समरकंद में शी जिनपिंग भी थे और शहबाज़ शरीफ़ भी, पर सिर्फ़ पुतिन से मोदी की हुई आमने-सामने बात

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शंघाई सहयोग संगठन एससीओ की शिखर वार्ता के दौरान शुक्रवार को समरकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की.
इस साल फ़रवरी में शुरू हुए यूक्रेन संकट के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की ये पहली मुलाकात थी. हालांकि दोनों के बीच कई बार फ़ोन पर बातचीत हुई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत में द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर भी चर्चा हुई.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात में वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद और यूक्रेन के ताज़ा हालात पर भी चर्चा हुई.
पीएमओ के ट्विटर हैंडल से कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस संबंधों को और मज़बूत बनाने से जुड़े विषयों पर सकारात्मक बातचीत हुई है.
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चीन के साथ जारी है तनाव

एससीओ की बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ भी मौजूद थे. लेकिन सम्मेलन में औपचारिक भेंट के इतर दोनों से पीएम मोदी की अलग से मुलाक़ात नहीं हुई.
हालांकि पुतिन ने शी जिनपिंग और शाहबाज़ शरीफ़ से अलग-अलग मुलाक़ात की है.
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पाँच मई 2020 से तनाव है. पैंगोंग लेक इलाक़े में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.
भारत चीन पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर नए सैन्य ठिकानों का निर्माण करने और हथियार तैनात करने के आरोप लगाता रहा है. पिछले महीने ही पता चला था कि चीन पूर्वी लद्दाख में दूसरा पुल बना रहा है.
फ़रवरी 2021 में दोनों देशों ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर चरणबद्ध और समन्वित तरीके से तनाव को कम करने घोषणा की. तनाव कम करने को लेकर दोनों पक्षों में कमांडर स्तर की बातचीत का दौर भी जारी है, लेकिन अब तक तनाव पूरी तरह कम नहीं हो सका है.
पाकिस्तान के पीएम भी थे समरकंद में मौजूद

पाकिस्तान के साथ भी भारत के रिश्ते बीते कई सालों से अच्छे नहीं हैं. करतारपुर कॉरीडोर के ज़रिए संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलवामा और फिर बालाकोट की घटना ने दोनों पड़ोसियों के संबंधों को फिर से पटरी से उतार दिया.
इमरान ख़ान के बाद शहबाज़ शरीफ़ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के संकेत दिए. वो भी समरकंद में मौजूद थे. उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत के प्रधानमंत्री और उनकी आमने-सामने की मुलाकात संभव हो सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
पाकिस्तान के साथ भारत का सीमा विवाद जारी है. कश्मीर मुद्दे को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार भारत की आलोचना कर चुके हैं.
भारत सरकार ने 2019 में जब कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद को हटाया तो इसका भारी विरोध पाकिस्तान में देखा गया. इमरान ख़ान ने यहां तक कहा कि भारत जब तक कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 हटाने का फ़ैसला वापस नहीं लेता, पाकिस्तान भारत से किसी भी तरह से राजनयिक संबंध बहाल नहीं करेगा.
हालांकि बाद में उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा नीति तैयार की और उसमें भारत के साथ शांति और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने की बात कही.

मोदी-पुतिन में क्या हुई बात?
- एससीओ सम्मेलन के दौरान हुई मोदी और पुतिन की मुलाक़ात.
- दोनों के बीच द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर भी चर्चा हुई.
- मोदी ने कहा, ये युद्ध का युग नहीं.बोले- खाद्य संकट और ऊर्जा संकट का हल निकलना चाहिए और रूस को आगे आना चाहिए.
- मोदी ने पुतिन का आभार जताया और कहा- आपकी और यूक्रेन की मदद से अपने छात्रों को यूक्रेन से निकाल सके.
- पुतिन ने मोदी को एक दिन पहले उनके जन्मदिन की बधाई दी. कहा- आपको बताना चाहता हूं कि हमारी दोस्ती बहुत गहरी है.
- पुतिन ने कहा - यूक्रेन पर आपकी चिंता समझते हैं और युद्ध ख़त्म करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन ऐसा नहीं चाहता.
- पुतिन ने मोदी को रूस ने आने का न्योता दिया.


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पुतिन से क्या बोले मोदी?

