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चीनी मीडिया: ऑकस समझौता अमेरिका की चालाकी और ऑस्ट्रेलिया के लिए 'बोझ'
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण
- 13 मार्च को सेन डिएगो में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने आधिकारिक तौर पर ऑकस परमाणु पनडुब्बी समझौते की घोषणा की.
- इसके तहत अमेरिका और ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया को परमाणु क्षमता वाली उन्नत किस्म की पनडुब्बियां देंगी.
- जानकार इस समझौते को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की पश्चिमी मुल्कों की कोशिश मान रहे हैं.
- चीनी विदेश मंत्रालय और चीनी सरकारी मीडिया में इस सुरक्षा समझौते का विरोध किया गया है.
- चीनी सरकारी मीडिया ने कहा है कि इस समझौते का असर चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्तों में पिघल रही बर्फ़ पर पड़ेगा और इससे ऑस्ट्रेलिया पर बोझ बढ़ेगा.
- एक सैन्य एक्सपर्ट्स ने कहा है कि चीन को "पनडुब्बीरोधी सिस्टम" बनाना चाहिए.
अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑकस परमाणु समझौता होने के बाद लगातार दूसरे दिन चीनी विदेश मंत्री वांग वेनबिन ने आरोप लगाया है कि ये तीनों देश ताज़ा परमाणु पनडुब्बी समझौते पर हामी भरने के लिए अंतरराष्ट्रीय आणविक उर्जा एजेंसी (आईएईए) को बाध्य कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार 15 मार्च को हुए संवाददाता सम्मेलन में वांग वेनबिन ने कहा, "आईएईए की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था कारगर तरीके से इस बात की निगरानी नहीं कर सकती कि ऑस्ट्रेलिया अपने रास्ते से बहकेगा नहीं और मिल रहे परमाणु मैटीरियल का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए नहीं करेगा."
उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और आईएईए को ये हक़ नहीं है कि परमाणु पनडुब्बी समझौते की सुरक्षा और निगरानी को लेकर किसी तरह के 'निजी समझौते' करें.
उन्होंने कहा कि इस तरह के सौदों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को "मिलकर विचार करना चाहिए और कोई फ़ैसला लेना चाहिए."
लेकिन शिन्हुआ के मुक़ाबले चीन के बड़े सरकारी अख़बार इस मामले पर थोड़े शांत ही दिखे.
चाइना सेन्ट्रल टेलीविज़न (सीसीटीवी) के शाम के समाचार कार्यक्रम शिन्वेन लियानबो (न्यूज़ हुकअप), सेना द्वारा चलाए जाने वाले पीएलए डेली और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली में 14 और 15 मार्च को ऑकस परमाणु पनडुब्बी समझौते पर कोई रिपोर्ट नहीं दी गई.
14 मार्च को सीसीटीवी के सवेरे के समाचार बुलेटिन में यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंटोनी अल्बानीज़ के बीच 13 मार्च को हुई बातचीत पर रिपोर्ट पेश की गई थी.
हालांकि इस समाचार में रूस की आलोचना पर बात की गई थी और इसमें सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया गया था.
शिन्हुआ ने भी इस ख़बर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि उसने 'वू ज़ी गुआन जियान' नाम के एक व्यक्ति के नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक टिप्पणी को जगह दी.
15 मार्च को उसने इस कमेन्ट के हवाले से लिखा कि फ्रांस के लिए ऑकस परमाणु पनडुब्बी समझौता "ये घाव पर नमक लगाने के जैसा है."
अख़बार ने लिखा कि साल 2021 में फ्रांस ने ऑस्ट्रेलिया के साथ पनडुब्बी का समझौता किया था लेकिन ऑकस समझौते के कारण ये सौदा रद्द हो गया था. हालांकि इस ख़बर में भी कहीं चीन का ज़िक्र नहीं किया गया था.
चीन से 'पनडुब्बी-रोधी सिस्टम' बनाने की अपील
जहां स्थानीय सरकारी अख़बार इस मुद्दे पर शांत दिखे वहीं, राष्ट्रीय सरकारी मीडिया में इस समाझौते की आलोचना की गई.
