चीन इस देश में मेगापोर्ट बनाकर क्या लैटिन अमेरिका में पांव पसारना चाहता है?

चांके का बंदरगाह

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    • Author, गुलेर्मो डी ओल्मो
    • पदनाम, पेरू में बीबीसी संवाददाता

लैटिन अमेरिकी देश पेरू के समुद्रतट पर राजधानी लीमा के नज़दीक चांके आज से कुछ साल पहले प्रवासी समुद्री पक्षियों का ठिकाना हुआ करता था जो कनाडा और अमेरिका से कुछ महीनों के लिए यहां आया करते थे. ये समुद्रतट मछुआरों की जीविका का भी स्रोत हुआ करता था.

केवल 63,400 की आबादी वाला ये शहर प्रशांत महासागर से सटा है. यहां रहने वालों को अंदाज़ा भी नहीं था कि कुछ सालों में इस शहर की शक्लोसूरत पूरी तरह बदल जाएगी और ये शहर एक ऐसे मेगापोर्ट के लिए जाना जाएगा जो लैटिन अमेरिका और चीन के बीच व्यापार की अहम कड़ी बनेगा.

यहां लोगों का सड़क किनारे लकड़ी की बेंच पर बैठकर बातें करना या फिर किसी दुकानदार को किसी पर्यटक को ये बताना कि यहां बेहतरीन मछली मिलती है आम बात है. ये बात आज भी सच है.

लेकिन 2021 के ख़त्म होने के बाद से यहां के नागरिक लगातार मशीनों और ज़मीन समतल करने के लिए किए जा रहे धमाकों की आवाज़ के बीच रह रहे हैं.

चीन की एक बड़ी कंपनी कॉस्को शिपिंग पोर्ट्स लीमा से 80 किलोमीटर दूर यहां चांके में एक मल्टीपरपस पोर्ट टर्मिनल यानी मेगापोर्ट बना रही है. माना जा रहा है कि ये ऐसा ढांचा होगा जिसके ज़रिए चीन पेरू में अपनी मौजूदगी बनाने के साथ-साथ लैटिन अमेरिका में भी अपने पांव पसार सकता है.

इस पोर्ट के ज़रिए पेरू में मिलने वाला तांबा और दूसरे खनिजों का निर्यात बड़ी मात्रा में चीन को किया जा सकेगा. अपने बड़े विस्तार और कार्यक्षमता के कारण ये मेगापोर्ट जल्द ही यहां से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र बन सकता है.

द डायलॉग में एशिया और लैटिन अमेरिका मामलों की एक्सपर्ट मारग्रेट मायर्स ने बीबीसी मुंडो से कहा, "चांके पोर्ट इतना बड़ा होगा कि अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि आने वाले वक्त में चीन और एशिया को होने वाले निर्यात में इसकी भूमिका अहम होगी."

कॉस्को शिपिंग पोर्ट्स चांके में जो मेगापोर्ट बना रही है, चीन की सरकार के आंकड़ों के अनुसार उसे क़रीब 3.6 अरब डॉलर की लागत से बनाया जाएगा. पेरू की सरकार को उम्मीद है कि इस बंदरगाह से हर साल चीन और दक्षिण अमेरिका के बीच 580 अरब डॉलर का व्यापार हो सकेगा.

हालांकि ये महत्वाकांक्षी परियोजना विवादों में उलझ गई है. इसका समर्थन कर रही पेरू और चीन की सरकारों का कहना है कि इससे इलाक़े का विकास होगा, नई नौकरियां पैदा होंगी और व्यापार बढ़ेगा. लेकिन इसका विरोध करने वाले तर्क दे रहे हैं कि इसका असर यहां के समुदाय पर पड़ेगा, साथ ही इससे यहां के पर्यावरण को भी नुक़सान पहुंचेगा.

चांके का बंदरगाह

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पेरू की सीमा बोलिविया, ब्राज़ील, चिली, कोलंबिया और इक्वाडोर से मिलती है.

पेरू के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर चीन, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, कनाडा और जापान हैं.

चीन तांबा, सोना रिफ़ाइन्ड तांबा जैसी चीज़ों का अधिक मात्रा में निर्यात करता है.

साल 2020 में पेरू दुनिया में सल्फ़ाइड का सबसे बड़ा निर्यातक था.

व्हाइट हास की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में कोलंबिया के बाद पेरू दुनिया में कोकीन का सबसे बड़ा उत्पादक था.

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चीन के पेरू में क़दम रखने के बाद सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

पेरू सरकार एक नया बंदरगाह बनाकर देश के मुख्य बंदरगाह एल क्लाओ में होने वाली जहाज़ों की भीड़ कम करना चाहती है. एल क्लाओ बंदरगाह का इस्तेमाल अधिकतर आयात के लिए क्या जाता है.

