नेपाल में प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने से कितना ख़ुश है चीन?

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इमेज कैप्शन, चीन में नेपाल के राजदूत विष्णु पुकार श्रेष्ठ
    • Author, फणींद्र दाहाल
    • पदनाम, संवाददाता, बीबीसी नेपाली

चीन में नेपाल के राजदूत बिष्णु पुकार श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल में वामपंथी दलों के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद चीन का सकारात्मक रुख़ दिखाना स्वाभाविक है.

श्रेष्ठ ने ये भी दावा किया कि पुष्प कमल दाहाल यानी प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने से, उन मुद्दों पर निश्चित तौर पर फ़ायदा होगा जिसकी मांग नेपाल चीन से लगातार करता आया है.

प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने के बाद, भारत और चीन के विदेश मंत्रालय ने उन्हें बधाई दी.

बीजिंग प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि मौजूदा नेपाल सरकार, आम नागरिकों और राजनीतिक दलों के बीच संवाद और सहयोग स्थापित करके नेपाल को निरंतर स्थिरता और आर्थिक समृद्धि की राह की ओर ले जाएगी.

वहीं चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने प्रचंड को बधाई देते हुए कहा कि वह चीन-नेपाल रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं.

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री प्रचंड को चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से बधाई संदेश

नेपाल में नई सरकार के गठन के अगले ही दिन, नेपाल-चीन के बीच रेल संपर्क स्थापित करने के व्यावहारिक पहलू के अध्ययन के लिए चीन की एक तकनीकी टीम काठमांडू पहुंची.

इसके एक दिन बाद, चीनी पक्ष ने रसुवागढी-केरुंग क्रॉसिंग को खोलने का फ़ैसला किया, जो कि कोविड- 19 महामारी के समय से बंद था.

पिछले हफ्ते, चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने प्रचंड को प्रधानमंत्री नियुक्त किए जाने के बाद 'घुसपैठ द्वारा काठमांडू को नियंत्रित करने का अमेरिकी प्रयास विफल' शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था.

नेपाल में नई सरकार के बारे में चीन के राजदूत की क्या राय है?

इस बीच, काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के कार्यवाहक राजदूत ने प्रधानमंत्री प्रचंड से मुलाकात की और चीनी सरकार की ओर से उन्हें बधाई दी.

दूसरी ओर, बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के महानिदेशक लियू जिनसॉन्ग ने चीन में नेपाली राजदूत बिष्णु पुकार श्रेष्ठ के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.

बीबीसी के साथ एक साक्षात्कार में, चीन में नेपाली राजदूत श्रेष्ठ ने कहा कि वामपंथी दलों के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद चीन का सकारात्मक रुख़ दिखाना स्वभाविक है.

वे कहते हैं, "नई सरकार बनने के बाद, यह असामान्य नहीं है कि चीन नेपाल से नए रास्ते पर चलने की उम्मीद कर रहा है. यह स्वाभाविक ही है. इससे मैं बहुत ही खुश या अचंभित हूं, ऐसा नहीं है."

उन्होंने बताया कि चीन दुनिया की सभी शक्तियों की गतिविधियों का बारीक़ी से विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने कहा, "चीन, नेपाल और वहां हुए परिवर्तनों के बारे में अच्छी तरह से अध्ययन कर रहा है."

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इमेज कैप्शन, नेपाल-चीन के बीच रेलवे संपर्क प्रोजेक्ट के लिए पहुंची चीनी एक्सपर्ट्स की टीम

राजदूत श्रेष्ठ ने बताया कि उन्हें नहीं लगता कि किसी भी सरकार के तहत नेपाल-चीन संबंध 'ख़राब' हो गए, और उन्होंने उम्मीद जताई है कि चीन नेपाल की नई सरकार के साथ थोड़ा अधिक सहज महसूस कर सकता है.

वे कहते हैं, "स्वाभाविक रूप से, वामपंथी सरकार बनी है, तो सभी के लिए यह उम्मीद स्वाभाविक है कि पार्टियों (नेपाल और चीन के वामपंथी दल) के आपसी संबंध के कारण थोड़े बेहतर होने कि उम्मीद रख सकते हैं, वे थोड़े बेहतर दिखेंगे. नेपाली कांग्रेस का संबंध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से भी है. वामपंथियों के साथ थोड़ा अधिक झुकाव असामान्य नहीं है. यह स्वाभाविक है."

उन्होंने यह भी बताया, "मेरा अनुमान है कि चीज़ें कल की तुलना में काफ़ी बेहतर होंगी. जब सत्ता की दिलचस्पी होगी तो चीज़ें बेहतर होंगी. उन्होंने नयी सरकार को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है. वे कह रहे हैं कि हर संभव मदद के लिए वे तैयार हैं."

प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजिंग ने जो किया

प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने के बाद चीन द्वारा उठाए गए क़दमों को 'अच्छी ख़बर' के रूप में टिप्पणी करने वाले राजदूत श्रेष्ठ ने यह माना है कि यह नेपाली सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है.

