां काफ़ी अवैध आयात किए जाते हैं. हम विदेशी नस्लें उगा रहे हैं जिसे एयर-कंडीशनिंग और धूप की ज़रूरत होती है. हमें लागत कम करने के लिए ऐसी किस्मों के विकास पर ध्यान देना चाहिए जो हमारी जलवायु में बेहतर तरीके से पनप सकें."
"हमें वास्तव में अपनी पुरानी विरासत, अपनी पुरानी संस्कृतियों की ओर वापस जाने की ज़रूरत है, क्योंकि गांजे के पौधे और थाईलैंड एक- दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं."
थाईलैंड के कई नागरिकों के मुताबिक़, वे एक ऐसे देश में पले-बढ़े हैं जहां सभी तरह के नशीले पदार्थों को एक ख़तरनाक सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाता है. गांजे के कारोबार का नाटकीय ढंग से फलना-फूलना उन्हें हैरान करता है.
आधिकारिक नज़रिए में ड्रग्स को लेकर सख़्ती काफ़ी सख़्ती बरती जाती है.
1970 के दशक के अंत तक उत्तरी थाईलैंड में पहाड़ी जनजातियों द्वारा व्यापक रूप से गांजे की खेती की जाती थी. इसे गोल्डन ट्राएंगल के नाम से जाना जाता था, जो दुनिया की अफ़ीम का बहुत बड़ा स्रोत हुआ करता था. उत्तर पूर्वी थाईलैंड में गांजे का जड़ी-बूटी और खाना बनाने के एक इंग्रेडिएंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था.
1960 के दशक में जब अमेरिकी सैनिक 'आराम और मनोरंजन' न मिलने की वजह से वियतनाम युद्ध में 'कमज़ोर' पड़ रहे थे, तब उन्हें थाई स्टिक मिला ( बांस की छड़ी के चारों ओर पत्तियों में लिपटी गांजे की कलियों को एक मोटे सिगार की तरह बनाया जाता है).
अमेरिकी सैनिकों ने थाईलैंड के गांजे को बड़े पैमाने पर अमेरिका भेजना शुरू कर दिया. गोल्डन ट्राएंगल से अमेरिका में अधिकांश नशीले पदार्थ भेजे जाने लगे.
अमेरिका की मदद से ड्रग्स पर लगी थी पाबंदी
जैसे ही वियतनाम युद्ध का घाव भरा, थाईलैंड पर ड्रग्स उत्पादन पर रोक लगाने के लिए अमेरिका ने दबाव बनाना शुरू कर दिया.
1979 में थाईलैंड ने एक नारकोटिक्स एक्ट लागू किया जिसमें मौत की सज़ा के साथ ड्रग्स का उपयोग करने और बेचने के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान था.
थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया ने अपने इमीग्रेशन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हिप्पी लोगों (एक तरह के घुमंतू जो कई देशों में घूमते हैं) की तलाश करें और उनके प्रवेश पर रोक लगा दें. सिंगापुर हवाईअड्डे पर लंबे बालों वाले लोगों को नाई के पास जाने या वापस लौटने का विकल्प दिया जाता था.
मलेशिया में किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के देश छोड़ने से पहले उनके पासपोर्ट पर 'एसएचआईटी' का स्टाम्प लगा दिया जाता था जिसका मतलब होता था ट्रांज़िट में पाया गया संदिग्ध हिप्पी.
अक्टूबर 1976 में बैंकॉक के थम्मासैट विश्वविद्यालय में एक वामपंथी छात्र आंदोलन को कुचलने के बाद थाईलैंड की सरकार उभरती युवा संस्कृति से विशेष रूप से सावधान थी.
शरीर और मस्तिष्क पर प्रभाव
रूढ़िवादियों को भय था कि युवा पीढ़ी थाईलैंड में एक साम्यवादी अधिग्रहण का समर्थन कर सकती है, जैसा कि तब पड़ोसी लाओस, कंबोडिया और वियतनाम में हुआ था.
इसी बीच थाईलैंड में शाही-प्रायोजित फ़सल सुधार परियोजनाओं की एक श्रृंखला के माध्यम से ज़्यादातर पहाड़ी जनजातियों को अफ़ीम और गांजे की खेती के बजाय कॉफ़ी या मैकाडामिया नट्स की खेती करने के लिए राज़ी किया गया.
1990 के दशक से म्यांमार के युद्ध से प्रभावित इलाकों से सस्ते मेथामफ़ेटामाइन थाईलैंड में निर्यात किये गए हैं. मेथामफ़ेटामाइन एक बहुत ही पावरफ़ुल,नशीला और घातक पदार्थ है.
मेथामफ़ेटामाइन दिमाग़ में डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाता है और इसके इस्तेमाल से इंसान उत्साहित हो जाता है. इसकी लत काफ़ी जल्दी लग जाती है और शरीर पर इसके कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं.
मेथामफ़ेटामाइन के लत से समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर थाईलैंड की जनता इसके ख़िलाफ़ खड़ी हो गई. इसकी वजह से ही 2003 में एक कठोर नशा विरोधी अभियान चला.
इस अभियान के तहत कम से कम 1,400 संदिग्ध उपयोगकर्ताओं और डीलरों को मार गिराया गया था.
