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मेलबर्न में खालिस्तानी गतिविधियों पर भारत चिंतित, ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय दूतावास ने जनवरी महीने में ऑस्ट्रेलिया में तीन मंदिरों में हुए हमले की निंदा की है.
दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इन हमलों को चिंताजनक बताते हुए कहा गया है कि जिस तरह से मंदिरों में तोड़-फोड़ करने के बाद भारत विरोधी नारे लिखे गए, वह भारत विरोधी तत्वों को बढ़ावा देने की कोशिश लग रही है.
ऑस्ट्रेलिया में इस महीने हिंदू मंदिरों पर हमले के कम से कम तीन मामले सामने आए हैं.
24 जनवरी को विक्टोरिया में एक मंदिर को निशाना बनाया गया था. स्थानीय मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के मुताबिक़ मंदिर को निशाना बनाने वाले लोगों ने उसकी दीवारों पर भारत-विरोधी नारे लिखे.
इससे पहले 16 जनवरी और 12 जनवरी को भी हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ की ख़बरें सामने आई थीं.
ऑस्ट्रेलियाई दूतावास की ओर से कहा गया है कि ये हमले शांतिपूर्ण ढंग से रह रहे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में नफ़रत पैदा करने वाले हैं.
दूतावास ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के शुरू होने की आशंका जताई है. दूतावास के मुताबिक़, सिख फ़ॉर जस्टिस और दूसरे चरमपंथी संगठनों की इसके पीछे भूमिका हो सकती है.
ऑस्ट्रेलिया दूतावास ने चरमपंथी संगठन सिख फ़ॉर जस्टिस के मेलबर्न और सिडनी में कराए जाने वाले कथित जनमत-संग्रह को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है.
ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया है कि दूतावास और भारत सरकार की ओर से ऑस्ट्रेलियाई राजनयिकों और सरकार को लगातार अपनी चिंता से अवगत कराया गया.
दूतावास ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार इन घटनाओं की पुनरावृति रोकने का हरसंभव प्रयास करेगी.
दूतावास ने यह भी उम्मीद ज़ाहिर की है कि इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई सरकार, वहां रह रहे भारतीय समुदाय और उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर बैरी ओ'फैरल ने इस मामले में 20 जनवरी को ट्वीट करके कहा है कि वह इन ख़बरों को सुनकर 'दंग' हैं.
उन्होंने कहा, "भारत की तरह ऑस्ट्रेलिया भी कई संस्कृतियों वाला देश है. हम मेलबर्न में दो हिंदू मंदिरों के साथ तोड़फोड़ की घटना देखकर दंग हैं. इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां जांच कर रही हैं. हम अभिव्यक्ति की आज़ादी का पुरज़ोर समर्थन करते हैं. लेकिन इसमें नफ़रती भाषणों और हिंसा की जगह नहीं है."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों में इस घटना के लिए ख़ालिस्तानी समर्थकों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में 12 और 16 जनवरी को भी हिंदू मंदिरों पर हमले हो चुके हैं. इस सिलसिले में 16 जनवरी को विक्टोरिया के कैरम डाउन्स स्थित ऐतिहासिक शिव विष्णु मंदिर पर हमला किया गया था.
ऑस्ट्रेलिया का तमिल हिंदू समुदाय पोंगल मनाने जब मंदिर पहुंचे थे तो उन्होंने मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे दिखे.
इस मंदिर में पिछले काफ़ी समय से आ रहीं उषा सेंथिलनाथन ने बताया था कि वे एक तमिल अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ी हैं जो कि धार्मिक प्रताड़ना से बचने के लिए शरणार्थी के रूप में ऑस्ट्रेलिया आया था.
उन्होंने कहा था कि वह ये स्वीकार नहीं कर सकती हैं कि खालिस्तानी समर्थक इतनी निडरता के साथ उनके पूजास्थलों पर नफ़रती नारे लिख दें.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने उठाया मुद्दा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ़्ते ही इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि भारत सरकार इस मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया सरकार के साथ बात कर रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, "हम जानते हैं कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है. हम इन कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं. इनकी ऑस्ट्रेलिया के नेताओं, सामुदायिक नेताओं और वहां के धार्मिक संगठनों की ओर से भी सार्वजनिक रूप से निंदा भी की गई है."
"मेलबर्न में हमारे कॉन्सुलेट जनरल ने इस मामले को स्थानीय पुलिस के सामने उठाया है. हमने अपराधियों के ख़िलाफ़ जल्द जांच और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में कदम उठाने का अनुरोध किया है. इस मामले को ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ भी उठाया गया है."
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय
ऑस्ट्रेलिया में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाले समुदायों में भारतीय समुदाय एक है.
ऑस्ट्रेलिया सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, 2021 की जनगणना के दौरान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या क़रीब सात लाख 84 हज़ार है, जो कुल आबादी का तीन फ़ीसद है.
लेकिन बीते दो तीन दशकों से ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता हासिल करने वाले लोगों में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 10 फ़ीसदी से ज़्यादा है.
मूडी एनॉलिटिक्स की 2021 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार 250 अरब डॉलर सालाना से ज़्यादा का है.
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