पाकिस्तान में होली मना रहे छात्रों पर हमले का क्या है पूरा मामला

पंजाब विश्वविद्यालयों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद

पाकिस्तान में लाहौर के पंजाब विश्वविद्यालय में सोमवार को हिंदू छात्रों और उनके कुछ मुसलमान दोस्तों को होली मनाने से रोका गया और इस दौरान एक कट्टरपंथी छात्र संगठन इस्लामी-जमीयत-तुलबा (आईजेटी) से उनकी झड़प भी हुई.

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन और जमीयत ने इस घटना से इनकार किया है. जमीयत का कहना है कि वो अल्पसंख्यकों के अधिकारों का समर्थन करते हैं और इस हमले में उनके सदस्यों का कोई हाथ नहीं है.

अजीत प्रसाद सिंध के थरपारकर ज़िले से आते हैं. वो लॉ कॉलेज में तीसरे वर्ष के छात्र हैं. वो पंजाब विश्वविद्यालय में होली का आयोजन करने वाली समिति के सदस्य भी थे. वो बताते हैं कि होली के तीन दिन पहले इसके आयोजन की घोषणा की गई थी.

उन्होंने बताया, ''मेरी तबीयत ठीक नहीं थी लेकिन मैंने सोचा जाना चाहिए, मेरे दोस्त भी ज़ोर दे रहे थे.''

अजीत प्रसाद कहते हैं कि जब वो लॉ कॉलेज पहुंचे तो उन्होंने देखा कि करीब 25 लड़के हाथों में डंडे लिए एक तरफ़ खड़े हैं. वहीं, दूसरी तरफ़ वो हिंदू और मुसलमान छात्र खड़े थे जो होली मनाना चाहते थे. वो आधे घंटे तक यहां खड़े रहे लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई दखल नहीं दिया.

अजीत का कहना है कि प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में नाक़ाम रहा. उन्होंने कहा कि वो किसी 'एथनिक एंगल' के बारे में नहीं जानते, हिंदू लड़के बस होली मनाना चाहते थे.

लॉ कॉलेज के तीसरे वर्ष के हिंदू छात्र खेत कुमार

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'पीटे जाने का नहीं, होली की इजाज़त ना मिलने का दुख'

लॉ कॉलेज में ही तीसरे वर्ष के एक अन्य हिंदू छात्र खेत कुमार भी टकराव वाले दिन मौक़े पर मौजूद थे.

वो बताते हैं, ''मैं आगे ही खड़ा था और मैंने जमीयत के लोगों को वहां से जाने के लिए कहा. मैंने उनसे कहा कि हम भाई-भाई की तरह हैं और हम बस अपना त्योहार मनाना चाहते हैं. लेकिन, ये दुखी करने वाला है कि होली मनाने से पहले ही हम पर हमला किया गया. हमारे कुछ मुसलमान दोस्त भी घायल हो गए.''

खेत कुमार कहते हैं कि सिंध के 'जमात-ए-इस्लामी' और पंजाब विश्वविद्यालय के 'जमात-ए-इस्लामी' में बहुत अंतर है. सिंध में जमात-ए-इस्लामी भी मिलकर त्योहार मनाता है.

उन्होंने कहा, ''पंजाब में ज़्यादा धार्मिक कट्टरता है. जब मैं यहां (लाहौर में) आया तो लोग मुझसे कहते थे कि मैं भारतीय हूं. शुरुआत में तो मुझे विश्वविद्यालय में अपनी पहचान छुपानी पड़ी. मैं चुपचाप रहता था.''

''मैं भी पाकिस्तानी हूं, मेरे सभी पूर्वज यहीं की मिट्टी में समाए हैं. दुख इस बात का नहीं कि हमें पीटा गया, बल्कि ज़्यादा तकलीफ़ इस बात की है कि हमें होली नहीं मनाने दी गई. पर अब हमारे मुसलमान दोस्त आकर अफ़सोस जता रहे हैं. उनका कहना है कि जमीयत हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करता है.''

खेत कुमार ये सब बताते हुए थोड़े भावुक हो जाते हैं. वो कहते हैं, ''हमने भी पाकिस्तान की रक्षा की है. हम कोई भी त्योहार मनाने से पहले राष्ट्र गान गाते हैं. लेकिन, अफ़सोस की बात ये है कि हम तो पाकिस्तान की रक्षा करते हैं लेकिन पाकिस्तान हमारी रक्षा नहीं करता.''

