बाइडन ने पाकिस्तान को क्यों बताया दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में से एक

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नवंबर में होने वाले संसद के मध्यावधि चुनाव के लिए आयोजित फ़ंड जुटाने के डेमोक्रेटिक पार्टी के एक कार्यक्रम में गुरुवार रात वर्तमान वैश्विक स्थिति पर खुलकर अपनी बात कही.

बाइडन के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद एक ओर जहां कई देशों में दक्षिणपंथी सरकारें आईं हैं, वहीं कई देशों के अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव है.

फ़ंड जुटाने के कार्यक्रम में राष्ट्रपति बाइडन ने दुनिया भर में लोकतंत्र के ख़तरे और बढ़ती निरंकुशता पर भी अपनी बात कही.

लॉस एंजिलिस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने बाइडन पाकिस्तान को निशाने पर लिया. बाइडन ने पाकिस्तान को दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में से एक बताया. बाइडन ने कहा, ''मुझे लगता है कि शायद पाकिस्तान दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में से एक है. एक ग़ैर-ज़िम्मेदार देश के पास परमाणु हथियार है.''

अमेरिकी राष्ट्रपति जब भीड़ के सामने यह बात कह रहे थे तो वहाँ टेलीविजन वैज्ञानिक बिल नाए और फ़ैशन डिज़ायनर टॉम फोर्ड भी मौजूद थे.

अमेरिकी राजदूत से पाकिस्तान ने मांगा स्पष्टीकरण

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो से पत्रकारों ने सवाल पूछे तो उन्होंने पाकिस्तान स्थित अमेरिकी राजदूत को इस बाबत तलब करने की बात की.

उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अमेरिका से उसका आधिकारिक बयान जानना चाहता है.

बिलावल ने कहा, "प्रधानमंत्री से बात कर के अमेरिकी राजदूत को तलब किया जाएगा और पाकिस्तान उनसे आधिकारिक बयान को जानना चाहेगा."

वे बोले, "अलग मसलों पर हमारा अपना नज़रिया है. अमेरिका का भी अपना नज़रिया है. लेकिन जब आप एक समझदार और ज़िम्मेदार देश होते हैं तो कुछ मसलों पर आप सहमत होते हैं कुछ पर असहमत. मुझे नहीं लगता कि ये देश के नाम उनका संदेश था बल्कि ये अनौपचारिक बातचीत थी."

उन्होंने ये स्पष्ट किया कि, "पाकिस्तान अमेरिकी राजदूत को तलब करेगा. उन्हें ये मौका दिया जा रहा है कि वो अपने देश की ओर से आए इस बयान की व्याख्या करें."

देर शाम पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि कार्यवाहक विदेश सचिव जौहर सलीम ने अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम को अमेरिकी राष्ट्रपति के 14 अक्टूबर को दिए गए बयान पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देने को कहा.

बाइडन ने और क्या-क्या कहा

बाइडन ने कहा, ''दुनिया बदल रही है. बहुत तेज़ी से बदल रही है. यह स्थिति नियंत्रण से बाहर की है. ऐसा किसी एक व्यक्ति और एक देश की वजह से नहीं है. आप अमेरिकी देशों के संगठनों को देखिए कि यहां क्या हो रहा है. नेटो के लिहाज़ से भी देखें तो पता चलता है कि क्या घटित हो रहा है. हर कोई अपनी दुनिया में अपनी जगह को लेकर फिर से सोच रहा है. हर कोई अपनी साझेदारी और सहयोग को लेकर फिर से सोच रहा है.''

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने के लिए बहुत कुछ है. एक साथ कई चीज़ें हो रही हैं. हम उस स्थिति में हैं, जहाँ तकनीक ने चीज़ों में भयावह तब्दीली लाई है. दुनिया भर की राजनीति में व्यापक बदलाव आया है. लोगों तक सच्चाई कैसे पहुँच रही है?"

"लोग फ़ैक्ट और फ़िक्शन में कैसे फ़र्क़ कर पा रहे हैं. कई चीज़ें एक साथ चल रही हैं. हम इन सबके बीच में हैं. दुनिया हमलोग की तरफ़ देख रही है. यहाँ तक कि दुश्मन भी हमलोग की ओर देख रहे हैं कि इनका सामना हम कैसे करते हैं.''

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''हमारे स्टाफ़ ने गिनती कर बताया था कि वो नेटो और यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ 225 घंटों तक सीधे संपर्क में रहा था. पुतिन ने नेटो में विभाजन पैदा करने की कोशिश की. आप देखिए कि नेटो के पूर्वी मोर्चे पर क्या हुआ? आप देखिए कि पोलैंड अभी क्या कर रहा है. पोलैंड जुड़ा रहा. लेकिन हंगरी के साथ क्या हुआ? आप देखें कि हाल ही में स्पेन और इटली में क्या हुआ."

