पाकिस्तान: 'रोज़ाना टैक्स लगाने के बजाय एक बार ही जनता पर ऐटम बम क्यों नहीं गिरा देते'

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- Author, शहज़ाद मलिक
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसहाक़ डार जब बुधवार को नेशनल असेंबली की बैठक में मिनी बजट पेश करते हुए जनता पर और टैक्स लगाने की बात कर रहे थे तो सदन में मौजूद 'विपक्ष' ऐसे ख़ामोश होकर बैठा था जैसे मिनी बजट सरकार नहीं बल्कि विपक्ष का कोई सदस्य पेश कर रहा हो.
वित्त मंत्री के बजट भाषण के दौरान न कोई शोर-शराबा हुआ, न कोई डेस्क बजाया गया और ना ही किसी सदस्य ने एजेंडे की कॉपियां फाड़कर स्पीकर और वित्त मंत्री की तरफ़ फेकीं और ना ही बैठक की कार्यवाही का बायकॉट किया गया.
आमतौर पर ऐसी बैठकों में वित्त मंत्री को शोर-शराबे से बचने के लिए अपने कानों पर 'नॉइज़ कैंसिलेशन डिवाइस' लगानी पड़ती है.
केंद्रीय वित्त मंत्री इसहाक़ डार ने मिनी बजट पेश करते हुए इस को लाने की पूरी ज़िम्मेदारी पूर्व सत्तारूढ़ दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पर डाल दी और कहा कि उन्होंने (तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने) आईएमएफ़ से जो समझौता किया था, वर्तमान सरकार उस समझौते का पालन कर रही है, इसलिए आईएमएफ़ से और क़र्ज़ लेने के लिए मिनी बजट लाना ज़रूरी था.
वित्त मंत्री के भाषण के दौरान कोई शोर-शराबा तो नहीं हुआ, लेकिन राष्ट्रीय असेंबली की बैठक से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के सबसे बड़े दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग नून की ओर से यह बयान जारी किया गया कि उनके दल से संबंध रखने वाले केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री वेतन व भत्ते नहीं लेंगे ताकि लोगों में यह राय बनाई जा सके कि महंगाई की वजह से वे भी प्रभावित हुए हैं.
वित्त मंत्री राष्ट्रीय असेंबली में अपना भाषण ख़त्म करके अपनी सीट पर बैठे ही होंगे कि उन्हें बताया गया कि अगले हॉल में सीनेट की बैठक हो रही है और बैठक के एजेंडे पर मिनी बिल भी है.
यह सुनते ही केंद्रीय वित्त मंत्री डार ने अपना सामान समेटा और सीनेट की बैठक में चले गए.

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पाकिस्तान सरकार की आलोचना
आमतौर पर बजट पर बहस की शुरुआत राष्ट्रीय असेंबली में नेता प्रतिपक्ष करते हैं, लेकिन उनकी जगह पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन नूर आलम ख़ान ने बहस की शुरुआत की और केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उन लोगों को ग़रीब जनता सिर्फ़ उस वक़्त याद आती है जब उनसे वोट लेना होता है.
उन्होंने कहा, "जो भी सरकार आती है ग़रीब जनता का शोषण करती है. जनता टैक्स देती है. सरकार को चाहिए कि वो व्यापारी वर्ग और उद्योगपतियों पर टैक्स लगाए."
नूर आलम ख़ान ने आरोप लगाया कि एफ़बीआर (फ़ेडरल बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू) के अधिकारियों के भ्रष्ट होने की वजह से जनता के टैक्स के फ़ायदे जनता तक नहीं पहुंच रहे.
नूर आलम ख़ान ने मांग की कि आईएमएफ़ के साथ होने वाले 'इमरान समझौते' और 'डार समझौते' को पार्लियामेंट में पेश किया जाए ताकि जनता को भी तो मालूम हो कि आईएमएफ़ के साथ किन शर्तों पर समझौता हुआ है.
नूर आलम ख़ान के संक्षिप्त भाषण के बाद ग्रैंड डेमोक्रेटिक अलायंस या जीडीए से जुड़ी राष्ट्रीय असेंबली की सदस्य सायरा बानो ने पॉइंट ऑफ़ आर्डर पर बोलने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने बैठक शुक्रवार की सुबह तक स्थगित कर दी.
राष्ट्रीय असेंबली की बैठक में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री सरदार तनवीर इलियास की ओर से स्थानीय पत्रकार को गंभीर नतीजे भुगतने की धमकियां देने के मामले की निंदा की गई.
नेशनल असेंबली की सदस्य सायरा बानो को सदन में बात करने का मौक़ा तो नहीं मिला, लेकिन उन्होंने सदन से बाहर आकर मीडिया से बात करते हुए अपने दिल की भड़ास निकाली. उन्होंने कहा कि इसहाक़ डार ने पढ़ा हुआ भाषण पढ़ा और आरोप लगाया कि वह झूठ बोल रहे हैं.
उन्होंने कहा, "इसहाक़ डार को तो देश वापस आना ही नहीं चाहिए था. जब कुछ कर नहीं सकते तो इतने बड़े-बड़े दावे क्यों करते हैं."