उन्होंने कहा, "प्रचंड जब प्रधानमंत्री बने, तो खुश होकर उन्होंने क्रॉसिंग को नहीं खोला. यह महज़ एक संयोग है. यहां हम लगातार काम कर रहे हैं. वैसे यह स्वाभाविक है कि नई सरकार आने के बाद कुछ तेज़ी आयी है."

उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि नई सरकार रेलवे संपर्क बहाल करने संबंधी व्यावहारिक पहलूओं पर स्टडी भेजकर और बॉर्डर खोलकर उन्होंने प्रसन्नता ज़ाहिर की है, यह निरन्तर प्रयास का नतीजा है."

चीन की पीपल्स कांग्रेस के स्पीकर ली चांगशु ने कुछ समय पहले नेपाल का दौरा किया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा सहित प्रमुख दलों के नेताओं ने चीन से अवरुद्ध सीमा को खोलने का अनुरोध किया था.

सीमा बंद होने के कारण नेपाल-चीन व्यापार में भारी गिरावट हुई और नेपाली व्यवसायियों ने इसको लेकर आपना रोष जताया था.

श्रेष्ठ के मुताबिक उस वक्त भी रेलवे संपर्क बहाल करने की व्यावहारिकता पर स्टडी कराने को लेकर बात हुई थी.

केरुंग को काठमांडू से जोड़ने वाली रेलवे को संचार नेटवर्क के बुनियादी ढांचे के रूप में लिया गया है, जिसे नेपाल में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत लागू किया जा सकता है, जो एक चीनी बुनियादी ढांचा परियोजना है, जिसमें नेपाल 2017 में शामिल हुआ था.

चाइना रेलवे सर्वे एंड डिज़ाइन ग्रुप की टीम के विशेषज्ञों ने कहा है कि अभी जो स्टडी शुरू हुई है, उसे पूरा करने में 42 महीने लगेंगे.

चीन की ओर से पहले की गई स्टडी से पता चला था कि कठिन भूगर्भीय संरचना वाले पहाड़ी और संरक्षित क्षेत्रों में बनने वाली रेलवे की लंबाई 72.2 कि.मी. होगी.

यह कहा गया कि अंतर्देशीय रेलवे की संरचना का 98.8 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों और विशाल पुलों का होगा, जिसकी अनुमानित लागत केवल नेपाल की ओर के निर्माण के लिए 293 अरब नेपाली रुपये हैं.

कुछ विशेषज्ञों ने परियोजना के भविष्य पर संदेह जताते हुए कहा है कि नेपाल इतना बड़ा निवेश वहन नहीं कर सकता.

लेकिन राजदूत श्रेष्ठ ने कहा कि सभी अध्ययनों के निष्कर्ष के बाद रेलवे निर्माण की लागत का अनुमान लगाया जाएगा और उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि चीन नेपाल को सब्सिडी मुहैया कराने के साथ इस परियोजना का निर्माण करेगा.

उन्होंने कहा, "एक बार लागत का अनुमान लगाने के बाद यह सवाल आता है कि क्या हम इसे वहन कर सकते हैं या नहीं, ऋण लेना है या नहीं. चीन ने अभी तक कोई वादा नहीं किया है, लेकिन मुझे विश्वास है कि चीन अपने पैसे से हमारे रेलवे का निर्माण करेगा. व्यावहारिक अध्ययन कराना भी बहुत बड़ा काम है. इसलिए यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि हम कर्ज़ नहीं लेते हैं तो हम निर्माण नहीं करते."

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इमेज कैप्शन, 1 जनवरी 2023 को पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री प्रचंड

क्या पोखरा हवाई अड्डा बीआरआई के तहत एक परियोजना है?

पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण चीन से मिले ऋण से हुआ है, इसका उद्घाटन प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने के एक सप्ताह के भीतर हुआ था.

उससे एक दिन पहले चीन ने कहा था कि नेपाल-चीन बीआरआई (बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव) सहयोग के तहत हवाईअड्डा एक 'बड़ी परियोजना' है.

लेकिन कुछ लोग लगभग 260 मिलियन डॉलर के चीनी ऋण के साथ परियोजना बनने की बात कहते हुए चीनी दावे पर सवाल उठा रहे हैं कि नेपाल बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से संबद्ध नहीं है.

नेपाल सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से चीन के बयान का खंडन नहीं किया है.

लेकिन बीजिंग में नेपाल के राजदूत श्रेष्ठ कहते हैं, "मुझे समझ नहीं आया कि पोखरा में हवाईअड्डा बीआरआई के तहत एक परियोजना है क्‍योंकि यह प्रोजेक्‍ट उससे काफ़ी पहले का कॉन्‍सेप्‍ट है. एक्जिम बैंक से कर्ज लेकर हमने इसे बनाया है. इसलिए, भले ही चीनियों ने कहा है कि यह बीआरआई के तहत एक परियोजना है, लेकिन उनका दावा सही नहीं है."

नेपाल ने 20 साल के भीतर हवाईअड्डे के निर्माण के लिए लिए गए ऋण को चुकाने का वादा किया है. लेकिन इस परियोजना के निर्माण के दौरान अनियमितताओं के दावे के साथ कई बार सवाल उठ चुके हैं.

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