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''1946 के बाद दुनिया में शांति बनी रही. आज की दुनिया बदली हुई है. अभी की दुनिया बिल्कुल अलग है. आपमें से किसी ने कभी सोचा होगा कि क्यूबा मिसाइल संकट के बाद एक रूसी नेता परमाणु हथियारों को लेकर रणनीतिक रूप से धमकी दे रहा है. क्या किसी ने सोचा होगा कि हम उस स्थिति में होंगे जब रूस, भारत और पाकिस्तान के मामले में चीन अपनी भूमिका तय करने की कोशिश करेगा?''

बाइडन ने कहा, ''अमेरिका और पूरी दुनिया में जितना लंबा समय मैंने शी जिनपिंग के साथ बिताया है, उतना किसी व्यक्ति ने नहीं बिताया. मैंने उनके साथ 78 घंटे गुज़ारे हैं. 68 घंटे तो पिछले 10 सालों में. बराक ओबामा ने मुझे ही यह ज़िम्मेदारी सौंपी थी. मैंने शी जिनपिंग के साथ 17,000 मील की यात्रा की है."

"इस व्यक्ति को पता है कि वह क्या चाहता है लेकिन इसके साथ ही विशाल समस्या भी है. हमें इसे कैसे हैंडल करना है? रूस में जो कुछ चल रहा है, उसे कैसे हैंडल करना है? और मुझे लगता है कि शायद दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश पाकिस्तान है. एक ग़ैर-ज़िम्मेदार देश के पास परमाणु हथियार है.''

बाइडन ने ट्रंप पर भी किया तंज़

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''बहुत सारी चीज़ें चल रही हैं. लेकिन अमेरिका के लिए यह मौक़ा भी है कि 21वीं सदी की तिहाई में हम ख़ुद को कैसे बदलें. आपने देखा होगा कि जी-7 देशों की बैठक में गया तो मैंने कहा था कि अमेरिका लौट आया है. इस ग्रुप में दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश हैं."

"जब मैंने ये बात कही तो लोगों ने पूछा कि कब तक, कब तक? एक ने पूछा कि मिस्टर प्रेजिडेंट सुबह आप नींद से जगें और पता चले कि ब्रिटिश संसद में हज़ारों लोग घुस गए हैं और तोड़फोड़ कर कुछ नेताओं को मार दिया गया है. आप इसे लेकर क्या सोचेंगे?'' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप समर्थकों के कांग्रेस में घुसने को लेकर यह तंज़ कर रहे थे.

जी-7 के सदस्य देश इटली में दक्षिणपंथी नेता जॉर्जिया मेलोनी प्रधानमंत्री चुनी गई हैं.

बाइडन ने कहा, "आपने अभी देखा कि इटली में चुनाव में क्या हुआ. आप देख रहे हैं कि दुनियाभर में क्या हो रहा है. और यही कारण है कि मैं कहना चाहता हूं कि जो यहां हो रहा है उसको लेकर हम आशावादी नहीं हो सकते हैं."

बाइडन ने इसके साथ ही हंगरी पर निशाना साधा क्योंकि लोकतंत्र के लिए आयोजित हुए एक सम्मेलन में हंगरी ने यूरोपियन यूनियन के शामिल होने को लेकर बाधा पैदा की थी. इसके साथ ही बाइडन पाकिस्तान के आतंकवाद से निपटने को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को ध्यान से देखते रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद बाइडन प्रशासन को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था.

राष्ट्रपति बाइडन की इन बेबाक टिप्पणियों को एक उलझन की तरह भी देखा जा रहा है क्योंकि इससे व्हाइट हाउस के सामने भूराजनीतिक दिक़्क़तें खड़ी हो सकती हैं.

रूस के हमले को रोकने के लिए यूक्रेन की कोशिशों को सहारा देने के लिए अमेरिका और दूसरे लोकतंत्रों को इटली के समर्थन की बड़ी ज़रूरत है. ख़ासकर के उस समय जब सर्दियां नज़दीक आ रही हैं और ऊंची ऊर्जा दरें यूरोपीय राष्ट्रों के ख़र्च को बढ़ा सकती हैं.

पाकिस्तान से तीखी प्रतिक्रिया

बाइडन के टिप्पणी से पाकिस्तान से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चीफ इमरान खान ने पूछा है कि पाकिस्तान ने परमाणु ताकत हासिल करने के बाद पूरी दुनिया में अपना आक्रामक रवैया कब दिखाया है?