''अब देश की संस्थाएं कहां हैं? उन्हें हमारे साथ खड़े रहना चाहिए.''

होली मनाने आए छात्रों ने झगड़े में घायल होने की बात कही है. पंजाब विश्वविद्यालय ने इस दावे को खारिज किया है

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नियमों के उल्लंघन की बात

हिंदू अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'समाज सेवा फाउंडेशन' के अध्यक्ष चमन लाल ने बीबीसी को बताया कि पंजाब विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में 10 हिंदू छात्रों ने दाखिला लिया था.

उन्होंने ही इन छात्रों को विश्वविद्यालय के जिमनाज़ियम ग्राउंड में त्योहार मनाने के लिए जगह दिलाने में मदद की थी.

चमन लाल इस घटना के दौरान लाहौर में नहीं थे. उन्होंने बताया कि सोमवार को उनके पास छात्रों के फ़ोन आने लगे. छात्रों का कहना था कि जब वो जिमनाज़ियम ग्राउंड में जाने के लिए तैयार हो रहे थे तभी जमीयत के कुछ छात्र आए और उनसे झगड़ने लगे.

चमन लाल बताते हैं कि जब वो इस घटना का वीडियो देख ही रहे थे तभी उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय के चीफ़ सिक्योरिटी ऑफ़िसर का फ़ोन आया और वो कहने लगे कि छात्रों ने नियमों का उल्लंघन किया है. उनका कहना था कि छात्रों तय जगह पर नहीं बल्कि लॉ कॉलेज में होली खेलने लगे थे और प्रबंधन उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा.

चमन लाल कहते हैं, ''तब मैंने पूछा, अगर हिंदू छात्र उन्हें मिली अनुमति का उल्लंघन कर रहे थे तो जमीयत के सदस्यों ने उन्हें रोककर क्या सही किया है. उन्होंने रोकना क्या विश्वविद्यालय का काम नहीं था.''

उन्होंने दावा किया कि सिंधी स्टूडेंट काउंसिल के छात्र जब वाइस चांसलर के दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने गए तो विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्ड्स ने उन पर डंडे से 'हमला' किया.

सिंधी स्टूडेंट काउंसिल के महासचिव काशिफ ब्रोही
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पंजाब विश्वविद्यालय ने क्या कहा

सिंधी स्टूडेंट काउंसिल के महासचिव काशिफ ब्रोही ने बीबीसी को बताया कि जमीयत के कार्यकर्ता तब से उन्हें धमकी दे रहे थे जब उन्होंने सोशल मीडिया पर होली मनाने के इस कार्यक्रम की जानकारी दी थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि जब वो लॉ कॉलेज के ग्राउंड में होली मनाने जा रहे थे तब जमीयत से जुड़े छात्र डंडे लेकर वहां आ गए और उन्हें पीटना शुरू कर दिया. ब्रोही ने कुछ छात्रों को घायल होने का भी दावा किया.

पंजाब विश्वविद्यालय ने प्रेस रिलीज़ जारी कर ऐसी किसी घटना से इनकार किया है. उनके प्रवक्ता ने रिलीज़ में ''विश्वविद्यालय में होली मनाने को लेकर किसी तरह का झगड़ा ना होने की'' बात कही है. उन्होंने हिंदू छात्रों के घायल होने की बात से भी इनकार किया है.

पाकिस्तान का पंजाब विश्वविद्यालय

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विश्वविद्यालय में हो रही छात्र राजनीति

विश्वविद्यालय ने ये भी कहा कि ये किसी और प्रांत से जुड़ा एक 'अलग पहचान वाला मुस्लिम छात्र संगठन है' जो अपनी राजनीतिक हितों के लिए हिंदू छात्रों का इस्तेमाल कर रहा है. विश्वविद्यालय का इशारा 'सिंधी स्टूडेंट काउंसिल' की तरफ़ था.

इस्लामी-जमीयत-तुलबा संगठन की पंजाब विश्वविद्लाय में पकड़ काफ़ी मजबूत रही है. ये कट्टरपंथी संगठन जमीयत-ए-इस्लामी का छात्र संगठन है.