अंतरराष्ट्रीय पाठकों के बीच पढ़े जाने वाले ग्लोबल टाइम्स के अंग्रेज़ी संस्करण ने 14 मार्च को एक रिपोर्ट में चीनी एक्सपर्ट के हवाले से लिखा कि ये समझौता "अमेरिकी सेना की चीन से निपटने के लिए, समंदर के भीतर उसे घेरने की कोशिश का हिस्सा है" और ये "चीन को ख़ुद की रक्षा करने" के लिए प्रेरित कर रहा है.
अख़बार ने बीजिंग में मौजूद सैन्य मामलों के जानकार वी डोन्गशू के हवाले से लिखा कि इस पूरे कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया एक गिनी पिग (परीक्षण में इस्तेमाल होने वाला जानवर) की तरह है जो ख़ुद जोखिम लेकर अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए पैसे दे रहा है."
उन्होंने कहा कि इसका मुक़ाबले करने के लिए चीन को 'पनडुब्बी-रोधी सिस्टम' बनाने की ज़रूरत है.
ऑस्ट्रेलिया पर इसका असर
राष्ट्रीय सरकारी मीडिया ने ये भी लिखा कि ऑकस समझौता ऑस्ट्रेलिया पर आर्थिक बोझ डालने की कोशिश है, या फिर ये अमेरिका के लिए 'पुरानी' परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों के फ़ायदा कमाने की कोशिश है.
14 मार्च को ग्लोबल टाइम्स के ब्लॉग बुइदाओ ने लिखा, "अपने गठबंधन के सहयोगियों के बीच अमेरिका कई बार इस तरह के ब्लैकमेलिंग के अभियान चला चुका है. इस व्यवस्था में ये एक बोझ-सा बन गया है कि अमेरिका गठबंधन के अपने 'छोटे भाइयों' को अपने पुराने हथियार बेच देता है. ये उसके लिए और उसके सैन्य व्यवसाय के लिए एक फायदेमंद बिज़नेस है."
सरकार समर्थित चीनी न्यूज़ वेबसाइट गुआन्चा ने 14 मार्च को एक रिपोर्ट में लिखा कि ऑकस समझौते का असर चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्तों पर पड़ेगा.
वेबसाइट ने आगे लिखा कि 14 मार्च को अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी कि चीन अपने यहां की सभी घरेलू कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया से कोयला आयात करने की अनुमति देगा और इससे साल 2020 से ऑस्ट्रेलियाई कोयले के आयात पर लगी एक तरह की अनाधिकारिक रोक हट जाएगी, लेकिन इसके बाबजूद ऑकस परमाणु समझौते का दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा.
सोशल मीडिया पर कूटनीतिक और मीडिया का विरोध
ट्विटर पर चीनी कूटनीतिक मिशनों ने इस समझौते का विरोध किया है. चीन की मुख्यभूमि पर ट्विटर ब्लॉक है.
ट्विटर पर ऑकस परमाणु पनडुब्बी समझौते के विरोध से जुड़े क़रीब 30 पोस्ट किए गए हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के लिए चीनी मिशन और फ्रांस में मौजूद उसका दूतावास शामिल हैं.
ब्रिसबेन में मौजूद चीन के कंसुल-जनरल रुआन ज़ोंगज़े अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट हैं और चीनी विदेश मंत्रालय समर्थित चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ के उपाध्यक्ष रह चुके हैं.
14 मार्च को उन्होंने ट्वीट किया कि ऑकस परमाणु पनडुब्बी समझौता "ये पैडोरा बॉक्सक खोल कर राक्षक को बाहर निकालने जैसा है."
सरकारी मीडिया ने इस समझौते से जुड़े क़रीब 70 ट्वीट किए.
इनमें ग्लोबल टाइम्स का एक कार्टून शामिल है जिसमें ऑस्ट्रेलिया को "एशिया प्रशांत को लेकर अमेरिका की रणनीति का पिग्गी बैंक" कह कर उसका मज़ाक उड़ाया गया है.
14 मार्च को ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रमुख संपादक हू शीजिन ने ट्वीट किया, "प्राचीन अंग्रेज़ी सभ्यता पूरी तरह के परमाणु पनडुब्बी में ही रहती है. वैश्वीकरण के दौर में ये सबसे अलग-थलग, ज़िद्दी और ख़तरनाक किस्म के लुटेरे हैं."
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)
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