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि ये बयान पाकिस्तान की 'आयातित सरकार' की विदेश नीति की नाकामी दिखाता है. साथ ही ये पाकिस्तान सरकार के अमेरिका के साथ अपने रिश्ते दुरुस्त करने के दावे की पोल भी खोलता है.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेता असद उमर ने लिखा है, ''एक अस्थिर देश के पास परमाणु हथियार? क्या अमेरिका यह बात अपने लिए कह रहा है? पिछले राष्ट्ऱपति चुनाव में अमेरिका में क्या हुआ, इसे सबने देखा है. जिनके ख़ुद के घर शीशे के हैं, उन्हें दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए.''

भारत में पाकिस्तान के राजदूत रहे अब्दुल बासित ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के बयान पर खेद जताया है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर राष्ट्रपति बाइडन का बयान बेहद खेदजनक है. सच तो यह है कि आज की तारीख़ में पाकिस्तान की तुलना में अमेरिका ज़्यादा बँटा हुआ है. दिलचस्प है कि अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी स्ट्रैटिजी 2022, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किया है, उसे भी वह समर्थन नहीं कर रहे हैं.''

वहीं इमरान ख़ान की सरकार में मंत्री रहीं और पीटीआई की नेता शिरीन मज़ारी ने भी ट्वीट करके अमेरिकी राष्ट्रपति की निंदा की है.

उन्होंने ट्वीट किया है कि अमेरिका को दूसरे देशों को निशाना बनाने से पहले गंभीर रूप से अपना विश्लेषण कर लेना चाहिए, एक अस्थिर परमाणु महाशक्ति बाक़ी दुनिया के लिए एक गंभीर ख़तरा है.

पीटीआई के ही एक और नेता चौधरी फ़वाद हुसैन ने ट्वीट किया है, "चंद दिन पहले सऊदी अरब के बारे में बयानबाज़ी और अब पाकिस्तान पर ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान, यूं लगता है राष्ट्रपति बाइडन अमेरिकी जनता में गिरती हुई साख़ से ध्यान हटाना चाहते हैं. राष्ट्रपति बाइडन ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान को फ़ौरन वापस लें, हमारी मौजूदा लीडरशिप कमज़ोर हो सकती है लेकिन जनता कमज़ोर नहीं है."

पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट करके सवाल पूछा है, "परमाणु बमों से हिरोशिमा और नागासाकी को किसने तबाह किया? पाकिस्तान या अमेरिका ने? कौन सबसे ख़तरनाक देश है? क्या जो बाइडन जवाब देंगे?"

बाइडन की पाकिस्तान को लेकर टिप्पणी सामने आने के बाद पाकिस्तान में 'बाइडन' शब्द दूसरा टॉप ट्रेंड बना हुआ है. अब तक बाइडन शब्द के साथ 5.5 लाख से अधिक ट्वीट हो चुके हैं.

व्हाइट हाउस की आई सफ़ाई

इटली पर बाइडन की टिप्पणी के बाद व्हाइट हाउस को इस मुद्दे पर सफ़ाई देने के लिए सामने आना पड़ा.

व्हाइट हाउस ने माना कि इटली स्वतंत्र चुनाव के परिणामों पर राष्ट्रपति की टिप्पणी की सराहना शायद नहीं करेगा.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता केरीन जीन-पियरे ने पत्रकारों से कहा, "चुनावी प्रक्रिया के बाद सामने आई नई सरकार के साथ अमेरिका काम करने के लिए तैयार और उत्सुक है और अपने कई साझा लक्ष्य और आपसी हितों के लिए सहयोगियों के रूप में काम करना जारी रखने के लिए तैयार है."

इसके साथ ही प्रवक्ता केरीन ने कहा कि अमेरिका इटली के लोगों के लोकतांत्रिक विकल्प का सम्मान करता है.

इसके साथ ही बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से कहा है कि राष्ट्रपति की टिप्पणी किसी नए मूल्यांकन पर नहीं है और न ही अमेरिका ने पुतिन की ओर से ऐसे कोई संकेत देखे हैं जो बताएं कि वो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है.

प्रवक्ता केरीन जीन-पियरे ने अगले दिन प्रेस से कहा कि राष्ट्रपति बाइडन ने क्यों सार्वजनिक मंच की जगह अमीर दानदाताओं के समूह में एक संभावित परमाणु युद्ध के ऊपर चिंता जताई थी.

केरीन ने कहा, "हम जो कह रहे थे, उसे वह पुष्ट कर रहे थे."

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