लेकिन, पिछले कुछ दशकों में जब से विश्वविद्यालय ने अन्य प्रांतों के छात्रों के लिए कोटा दिया है तब से पहचान से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीति होने लगी है.

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता दावे के साथ कहते हैं कि ये झगड़ा तब शुरू हुआ जब सिंधी स्टूडेंट काउंसिल ने अपनी मर्ज़ी से होली खेलने की जगह बदल दी. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी और होली मनाने के लिए लॉ कॉलेज के मैदान में लाउडस्पीकर और अन्य सामान लेकर चले गए.

जब प्रशासन और गार्ड्स, लॉ कॉलेज ग्राउंड पर पहुंचे तो छात्रों के बीच बहस हो रही थी लेकिन हाथापाई नहीं हुई.

हालांकि, बाद में जब सिंधी स्टूडेंट काउंसिल के सदस्यों ने वाइस चांसलर के दफ़्तर के बाहर पत्थर फेंकना शुरू किया तब विश्वविद्याल के गार्ड्स ने डंडा हाथ में लेकर भीड़ को भगाया. विश्वविद्यालय के मुताबिक इस पूरे विवाद में कोई भी घायल नहीं हुआ है.

कराची में विरोध प्रदर्शन
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कराची विश्वविद्यालय की घटना

वहीं, मीडिया में एक और घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें एक हिंदू लड़की कह रही है कि हिंदू छात्रों का उत्पीड़न किया गया और उन्हें कराची यूनिवर्सिटी के कैंपस में होली खेलने से रोका गया.

लड़की ने आरोप लगाया कि जमीयत के सदस्यों ने उन्हें रोका और परेशान किया.

हालांकि, कराची विश्वविद्यालय ने होली खेलने को लेकर किसी तरह की हिंसा होने से इनकार किया है. कराची विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा, ''विश्वविद्यालय परिसर में होली खेलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी और ना होली मनाने के ख़िलाफ़ हिंसा की कोई घटना हुई है.''

लेकिन, कैंपस में ''दो छात्र समूहों के बीच झगड़े को लेकर'' पुलिस के कराची विश्वविद्यालय में जाने की भी ख़बरें हैं.

सिंध में विश्वविद्यालय और बोर्ड्स के मंत्री इस्माइल राहो ने कराची विश्वविद्यालय के चांसलर को जांच बैठाने और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

मंत्री ने एक बयान में कहा, ''हिंदू छात्र होली खेल सकते हैं और कोई उन्हें नहीं रोक सकता.''

एक और संगठन प्रोग्रेसिव यूथ अलायंस ने भी कराची प्रेस क्लब के बाहर इन घटनाओं के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया है.

एक विरोध प्रदर्शनकारी और कराची विश्वविद्यालय के छात्र करीम शिराज़ी ने भी इस घटना के बारे में बताया.

उन्होंने कहा, ''हम अपनी क्लास में होली मनाया करते थे. ये छोटे स्तर पर ही होता था लेकिन जब हम होली के बाद तस्वीरें लेते थे तो जमीयत के छात्र आकर हमें परेशान करते थे. वो हमारे फ़ोन छीन लेते, वीडियो डिलीट कर देते और छात्रों की पिटाई करते थे.''

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान के लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में होली मना रहे हिंदू छात्रों पर हमला किया गया.

इस्लामी-जमीयत-तुलबा कैंपस में लंबे समय से मोरल पुलिसिंग करती रही है. हालांकि, संस्था ने ऐसी किसी घटना में शामिल होने से इनकार किया है.

जमीयत के प्रवक्ता उसामा मीर ने बीबीसी से कहा कि इस विवाद में जमीयत को खींचना बिल्कुल गलत है. ''एक छात्र संगठन होने के नाते हम अपना काम करते हैं और दूसरे के कामों में दखल नहीं देते. हम दूसरे समूहों और समुदायों के इकट्ठा होने और कार्यक्रम करने के अधिकारों का सम्मान करते हैं. ''

उसामा ने ये भी कहा कि दोनों विश्वविद्यालय के प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि दोनों जगह कोई हाथापाई या झगड़ा नहीं हुआ था. जमीयत के प्रवक्ता ने कहा, "हम अल्पसंख्यकों के त्योहार मनाने के अधिकारों को मानते हैं और इस घटना में शामिल लोगों से खुद को अलग करते हैं."

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