क्या मछली खाने के बाद दूध पी सकते हैं? पढ़िए डॉक्टरों की राय

    • Author, मोहम्मद सुहैब
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

अक्सर डिनर टेबल पर खाने के फ्लेवर को लेकर बातें होती हैं, लेकिन कुछ धारणाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें सच माना जाता है.

सर्दियों में आम तौर पर मछली खाने का चलन बढ़ जाता है. ऐसे में घरों के डाइनिंग टेबल पर वह बहस एक बार फिर से लौट आती है कि क्या मछली खाने के बाद दूध पीया जा सकता है? क्या ऐसा करने से विटिलिगो यानी त्वचा पर सफेद चकत्ते या मोतियाबिंद तो नहीं हो जाएगा?

विटिलिगो में त्वचा का कुछ हिस्सा अपना पिग्मेंट खोने लगता है, जिसके चलते वे हिस्से अलग से दिखाई देने लगते हैं.

एक तरफ ध्यान खास तौर पर भारत के एक ट्विटर यूजर ने खींचा है. उनका नाम है उज़ैर रिज़वी.

उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि उनकी मां अभी भी घबरा जाती हैं अगर वे मछली खाने के बाद दूध पी लें तो.

रिजवी ने ट्विटर पर सवाल किया कि क्या ये सिर्फ़ भारतीय और पाकिस्तानी माँओं का ही मसला है?

इस धारण को लेकर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यहूदियों का एक संप्रदाय मछली खाने के बाद दूध पीने को लेकर बहुत सावधान रहता है.

इसी तरह एक और यूजर ने लिखा कि वास्तव में यह यूनानी चिकित्सा का एक दर्शन है. वहीं कुछ लोगों की धारणा है कि एक साथ दोनों चीजों को खाने से पेट में दर्द, सूजन, मतली, उल्टी जैसी शिकायत हो जाती है.

हालांकि इन दिनों रेस्तरां में दूध का इस्तेमाल कर मछली तैयार की जाती है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दूध और मछली को एक साथ खाने के संबंध में बीबीसी उर्दू ने विशेषज्ञों से बात की और यह जानने की कोशिश की है कि क्या इन दोनों चीजों का आपस में कोई संबंध है?

पाकिस्तान की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. उर्मिला जावेद ने कहा कि यह एक परिकल्पना है.

उन्होंने कहा कि त्वचा पर सफेद निशान पड़ जाना यानी विटिलिगो का दूध या मछली के एक साथ खाने से कोई लेना देना नहीं है, बल्कि इसका किसी भी खाने से संबंध नहीं है.

डॉ. उर्मिला ने कहा, 'यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है, यानी आपका इम्यून सिस्टम मेलेनिन (त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं) के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है."

'एंटीबॉडीज जहां हमला करते हैं उस हिस्से में मेलेनिन को नुकसान होता है, जो हमारी त्वचा पर साफ रूप से दिखाई देना लगता है."

न्यूट्रिशनिस्ट का क्या कहना है?

इस बारे में बीबीसी उर्दू ने न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. जैनब से भी बात की. उन्होंने कहा कि यह हमारी धारण है लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

उन्होंने कहा, "दूध और मछली का एक साथ सेवन करना यह तय नहीं करता कि त्वचा पर सफेद निशान पड़ जाएंगे."

डॉ जै़नब ने कहा कि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह सिर्फ मछली और दूध के साथ नहीं है बल्कि कई दूसरी खाने पीने की चीजों से भी जोड़कर देखा जाता है. इसमें वे चीजें आती हैं जो गर्म और ठंडे के आधार पर हानिकारक मानी जाती हैं.

उन्होंने कहा कि न्यूट्रिशनिस्ट भोजन की मात्रा पर ज्यादा देने की बात करते हैं. यह फर्क नहीं पड़ता है खाने की कोई वस्तु ठंडी या गर्म, बल्कि फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उसे कितनी मात्रा में ले रहे हैं.

डॉ जैनब कहती हैं, "अगर आप कोई चीज जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाते हैं तो उसका आपके पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है."

हालांकि यह निश्चित है कि कुछ खाने की चीजों के चलते लोगों को त्वचा की एलर्जी हो सकती है. इस बारे में बात करते हुए डॉ उर्मिला जावेद ने कहा कि कुछ लोग, खाने-पीने की कुछ चीजों के प्रति एलर्जिक होते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में डिब्बाबंद सामान, प्रिजर्वेटिव्स, या खाने की वस्तुओं के रंग की वजह से भी एलर्जी होती है.

दूध और मली एक ही पैन में!

  • कुछ लोग मछली को धीरे धीरे दूध में पकाकर भी तैयार करते हैं. इसे ही पोच फिश कहते हैं.
  • मछली को दूध में धीरे धीरे पकाने से एक क्रीमी ग्रेवी बनती है, जिसे पकी हुई मछली के ऊपर डाल सकते हैं.
  • इसके लिए आपको दो कप दूध (400 एमएल), थोड़ा-सा नमक और मछली के साफ किए गए छोटे छोटे टुकड़े चाहिए.
  • सबसे पहले एक पैन लें, उसमें दूध और चुटकी भर नमक डालकर पकाएं. जब दूध उफ़ान पर आ जाए तो उसमें मछली के टुकड़े डालें और आंच धीमी कर दें
  • मछली के टुकड़े पैन में आधे से ज्यादा डूबे होने चाहिए. दूध को करीब आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. ऐसा करने से टुकड़े दूध को अपने अंदर सोख लेंगे.
  • आखिर मैं आपको मछली के टुकड़े को पैन से बाहर निकालकर प्लेट में सर्व कर सकते हैं और बचे हुए गाढ़े दूध को ऊपर से डालने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

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