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पाकिस्तान में बाढ़: सबसे बड़ी झील में पानी ख़तरनाक़ स्तर तक भरा
- Author, पम्ज़ा फिहलानी इस्लामाबाद से और साइमन फ्रेज़र लंदन से
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान में देश की सबसे बड़ी झील के पानी के स्तर को कम करने की कोशिशों के नाकाम होने के बाद, वहां पानी के झील के तट तोड़कर बहने का ख़तरा बढ़ गया है.
हाल के दिनों में हुई मानसून का भारी बारिश के कारण देश के सिंध प्रांत की मंछर झील में पानी ख़तरनाक़ स्तर तक भर गया है. मॉनसून बारिश के कारण देश की एक तिहाई हिस्से में लोग बाढ़ की मुश्किलें झेल रहे हैं.
झील के आसपास बसे निचले इलाक़ों को बचाने के लिए अब तक तीन जगहों से झील का पानी बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है. इस कारण एक लाख से अधिक लोगों को अपना घरबार छोड़ सुरक्षित जगहों का रुख़ करना पड़ा है.
लेकिन अभी भी झील के ओवरफ्लो करने का ख़तरा बना हुआ है और राहतकर्मी तेज़ी से आसपास के इलाक़ों से लोगों को निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं.
पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने कहा है कि बाढ़ से क़रीब 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं और इस कारण अब तक कम से कम 1,314 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 458 बच्चे हैं.
एक आकलन के अनुसार बाढ़ के कारण देश को कम से कम 10 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.
देश की ज़रूरत का आधा अनाज सिंध प्रांत में उगाया जाता है. ऐसे में चिंता जताई जा रही है देश पहले ही आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है, अब बाढ़ के कारण देश में अनाज संकट पैदा हो सकता है.
पाकिस्तान में बाढ़ का असर
- क़रीब 3.3 करोड़ लोग प्रभावित, 6 लाख 35 हज़ार लोग विस्थापित.
- अब तक 1,314 लोगों की मौत. मरने वालों में 458 बच्चे.
- झील का पानी निकालने की कोशिश में कई गांव पानी में डूबे.
- बीस लाख एकड़ खेती की ज़मीन में बाढ़ का पानी भरा.
- एक आकलन के अनुसार बाढ़ के कारण देश को कम से कम 10 अरब डॉलर का नुक़सान.
- यूएनएचसीआर के अधिकारी ने कहा आने वाले दिनों में और बारिश हो सकती है जिससे हालात बिगड़ सकते हैं.
झील का जलस्तर कम करने की कोशिश में कई गांव डूबे
मंछर झील के पास बसे दो गांवों में पानी भरने के बाद रविवार को अधिकारियों ने झील से पानी बाहर निकालने के लिए इसमें एक रास्ता बनाया था. उन्हें उम्मीद थी कि इससे झील के टूटने का ख़तरा कम होगा और घनी आबादी वाले पास के इलाक़े को ख़तरा कम होगा.
इसका असर 400 गांवों पर पड़ा और इससे एक लाख 35 हज़ार लोग प्रभावित हुए.
झील का पानी निकालकर कुछ गांवों में पानी भरने देने के फ़ैसले को लेकर विवाद भी हुआ. ये झील दादू और जामशोरो ज़िलों में पड़ती है जहां की आबादी लाखों में है. दोनों ज़िलों का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा अभी पानी में डूबा हुआ है.
झील से पानी निकलने का रास्ता बनाने से जिन गांवों में पानी भरने की आशंका थी वहां पहले से ही चेतावनी जारी की गई और उन्हें गांव छोड़ने के लिए कहा गया. लेकिन स्थानीय सूत्रों का कहना है कि लोगों को वक्त रहते सुरक्षित जगहों पर नहीं ले जाया गया. कुछ लोगों का कहना है कि वो अपना घर और मवेशी छोड़ कर जाना नहीं चाहते थे, जो उनके लिए उनकी कमाई का ज़रिया हैं तो कुछ के अनुसार उनके पास जाने को कोई जगह नहीं है.
राहत कार्य में सेना की भी मदद ली जा रही है लेकिन अधिकांश जगहों पर स्थानीय लोग एकदूसरे की मदद कर रहे हैं.
झील का पानी गांव में भरने के बाद कुछ लोगों को पास ही बने एक सरकारी शिविर में ले जाया गया है. इस शिविर का इस्तेमाल विस्थापितों के लिए किया जा रहा है लेकिन यहां के हालात भी परेशान करने वाले हैं.
ज़रूरतें अधिक संसाधन कम
विस्थापित हुए कई लोग सड़कों के किनारे बिना छत के सोने को मजबूर हैं. उनके पास न तो खाना है और न ही स्वच्छ पीने का पानी.
एक महिला ने बीबीसी को बताया, "हमारे पास कुछ भी नहीं है. हम पूरा दिन अपने बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में लगे रहते हैं. कई बार रात को हम खाली पेट सो जाते हैं."
एक अन्य गांववाले ने कहा, "घर की छत को काफी नुक़सान हुआ है. हमें डर है कि छत कभी भी गिर सकती है. हमारे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और हमें ज़मीन पर सोना पड़ रहा है क्योंकि सभी के लिए बेड नहीं हैं."
अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों में से क़रीब ढाई लाख लोगों को सिर छिपाने के लिए छत की ज़रूरत है. बाढ़ प्रभावितों की ज़रूरतों के हिसाब से राहत कार्य कम पड़ रहा है. लोगों की ज़रूरतें अधिक हैं और संसाधन कम हैं.
बाढ़ के कारण कई जगहों पर ढांचागत सुविधाओं को नुक़सान हुआ पहुंचा है जिस कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ है. सिंध प्रांत में कई जगहों पर सड़कें या तो टूट गई हैं या तो कई दिनों से पानी में डूबी हुई हैं, जिससे वहां ट्रैफिक जमा हो गया है.
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पाकिस्तान बीते कई दिनों से हाल के सालों में अपनी सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है. रिकॉर्ड बारिश और उत्तर के पहाड़ों में ग्लेशियर के पिघलने से यहां बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. देश का लगभग एक तिहाई हिस्सा बाढ़ की चपेट में है.
इस बीच यूनिसेफ़ ने कहा है कि स्वच्छ पानी की भीषण कमी कारण बच्चों के लिए बीमारी का ख़तरा पैदा हो गया है.
इस आपदा ने एक बार फिर मुल्कों के बीच की असमानता को सामने ला दिया है कि कुछ मुल्क जलवायु परिवर्तन में सबसे अधिक योगदान करते हैं लेकिन आपदा की शक्ल में इसका असर कुछ दूसरे मुल्क झेलते हैं.
पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर केवल एक फीसदी ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन करता है, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति उसे जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील बनाती है.
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