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मिनी बजट पर आपत्तियां क्या हैं
उन्होंने कहा कि 'इस मिनी बजट के बाद 25 हज़ार से 50 हज़ार रुपये मासिक वेतन पाने वालों को तो भूल जाइए, अब एक लाख रुपये मासिक वेतन लेने वाले को भी अपने घर का ख़र्च चलाना मुश्किल हो रहा है.'
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे हुए लोग अशराफ़िया (शरीफ़, अभिजात्य) हैं. पर आम जनता मुश्किल हालात में जी रही है.
उन्होंने कहा कि 'जनता पर आए दिन टैक्स लगाकर और उन्हें तड़पा-तड़पा कर मारने से तो बेहतर है कि जो ऐटम बम बनाया है, उसे जनता पर क्यों नहीं गिरा देते.'
राष्ट्रीय असेंबली की बैठक के विपरीत सीनेट की बैठक हालांकि कुछ मिनट ही जारी रही, लेकिन वहां विपक्ष ज़ोरदार ढंग से विरोध दर्ज कराते हुए नज़र आया.
सीनेट के चेयरमैन ने बैठक के एजेंडे में शामिल बिंदुओं की ओर ध्यान दिलाया तो सीनेट में विपक्ष के नेता वसीम सज्जाद ने आपत्ति करनी चाही. मगर चेयरमैन ने इसकी इजाज़त नहीं दी जिस पर विपक्ष के सीनेट के सदस्यों ने सदन के अंदर नारेबाज़ी की और डेस्क बजाना शुरू कर दिया.
बाद में उन्होंने चेयरमैन के डाइस के सामने खड़े होकर एजेंडे की कॉपियां फाड़ दीं और उन्हें हवा में लहरा दिया.

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विपक्ष का विरोध
विपक्ष के शोर-शराबे के बावजूद इसहाक़ डार ने मिनी बजट से संबंधित एजेंडा आइटम पढ़ा जिसके बाद चेयरमैन ने संबंधित स्थाई समिति को यह निर्देश देकर भिजवा दिया कि शुक्रवार के दिन सुबह साढ़े दस बजे तक इस बिल पर अपने सुझावों को अंतिम रूप दें.
सीनेट में प्रतिपक्ष के नेता शहज़ाद वसीम का कहना था कि वह वित्त मंत्रालय से संबंधित सीनेट की स्थाई समिति की बैठक में इस बिल का विरोध करेंगे.
वित्त विधेयक की मंज़ूरी राष्ट्रीय असेंबली में होती है और सीनेट से इस बिल पर कोई सुझाव जाते हैं तो उसको मानना या रद्द कर देने का अधिकार राष्ट्रीय असेंबली के पास है.
बजट बैठक के दौरान संसद भवन की सुरक्षा में पहले से इज़ाफ़ा किया गया था और जिन पत्रकारों के पास वर्तमान सत्र के लिए एंट्री पास नहीं थे उन्हें पार्लियामेंट हाउस में जाने की इजाज़त नहीं दी गई थी.
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