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यूक्रेन युद्ध: रूस ये क्यों कह रहा है कि यूक्रेन 'डर्टी बम' का इस्तेमाल कर सकता है?
रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने बिना किसी ठोस सबूत के ये दावा किया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान 'डर्टी बम' का इस्तेमाल कर सकता है.
डर्टी बम ऐसे हथियार को कहा जाता है जिसमें पारंपरिक विस्फोटकों के अलावा रेडियोधर्मी पदार्थ भी होते हैं.
यूक्रेन की सरकार ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने भी रूस के इन दावों को नकार दिया है.
रूस ने क्या कहा है?
रूस के रक्षामंत्री सर्गेई शोइगू ने ब्रितानी रक्षामंत्री बेन वालेस से कहा है कि वो 'यूक्रेन की तरफ़ से उकसावे की कार्रवाइयों को लेकर चिंतित हैं जिनमें डर्टी बम से हमला भी शामिल है.'
शोइगू ने अमेरिका, फ़्रांस और तुर्की के रक्षामंत्रियों से बातचीत में भी ऐसी ही टिप्पणी की है.
एक साझा प्रतिक्रिया में, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की सरकारों ने कहा है कि "हम सभी रूस के निराधीन आरोपों को ख़ारिज करते हैं कि यूक्रेन अपनी ही ज़मीन पर डर्टी बम का इस्तेमाल क सकता है."
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए रूस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि "इस युद्ध में जिस हर बुरी चीज़ की कल्पना की जा सकती है उसका स्रोत रूस ही है."
क्या होता है डर्टी बम?
इसे रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सन डिवाइस कहा जाता है. ये एक तरह का बम होता है जिसमें यूरेनियम जैसे रेडियोधर्मी पदार्थ होते हैं जो पारंपरिक विस्फोटक के धमाके के बाद वातावरण में फैल जाते हैं.
इन बम में परमाणु बम की तरह अत्याधिक उन्नत रेडियोधर्मी पदार्थ की ज़रूरत नहीं होती है. इसकी जगह इनमें अस्पतालों, परमाणु संयंत्रों या शोध प्रयोगशालाओं से मिलने वाले रेडियोधर्मी पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसी वजह से परमाणु बमों के मुक़ाबले इन्हें बेहद कम क़ीमत और कम समय में विकसित किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर इन्हें किसी वाहन में रखकर भी धमाका किया जा सकता है.
रेडियोधर्मी संक्रमण से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो जाती हैं, ऐसे में इस तरह का बम निशाने पर ली गई आबादी में अफ़रा-तफ़री और डर पैदा कर सकता है.
जिस जगह पर धमाका किया गया हो उसके आसपास के बड़े इलाक़े को खाली कराना पड़ सकता है या फिर पूरी तरह छोड़कर जाना पड़ सकता है.
द फ़ेडेरेशन ऑफ़ अमेरिकन साइंटिस्ट की गणना के मुताबिक अगर अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर के मेनहेटन इलाक़े में सिर्फ़ 9 ग्राम कोबाल्ट और 5 किलो टीएनटी के बम से विस्फोट कर दिया जाए तो ये समूचा इलाक़ा कई दशकों तक रहने के लायक नहीं रह जाएगा.
इसी वजह से डर्टी बम को वेपन ऑफ़ मास डिस्रप्शन (भयानक अफ़रा-तफ़री पैदा करने वाले हथियार) भी कहा जाता है.
हालांकि हथियार के रूप में इन पर बहुत भरोसा भी नहीं किया जा सकता है.
डर्टी बम के रेडियोधर्मी पदार्थ को निशाने पर लिए गए इलाक़े में फैलाने के लिए इसे पाउडर में तब्दील करना होता है. लेकिन अगर ये पाउडर बहुत बारीक़ है और तेज़ हवा चल रही हो तो ये दूर तक जा सकते हैं और बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
रूस ने डर्टी बम का दावा क्यों किया है?
अमेरिका स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ़ वॉर स्टडीज़ (आईएसडब्ल्यू) का कहना है कि रूस के रक्षा मंत्री ने ये दावा इसलिए किया है 'ताकि यूक्रेन को पश्चिमी देशों से मिल रही मदद को धीमा किया जा सके या पूरी तरह रोका जा सके और नेटो गटबंधन को डराया जा सके.'
ऐसा शक़ भी है कि रूस स्वयं ही यूक्रेन में डर्टी बम का इस्तेमाल कर सकता है और जवाबदेही यूक्रेन पर डालने के लिए झूठे हमले का दावा कर सकता है.
हालांकि बहुत से सैन्य विश्लेषक ये मानते हैं कि रूस इतना बेवकूफ़ नहीं होगा कि ऐसे हथियार का इस्तेमाल करे जो उसके अपने सैनिकों और यहां तक कि नागरिकों को भी नुक़सान पहुंचा सकता है.
आईएसडब्ल्यू का कहना है कि, "ऐसा लगता नहीं है कि रूस डर्टी बम के झूठे हमले की तुरंत तैयारी में लगा हो."
क्या पहले कभी डर्टी बम का इस्तेमाल हुआ है?
अभी तक दुनिया में कहीं भी डर्टी बम का कोई कामयाब हमला नहीं हुआ है.
हालांकि ऐसे हमले करने के प्रयास किए गए हैं.
कैंसर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से केसियम निकाला गया है.
1996 में चेचेन्या के विद्रोहियों ने मॉस्को के इज़माइलोवो पार्क में डाइनामाइट और केसियम-137 के मिश्रण वाला बम लगा दिया था.
इस केसियम को भी कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से निकाला गया था.
सुरक्षाबलों को इस बम के लगाए जाने की जगह का पता चल गया था और इसे निष्क्रिय कर दिया गया था.
1998 में चेचेन्या के सुरक्षाबलों ने एक रेलवे लाइन के किनारे लगाए गए डर्टी बम को निष्क्रिय किया था.
साल 2002 में अमेरिकी नागरिक होसे पाडीला को शिकागो में डर्टी बम से हमले की योजना बनाने के शक में गिरफ़्तार किया गया था. पाडीला के अल-क़ायदा से संबंध थे और उसे 21 साल की सज़ा सुनाई गई थी.
साल 2004 में ब्रितानी नागरिक और अल-क़ायदा सदस्य धीरेन बेरट को लंदन में गिरफ़्तार किया गया था. उस पर अमेरिका और ब्रिटेन में डर्टी बम से हमले की योजना बनाने के आरोप थे. साल 2006 में धीरेन को 30 साल की सज़ा सुनाई गई ती.
हालांकि धीरेन और पाडीला दोनों ही गिरफ़्तारी के समय तक अपने बम को बनाने पर काम शुरू नहीं कर पाए थे.
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