लेकिन सरकार की योजना पर काम तब शुरू हुआ जब चीन ने इसमें दिलचस्पी दिखाई और इसमें निवेश करने का फ़ैसला किया. कॉस्को शिपिंग के आने के बाद चीज़ें तेज़ी से होने लगीं.

चांके पोर्ट में दुनिया के सबसे बड़े मालवाहक जहाज़ों से सामान ढुलाई करने की सुविधा होगी जो कि एक साथ 18,000 तक कंटेनर ले जा सकेंगे. यहां शुरुआत में माल ढुलाई के लिए चार प्वाइंट बनाए जाएंगे, बाद में उसे बढ़ाकर 15 तक किया जाएगा. जहाज़ों के खड़े होने के दो प्वाइंट्स के बीच किलोमीटर भर लंबी जगह होगी जहां माल रखने की सुविधा होगी.

इस बंदरगाह को बनाने के लिए पेरू की पहाड़ियों से घिरी इस जगह को समतल किया जा रहा है. साथ ही इसे नज़दीक के पैन-अमेरिकन हाइवे से जोड़ने के लिए जो सड़क बनाई जा रही है, उसके लिए 1.8 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदी जा रही है. ये सुरंग चांके शहर के नीचे से होकर गुज़रेगी.

इस सड़क में आम गाड़ियों के लिए तीन लेन होंगे और माल ढोने वाली गाड़ियों के लिए दो लेन होंगे. इसके नज़दीक कंटेनर रखने के लिए बड़े स्टोरेज क्षेत्र होंगे, भारी गाड़ियां खड़ी करने के लिए ख़ास जगह होगी और दफ़्तर और कस्टम ऑफ़िस के लिए भी जगह बनाई जाएगी.

चांके बंदरगाह के पास निर्माणाधीन सुरंग

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चीन की योजना क्या है

पेरू के यातायात और संचार मंत्री रहे ख़ुआन बरान्ज़ुएला के अनुसार, चांके दरअसल पड़ोसी चिली, कोलंबिया और इक्वाडोर को जोड़ने वाला "क्षेत्रीय स्तर का केंद्र" बन जाएगा. पेरू के लिए चीनी राजदूत लियांग यू कहते हैं कि "इससे पूरे देश के विकास में काफ़ी मदद मिलेगी और यहां से पूरे विश्व में निर्यात किया जा सकेगा."

चीन का ये पूरा काम उसकी महत्वाकांक्षी न्यू सिल्क रोड परियोजना के तहत किया जा रहा है जिसे वो आधिकारिक रूप से बेल्ट एंड रोड परियोजना कहता है. ये एक बेहद महत्वाकांक्षी निवेश परियोजना है जिसे साल 2013 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुरू किया था. इसके तहत चीन दूसरे मुल्कों में बड़े-बड़े निर्माण कार्य के लिए पैसे देता है.

मारग्रेट मायर्स कहती हैं, "लंबे वक्त से पेरू चीन का अहम सहयोगी रहा है. इसने खुले दिल से चीन का स्वागत किया गया है और पेरू की भी दिलचस्पी चीन के निवेश में है."

वो कहती हैं, "चीन ने साल भर का वक्त लगाकर अपनी एक ख़ास रणनीति बनाई है. वो अपने कंपनियों को ऐसे देशों में निवेश करने के लिए उत्साहित करता है जहां से उन्हें प्राकृतिक संसाधन मिल सके और जिसके बाज़ार में वो अपना सामान बेच सके. पेरू उसके लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां तांबे जैसे खनिज प्रचूर मात्रा में मिलते हैं जिसकी चीन में भारी मांग है."

वीडियो कैप्शन, श्रीलंका में चीन कैसे बढ़ा रहा है भारत की चिंता?

पेरू का क्या फ़ायदा

साल 2021 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक चिली है जिसके बाद दूसरे नंबर पर पेरू का स्थान आता है. 2021 में पेरू में 220 लाख मेट्रिक टन तांबे का उत्पाद किया गया था.

आंकड़े साबित करते हैं कि अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन पेरू का सबसे बड़ा आयात-निर्यात सहयोगी बन गया है. साल 2020 में चीन के साथ उसका व्यापार क़रीब 10.3 अरब डॉलर का था.

मायर्स कहती हैं कि आने वाले वक्त में चांके बंदरगाह बनने के बाद दोनों के बीच व्यापार और बढ़ने की संभावना है.

