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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए पहले शख़्स को हुई फांसी
- Author, डेविड ग्रिटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ईरान ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए पहले प्रदर्शनकारी को मौत की सज़ा दे दी है.
मोहसिन शेकारी को गुरुवार सुबह फांसी पर चढ़ा दिया गया. उन्हें रिवॉल्यूशनरी कोर्ट ने 'अल्लाह के ख़िलाफ़ दुश्मनी' का दोषी पाया.
मोहसिन शेकारी पर सितंबर में तेहरान की मुख्य सड़क को ब्लॉक करने और एक सुरक्षाकर्मी पर कुल्हाड़ी से वार करने के आरोप में अभियोग चलाया गया था.
एक कार्यकर्ता ने कहा है कि मोहसिन को बिना कानूनी प्रक्रिया के दोषी घोषित किया गया था.
नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स के निदेशक महमूद आमिरी मोग़ाद्दम ने ट्वीट कर लिखा, "जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को अपने क़दमों का तुरंत खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा तब तक वो प्रदर्शनकारियों को ऐसे ही फांसी पर चढ़ाता रहेगा."
ट्विटर पर कई अन्य लोगों ने भी मोहसिन की सज़ा पर सवाल उठाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखी सज़ा
ईरान की न्यायापालिका की न्यूज़ एजेंसी मिज़ान ने ख़बर दी है कि रिवॉल्यूशनरी कोर्ट को बताया गया था कि मोहसिन शेकारी ने 25 सितंबर को तेहरान की सत्तार ख़ान स्ट्रीट को ब्लॉक किया और सुरक्षाकर्मी पर कुल्हाड़ी से हमला किया.
मिज़ान के मुताबिक एक नवंबर को अदालत ने मोहसिन शेकारी को हमला करने और हत्या करने के लिए हथियार का इस्तेमाल करने का दोषी करार दिया था. उन्हें अंत में ईश्वर के साथ दुश्मनी के अभियोग में दोषी पाया गया था.
मोहसिन शेकारी ने इस फ़ैसले के विरुद्ध अपील की थी लेकिन 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ये सज़ा बहाल रखी.
ईरान में न्यायापालिका ने दस अन्य लोगों को भी सज़ा-ए-मौत सुनाई है. ये सारे फ़ैसले रिवॉल्यूशनरी कोर्ट ने सुनाए हैं. अधिकतर मामलों में प्रदर्शनकारियों को 'अल्लाह से दुश्मनी'और 'पृथ्वी पर प्रदूषण' फैलाने का दोषी पाया गया है.
इन दस लोगों की पहचान नहीं बताई गई है.
उधर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि मौत की सज़ाएं, प्रदर्शनों को दबाने और जनता में डर पैदा करने के लिए सुनाई गई हैं.
एमनेस्टी ने कहा कि रिवॉल्यूशनरी कोर्ट ईरान की ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियों के दवाब में काम करता है और ये ख़ुफ़िया प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सख़्त सज़ाएं सुनाता है.
ईरान में प्रदर्शन
ईरान की सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन सितंबर के महीने में शुरू हुए थे. प्रदर्शनों की शुरुआत 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद हुई. महसा अमीनी को मॉरिलिटी पुलिस ने हिजाब सही तरह से नहीं पहनने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.
ईरान के 31 प्रांतों के 160 शहरों में विरोध प्रदर्शन होने लगे. इनमें से अधिकतर की अगुवाई महिलाएं कर रही थीं. 1979 की क्रांति के बाद गठित इस्लामिक रिपब्लिक के लिए ये विरोध प्रदर्शन अब तक की सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर देखे गए.
ईरान के नेताओं ने इन प्रदर्शनों को 'दंगा' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे विदेशी दुश्मनों का हाथ है. उन्होंने सुरक्षा बलों को आदेश दिया कि वो प्रदर्शनों के साथ 'सख्ती से निपटें'.
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक 475 लोग मारे जा चुके हैं. 18 हज़ार 240 लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस दौरान 61 सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है.
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