पीएमओ की तरफ़ से जारी वीडियो में मोदी ने कहा, "जब आप (पुतिन) बीते साल दिसंबर में भारत आए तो उस दौरान कई मु्द्दों पर आपसे बात हुई थी. उसके बाद फ़ोन पर कई बार आपसे बार चर्चा हुई. आज भी हमारी मुलाक़ात तब हो रही है जब दुनिया के कई विकासशील देश खाद्य संकट और ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं. हमें मिलकर इस समस्या को सुलझाना होगा और आपको भी इसमें पहल करनी होगी."
पीएम मोदी ने युद्ध के शुरुआती दिनों में यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों का ज़िक्र किया और कहा, "मैं आपका और यूक्रेन का धन्यवाद करना चाहूंगा क्योंकि आप दोनों की मदद से हम यूक्रेन में फंसे अपने हज़ारों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल सके."
उन्होंने युद्ध का शांतिपूर्ण हल निकालने पर ज़ोर देते हुए कहा, "आज का युग युद्ध का नहीं है. फ़ोन पर हमने इस बारे में बात की है कि डेमोक्रेसी, डिप्लोमेसी और डायलॉग ऐसी बातें हैं जिसका दुनिया को पालन करना चाहिए ताकि शांति की राह पर बढ़ा जा सके."
यूक्रेन पर हमले के लिए भारत ने रूस की कभी आलोचना नहीं की है. भारत का रुख़ यूक्रेन के मसले पर यही रहा है कि इस संकट का हल बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए.
पीएम मोदी जब यह कह रहे थे तब व्लादिमीर पुतिन मोदी को निहारते हुए अपने होठ सिकोड़ रहे थे. उसके बाद उन्हें अपने सिर के पीछे के बालों को छुते हुए देखा गया.
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले साढ़े सात महीनों से युद्ध चल रहा है. अब तक इस युद्ध में 10 हज़ार से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं. इससे रूस और पश्चिमी देशों के बीच शीत युद्ध के बाद सबसे भयानक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. इससे आर्थिक मोर्चे पर भी दुनिया के सामने कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं.
पीएम मोदी ने आगे दशकों से चली आ रही रूस और भारत के बीच की दोस्ती की बात की और कहा, "हम ऐसे मित्र हैं जो कई दशकों से साथ रहे हैं. व्यक्तिगत रूप से कहूं तो हमारी यात्रा भी एक वक्त पर शुरू हुई है. आपकी यात्रा 2001 में शुरू हुई जब आप सत्ता में आए और मैं उस वक्त राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहा है. आज 22 साल हो गए हैं और हम लगातार इस क्षेत्र के लिए काम कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि दोनों के रिश्ते आने वाले वक्त में और मज़बूत होंगे."

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पुतिन ने मोदी से क्या कहा?

जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी से मुखातिब हुए तो उन्होंने सबसे पहले कहा कि रूस में एक दिन पहले जन्मदिन की बधाई नहीं दी जाती है, लेकिन वो इस मौके का इस्तेमाल कर उन्हें जन्मदिन की अग्रिम बधाई देना चाहते हैं.
उसके बाद व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा, "मैं यूक्रेन पर आपका रुख़ जानता हूं. इसे आप लगातार व्यक्त करते रहे हैं. मैं इसे जितनी जल्दी हो सके रोकने की हरसंभव कोशिश करूंगा."
उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन ने बातचीत को ठुकरा दिया है. उन्होंने कहा, "यूक्रेन के मुद्दे पर आपकी चिंता को समझते हैं और चाहते हैं कि ये सब जल्द से जल्द ख़त्म हो, लेकिन दूसरा पक्ष यानी यूक्रेन का नेतृत्व सैन्य अभियान के ज़रिए अपना उद्देश्य हासिल करना चाहता है. हम आने वाले वक्त में भी आपको ताज़ा स्थिति के बारे में जानकारी देते रहेंगे."
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोदी से कहा कि दोनों मुल्कों (भारत और रूस) के बीच संबंध और मज़बूत हो रहे हैं और दोनों मुल्क कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हम एससीओ में आपके साथ काम कर रहे हैं और ये मुलाक़ात हमारे अच्छे रिश्तों को और मज़बूत करती है."
उन्होंने भारत के अपने दौरे को याद करते हुए कहा, "बीते साल मैंने दिल्ली का दौरा किया था जिसकी अच्छी यादें मेरे ज़ेहन में हैं. मैं इस मौक़े पर आपको रूस के दौरे के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं."
उन्होंने कहा, "मैं ये भी बताना चाहता हूं कि हम भारत के साथ खाद सप्लाई का व्यापार बढ़ा है, हम भारत के साथ वीज़ा फ्री टूरिस्ट एंट्री की योजना पर भी हमें मिलकर काम करना चाहिए."
(कॉपी - मानसी दाश)
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