तब थाईलैंड के जेलों में काफ़ी भीड़ थी. इनमें से तीन-चौथाई क़ैदी नशीली दवाओं के अपराध और कई तो बेहद मामूली जुर्म में क़ैद थे.
जेलों में अत्याधिक भीड़ ने थाईलैंड के अधिकारियों के कठोर रवैये पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया.
इसके साथ ही उन्हें यह भी एहसास हुआ कि देश के कामयाब चिकित्सा पर्यटन उद्योग में गांजे का औषधीय और चिकित्सकीय इस्तेमाल एक सार्थक पूरक साबित हो सकता है. गांजे के बेहतर इस्तेमाल क्षमता को जांचने के लिए ये कोई बड़ा फ़ैसला नहीं था.
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'गांजे को वैधता मिलने से उन्हें कोई नुक़सान नहीं हुआ है बल्कि मदद मिली है'
थाईलैंड के उद्यमी टॉम क्रुसोपोन देश में ड्रग क़ानूनों को उदार बनाने की वजह से "मिस्टर वीड" के नाम से जाने जाते हैं.
वो जर्मन से आए सैलानियों के एक समूह के सामने ख़ुश होते हुए कहते हैं कि 'नशीली दवाओं के ऐमस्टरडम में आपका स्वागत है.'
बैंकॉक में मिस्टर क्रुसोपोन ने अमेरिकी कैनबिज़ स्टोर कुकीज़ की एक शाखा खोली है. इस स्टोर में स्थानीय रूप से उगाए गए अलग-अलग किस्म के गांजे को सुंदर जार में रखा गया है.
स्टोर में तख्तों पर गांजे की थीम पर बनी हुई टी-शर्ट, अंग-वस्त्र और चप्पलें रखी गई हैं.
शायद यह बैंकॉक के हिल्टन जेल में दशकों से बंद असहाय पश्चिमी लोगों की जानी-पहचानी दास्तां है जो आगंतुकों को थोड़ा पसोपेश में डालती है.
लेकिन टॉम क्रुसोपोन उन्हें आश्वासन देते हैं कि अब उन्हें थाईलैंड में गांजा खरीदने और उसका इस्तेमाल करने के लिए गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता है, हालांकि वह अपनी दुकान में धूम्रपान करने की इज़ाजत नहीं देते हैं.
संसद के बाहर भांग और गांजे के बारे में सार्वजनिक चर्चा में इसकी बातचीत नहीं होती है.
सड़क पर दुकान लगाने वाले एक 32 साल के व्यक्ति ने कहा, "यह ठीक नहीं है. यह अभी भी मेरे लिए नशीले पदार्थों की तरह है. सिर्फ़ युवा ही इसका ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं और जो पहले इसका इस्तेमाल कर चुके हैं वे इसे दोबारा कर रहे हैं."
लेकिन एक बूढ़े मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर का मानना है कि गांजे को वैधता मिलने से उन्हें कोई नुक़सान नहीं हुआ है बल्कि मदद मिली है.
वो कहते हैं, "हम ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि हम धूम्रपान नहीं कर रहे हैं. वैसे भी हमें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता."
कुछ डॉक्टरों ने भांग की लत के ख़तरों की चेतावनी दी है, लेकिन ज़्यादातर थाई लोगों के लिए यह लंबे समय से चले आ रहे मेथामफ़ेटामाइन संकट के आगे फीका पड़ जाता है.
सेंट्रल बैंकॉक के दवा दुकानों का कहना है कि उनके ज़्यादातर ग्राहक थाईलैंड के नागरिक नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक हैं.
थाईलैंड में उन लोगों की संख्या कम नहीं है जो नए नियमों के लागू होने के पहले से ही गांजे का नियमित सेवन कर रहे थे.
फलता-फूलता कारोबार
अमांडा भी ऐसे लोगों में से एक हैं. अब वह अपनी पसंद के नस्ल के गांजे की खेती करने को लेकर खुश हैं. उन्हें अब दरवाज़े पर पुलिस के दस्तक देने का डर नहीं है.
उन्होंने अपने छोटे से अपार्टमेंट में गांजे को उगाने के लिए एक जगह बनाई है. उन्होंने अपने छोटे से बेडरूम की बालकनी को टेंट और रोशनी से भर दिया है, जहां उन्होंने गांजे के सात पौधे लगाए हैं. इस कमरे में उनकी बिल्ली के आने की मनाही है.
वो कहती हैं, "शुरुआती समय में मुश्किलें पेश आती थीं. मुझे काफ़ी कुछ सीखना था. शुरुआत में मुझे तापमान का अनुमान नहीं था और कमरे को दिन के चौबीसों घंटे एयर-कंडीशन करना पड़ता था. लेकिन थाईलैंड में जो हुआ है, बहुत ही शानदार हुआ है. अब हज़ारों फ़ार्म और डिस्पेंसरी हैं, इस व्यवसाय में बहुत सारे दिलचस्प लोग हैं."
गांजे को फिर से बैन करने और इसे चिकित्सा तक सीमित करने की कोशिश करने के लिए थाईलैंड के राजनीतिक दलों में आपसी सहमति की उम्मीद है. ऐसा लगता नहीं है कि पिछले नौ महीनों के बाद वापस बैन किया जा सकता है.
लेकिन थाईलैंड में गांजे का उद्योग किस स्तर पर पहुंच चुका है ये किसी की कल्पना से परे है.
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