पेरू सरकार में मंत्री रहे ख़ुआन बरान्ज़ुएला ने कुछ वक्त पहले पद छोड़ने से पहले बीबीसी मुंडो से कहा था कि "चांके का प्रोजेक्ट उनके देश को अंततराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक तौर पर चिली जैसे दूसरे मुल्कों से महत्वपूर्ण बना देता है, जिसका एशिया-प्रशांत में व्यापार में अधिक दबदबा है."

उनके अनुसार ये मेगापोर्ट देश की अर्थव्यवस्था को धक्का देने का काम करेगा और अंतरराष्ट्रीय पटल पर पेरू को एक ख़ास पोज़िशन पर ले कर जाएगा."

चांके बंदरगाह के पास की जगह

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इमेज कैप्शन, चांके बंदरगाह के पास की जगह जहां मछली पकड़ने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है
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लैटिन अमेरिका में चीन का निवेश

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- 2000 से 2018 के बीच चीन ने लैटिन अमेरिका में कच्चे माल के रूप में 73 अरब डॉलर का निवेश किया.

- चीन ब्राज़ील में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. ब्राज़ील से चीन बड़ी मात्रा में लौह अयस्क खरीदता है.

- 2015 की जनवरी में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आने वाले एक दशक में लैटिन अमेरिका में 250 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की.

- साल 2016 में शी जिनपिंग पेरू, चिली और इक्वाडोर के दौरे पर गए थे.

- अर्जेंटीना चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है. इक्वाडोर और उरूग्वे भी इसके लिए चीन के साथ हाथ मिला चुके हैं.

- पेरू ने साल 2019 में औपचारिक तौर पर चीन की इस परियोजना में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी.

- चीन ने साल 2013 में एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेन्ट बैंक (एआईआईबी) की शुरुआत की. एक साल बाद उसने अपनी बेल्ट एंड रोड परियोजना शुरू की.

- माना जाता है कि बेल्ट एंड रोड के तहत किए जाने वाले इ्फ्रास्ट्रक्चर के काम के लिए आर्थिक मदद एआईआईबी करता है. हालांकि 2017 में फोर्ब्स के साथ बात करते हुए एआईआईबी के संचार विभाग के प्रमुख ने कहा था कि बेल्ट एंड रोड के तहत आए हर प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिले ये ज़रूरी नहीं.

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पर्यावरण से जुड़े गंभीर सवाल

पेरू सरकार बार-बार दावा करती आई है कि ये प्रोजेक्ट उसे पड़ोसी चिली से मुक़ाबले में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में थोड़ी बढ़त देगा. इसी साल मार्च के महीने में राष्ट्रपति पेद्रो कैस्टिलो का चांके दौरा इसी बात की तरफ इशारा था कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर कितनी गंभीर है.

पेरू में चीनी दूतावास के आकलन के अनुसार इस बंदरगाह के बनने से पेरू में सीधे तौर पर 1,300 नौकरियां पैदा होंगी और जब यहां से काम शुरू होगा तब 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी.

लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर पेरू में हर कोई खुश है ऐसा नहीं है. देश में विदेशी कंपनियों को लेकर विवाद पहले भी रहा है और अब चर्चा का केंद्र चीन की मदद ये बनाया जा रहा ये बंदरगाह है.

साल 2018 में नागरिक संगठनों के एक समूह ने कॉस्को शिपिंग कंपनी द्वारा यहां कराए पर्यावरण स्टडी के ख़िलाफ़ अपील की थी.

उन्होंने पर्यावरण पर इस प्रोजेक्ट के असर को समझने के लिए एक जर्मन मरीन बायोलॉजिस्ट स्टीफ़न ऑस्टरमेल की मदद ली.

उन्होंने एक रिपोर्ट बनाई जिसमें उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह के बनने से इसके साथ सटे सैंटा रोज़ा के वेटलैंड में बने अभयारण्य को भीषण क्षति पहुंचेगी. ये अभयारण्य पक्षियों की सैंकड़ों प्रजातियों का ठिकाना है, लेकिन गाड़ियों और भारी मशीनों की आवाज़ और वायू प्रदूषण से उन्हें नुक़सान हो सकता है.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनी ने अपने शुरूआती रिपोर्ट में पर्यावरण को होने वाले असर को कम कर दिखाया है. कंपनी ने ज़मीन को समतल बनाने की कोशिश में भूस्खलन के कारण होने वाले कटाव और भारी जहाज़ों के आने से समुद्री जीवों को संभावित नुक़सान के बारे में रिपोर्ट में सही जानकारी नहीं दी है. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार को इसे मंज़ूर नहीं करना चाहिए.

जियोट्यूब

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स्टीफ़न ऑस्टरमेल ने बीबीसी मुंडो से कहा कि "कंपनी ने अपनी स्टडी में पर्यावरण को होने वाले नुक़सान के बारे में जानने के लिए अपर्याप्त तरीके अपनाए और पेरू के अधिकारियों की कम जानकारी का फ़ायदा उठाया."

उनकी रिपोर्ट को आधार बना कर परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी मंज़ूरी देने वाले संगठन पेरू नेशनल एन्वायरमेन्टल सर्टिफ़िकेशन फ़ॉर सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट (सीनेस) ने कंपनी से अपनी रिपोर्ट में फिर से बदलाव करने को कहा. इसके बाद परियोजना में कुछ बदलाव भी किए गए. इसके तहत चांके समुद्रतट पर कटाव को रोकने के लिए बड़े-बड़े जियोट्यूब बिछाए गए.

ऑस्टरमेल कहते हैं, "तेज़ी से पानी बढ़ने पर इस जियोट्यूब्स से मदद मिलती है." वो सुनिश्चित करते हैं कि ये तकनीक समुद्रतटीय इलाक़ों में कटाव को रोकने में मदद कर सकती है.

हालांकि हाल के दिनों में ये जगह एक और मुश्किल से उस वक्त गुज़री जब स्पैनिश कंपनी रेप्सोल की एक रिफ़ाइनरी से लीक होकर तेल समुद्र में फैल गया. इसी साल जनवरी में पानी से भीतर बिछी कंपनी की एक पाइपलाइन उस वक्त फट गई जब इटली के एक टैंकर से रिफ़ाइनरी में माल उतारा जा रहा था.

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भारत के साथ पेरू के संबंध

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- भारत और पेरू का कूटनीतिक संबंध साल 1963 से शुरू हुआ.

- हालांकि पेरू के लीमा में भारत ने साल 1969 में ही अपना दूतावास खोला. इस वक्त तक चिली में मौजूद भारत के राजदूत पेरू के साथ संबंधों की ज़िम्मेदारी निभाते थे.

- 1990 से दोनों के बीच व्यापार बढ़ा है और आर्थिक रिश्ते मज़बूत हुए हैं.

- 2011-12 में दोनों मुल्कों के बीच क़रीब एक अरब डॉलर का व्यापार होता था जो 2018-19 तक बढ़कर 3.126 अरब डॉलर हो गया.

- लैटिन अमेरिका में पेरू भारत के लिए चौथा सबसे बड़ा आयातक और निर्यातक है.

- भारत पेरू से सोना, तांबा, सिंथेटिक फ़िलामेन्ट्स, कैल्शियम के फ़ॉस्फेट्स, अंगूर और मछली से जुड़े उत्पाद खरीदता है.

- वहीं पेरू भारत से गाड़ियां, लोहा और स्टील, कपड़ा, दवाएं, प्लास्टिक, रबर और टायर जैसे उत्पाद खरीदता है.

- भारत की पांच कंपनियों ने पेरू में खनन इंडस्ट्री में निवेश किया है. एक अनुमान के अनुसार ये निवेश क़रीब 3 करोड़ डॉलर का है.

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तेल लीक

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पेरू में मौजूद चीन के दूतावास ने बीबीसी के सवालों के उत्तर में लिखा कि "बंदरगाह के संबंध में कंपनी ने जो पर्यावरण रिपोर्ट सरकार को दी है, वो पेरू के सभी क़ानूनों और नियमों के दायरे में है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है."

चीनी अधिकारियों का कहना है कि "ऑस्टरमेल की तरफ़ से पूछे गए सवालों का तकनीकी रूप से जवाब" दिया गया है और उस रिपोर्ट को पेरू की पर्यावरण संस्था ने "रिजेक्ट कर दिया है".

बताया जा रहा है कि जिस पर्यावरण रिपोर्ट को आख़िरकार मंज़ूरी मिली उसमें सैंटा रोज़ा का इलाक़ा शामिल है जो अप्रत्यक्ष तौर पर प्रोजेक्ट प्रभावित इलाक़े में आता है और इसे सुरक्षित रखने के लिए कई क़दम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.

प्रोजेक्ट का विरोध

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प्रोजेक्ट के विरोध के अन्य कारण

इस प्रोजेक्ट के विरोध का एकमात्र कारण पर्यावरण पर होने वाला असर नहीं है.

चांके बंदरगाह के नज़दीक के रिहायशी इलाक़े में रहने वालों ने असोसिएशन फ़ॉर द डिफ़ेन्स ऑफ़ हाउसिंग एंड द एनवायर्नमेन्ट की अध्यक्ष मरियम आर्शे की मांग है कि बंदरगाह को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए.

उनका कहना है, "यहां रहने वाले कई लोगों के घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं. ज़मीन समतल करने के लिए रोज़ाना ब्लास्ट किए जाते है और इसके लिए पूरे के पूरे इलाक़े को खाली कराया जाता है."

"ये हमारे लिए मानसिक शोषण है. क्या आपको पता है कि हर रोज़ ब्लास्ट के झटकों के बीच रहना कैसा लगता है?"

मरियम आर्शे इस मुद्दे को राष्ट्रपति कैस्टिलो के सामने भी रख चुकी हैं. राष्ट्रपति ने उन्हें अपनी मुश्किलें यातायात और संचार मंत्री को बताने के लिए कहा. लेकिन आर्शे कहती हैं कि उनकी सभी कोशिशें बेकार गईं.

ख़ुआन बरान्ज़ुएला ने बीबीसी मुंडो से बातचीत में ये बात स्वीकार की कि "निर्माण के काम में ब्लास्ट किए जा रहे हैं जिससे भूस्खलन हो रहा है और ज़मीन कमज़ोर हो रही है. इस प्रक्रिया में कुछ घर भी तबाह हुए हैं."

नागरिकों की समस्याओं के सिलसिले में बरान्ज़ुएला इसी साल अगस्त में चीनी दूतावास के प्रतिनिधियों और कंपनी के अधिकारियों से मुलाक़ात करने वाले थे. लेकिन इस मुलाक़ात से पहले उन्हें राष्ट्रपति कैस्टिलो ने पद से हटा दिया.

राष्ट्रपति पेद्रो कैस्टिलो

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने बीते सालभर के भीतर जिन साठ से अधिक मंत्रियों को पद से हटाया है, बरान्ज़ुएला उन्हीं में से एक हैं.

उनके बाद यातायात और संचार मंत्री बने ख़िनेर अल्वरादो ने इस मामले में अब तक कोई क़दम नहीं उठाया है. मंत्रालय ने बीबीसी मुंडो से कहा कि मंत्री चांके बंदरगाह के संबंध में तब तक कोई बयान नहीं देंगे जब तक उन पर लगे आरोप हटाए नहीं जाते. उन पर सरकारी ठेके में कथित भ्रष्टाचार का आरोप है जिसे लेकर अभियोक्ता राष्ट्रपति कैस्टिलो और उनके परिवार के कई सदस्यों की जांच कर रहे हैं.

ख़िनेर अल्वरादो को भी कुछ वक्त पहले अभियोक्ताओं ने पूछताछ के लिए बुलाया था. कांग्रेस ने भी उनके ख़िलाफ़ प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके बाद हो सकता है कि उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़े.

चांके का बंदरगाह

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स्थानीय लोगों का क्या कहना है

इधर चांके में लोग बंदरगाह में चल रहे काम के शोर के बीच अपने दिन गुज़ार रहे हैं. बंदरगाह का काम शहर के बड़े हिस्से तक फैला हुआ है.

पहाड़ी का एक हिस्सा जिसे अब तक ध्वस्त नहीं किया गया है, उसके पास खड़े विलियम जुराडो समुद्रतट पर करीने से लगे मछली पकड़ने वाले नावों की तरफ इशारा करते हैं. चांके में जन्मे और पले बढ़े विलियम कहते हैं, "हम यहां सालों से मछली पकड़ कर और पर्यटन से शांतिपूर्वक गुज़ारा करते रह रहे हैं, लेकिन अब ये सब ख़त्म हो जाएगा."

उन्हें चिंता है कि बंदरगाह का बाद में और विस्तार किया जाएगा और इसके आसपास की जगह में ठिकाना खोजते हुए आने वाले सीगल, अबाबील, सैंडपाइपर, कूटस और बत्तख जैसे पक्षी यहां आना छोड़ देंगे.

लेकिन ऐसा लगता है कि चांके में सभी विलियम की तरह दुखी नहीं है. हाल में दिनों में बंदरगाह के कारण मिल रहे नए मौक़ों के कारण बाहर से कई लोग काम की तलाश में यहां आए हैं.

डाविला कहते हैं, "नज़दीक के वेटलैंड्स में रहने वाले कई परिवार आने वाले वक्त में अपनी ज़मीन बेचने के बारे में भी सोच रहे हैं."

एक गांव के बाहर निकलते वक्त हगांव के बाहर एक बोर्ड लगा हुआ है जो बदलते वक्त की तस्वीर बताता है.

बोर्ड पर लिखा है, "हम मेगापोर्ट के पास की ज़मीन खरीदते हैं."

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