यूक्रेन की तरह ताइवान में हथियार क्यों उठा रहे हैं लोग

- Author, रूपर्ट विंगफ़ील्ड-हेस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ताइवान
जो लोग जानते हैं कि मैं ताइवान में हूं उनके फिक्र करते संदेशों की संख्या आजकल बढ़ गई है जैसे "उम्मीद है तुम्हारे पास सुरक्षा जैकेट होगी. क्या तुम्हारे होटल में विस्फोट से बचाने वाला शेल्टर है?"
उन्होंने चीन के सरकारी मीडिया से आ रहे भड़कीले बयानों को सुना है, खासतौर पर ग्लोबल टाइम्स से और उन्हें ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी के दौरे का अंजाम बहुत बुरा होने वाला है.
इस बीच अमेरिका में रह रहे कुछ जानेमाने स्कॉलर्स ने भी यही बात कही है और चीन को किनारे करने को लेकर चेतावनी दी है.
लेकिन, ताइवान में लोगों का नज़रिया ऐसा नहीं है.
एक लोकप्रिय गायक रहे फ्रेडी लिम अब सत्ताधारी पार्टी से सांसद हैं. आजकल वो छोटे बाल रखते हैं और स्मार्ट शर्ट पहनते हैं. हालांकि, उनकी कमीज़ की बाजू से अब भी उनके टैटू झांकते नज़र आते हैं.
फ्रेडी लिम कहते हैं, "एक बुनयादी सिद्धांत है कि हम नैंसी पेलोसी जैसी शीर्ष नेताओं का ताइवान में स्वागत करते हैं. ये बहुत महत्वपूर्ण है. ये चीन के ख़िलाफ़ उकसावा नहीं है. ये सामान्य तरीक़े से एक दोस्त का स्वागत करना है."
ताइवान के सभी राजनीतिक दल इससे सहमति जताते हैं.

विपक्षी पार्टी ने क्या कहा
विपक्षी केएमटी पार्टी के सांसद चार्ल्स चेन ने कहा था, "अगर इस बार स्पीकर पेलोसी ताइवान आती हैं तो ये अमेरिका के लिए ताइवान और ताइवान के लोकतंत्र के प्रति समर्थन दिखाने का अहम समय होगा."
ताइवान का मानना है कि अमेरिका की तीसरी सबसे शक्तिशाली राजनेता का वहां आना प्रतिकात्मक तरीक़े से बहुत मायने रखता है.
ताइवान ऐसी और यात्राओं की उम्मीद करता है.
लेकिन, पेलोसी का दौरा मौजूदा स्थिति को नहीं बदल सकता कि ताइवान का आज़ाद और लोकतांत्रिक देश का दर्जा अब भी संशय की स्थिति में है.
लोग ये बात मान रहे हैं कि ताकत के बल पर ताइवान को चीन में मिलाने की धमकी हकीकत में बदल सकती है और सैन्य ताकत में ताइवान चीन से बहुत पीछे है.

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चीन के सामने कमज़ोर दिखता ताइवान
पिछले हफ़्ते ताइवान ने पांच दिनों के सैन्य अभ्यास में भव्य तरीक़े से लाइव फायर ड्रिल्स और हवा और पानी में मारक क्षमता के जरिए अपनी सैन्य शक्ति दिखाई थी.
अगर ऊपरी तौर पर देखें तो ये आधुनिक सेना का एक प्रभावी प्रदर्शन था लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये दिखाता है कि ताइवान चीन से कितना पीछे है.
ताइवान के टैंक, हथियार और फाइटर जेट पुराने हैं, उसके नौसेना के जहाजों में आधुनिक रडार और मिसाइल सिस्टम नहीं है और उसके पास आधुनिक पनडुब्बी भी नहीं है.
इस बात पर बहुत कम संदेह है कि आमने-सामने की लड़ाई में चीन ताइवान से जीत जाएगा.
लेकिन, चीन किन हालात में हमला करेगा? पांरपरिक तौर पर चीन के लिए वो अंतिम रेखा ताइवान का खुद को आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र घोषित करना रही है.

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राजनीतिक दलों में मतभेद
चार्ल्स चेन कहते हैं कि ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग वेन और उनकी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) ख़तरनाक तौर पर इसी के करीब दिख रहे हैं.
वह कहते हैं, "चीन ताइवान पर उस स्थिति में हमला कर सकता है जब उसे भरोसा हो जाएगा कि ताइवान आज़ाद हो रहा है और उसे वापस लाने का कोई दूसरा तरीक़ा नहीं बचा. इसलिए, अगर अगले राष्ट्रपति चुनाव में डीपीपी का उम्मीदवार जीतता है तो चीन ताइवान को आज़ाद होने से रोकने के लिए जल्दी हमला करने का फ़ैसला लेगा."
ये सत्ता में वापसी चाहने वाली एक पार्टी के नेता का बयान भर नहीं है बल्कि इससे ताइवान की राजनीति में गहरे विभाजन के संकेत भी मिलते हैं.
एक तरफ़ केएमटी है जो चीन को ये भरोसा दिलाना चाहती है कि ताइवान यथास्थिति में बदलाव नहीं करेगा.
दूसरी तरफ़ फ्रेडी लिम जैसे नेता हैं जो मानते हैं कि चीन को संतुष्ट करने का तरीक़ा असफल हो गया है और ताइवान के लिए मजबूत बचाव ही एकमात्र रास्ता है.
उन्होंने कहा, "हमने दशकों से चीन को खुश करने की कोशिश की है और ये साबित होता है कि हम उन्हें खुश नहीं कर सकते. यूक्रेन युद्ध के बाद हुए पोल दिखाते हैं कि ताइवान के लोग मजबूत बचाव का समर्थन करते हैं... खासतौर पर युवा पीढ़ी अपने देश को बचाने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाती है."
फ्रेडी लिम कुछ हद तक सही भी हैं क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध का ताइवान पर बड़ा प्रभाव पड़ा है.

हथियार उठाते युवा
पिछले सप्ताहांत में राजधानी ताइपेई के पास एक बंद पड़ी फैक्ट्री की इमारत में 30 युवा लड़के-लड़कियां बंदूक चलाना सीख रहे थे. उनके पास कंप्रेस्ड एयर हथियार थे और ये प्रशिक्षण मैक्स चियांग की कंपनी दे रही थी.
मैक्स चियांग ने मुझे बताया, "फरवरी से अब तक सीखने वालों की संख्या 50 प्रतिशत तक बड़ी है और इनमें महिलाओं की संख्या 40 से 50 प्रतिशत है."
"लोगों ने ये समझना शुरू कर दिया है कि एक मजबूत देश छोटे पड़ोसी देश पर हमला कर सकता है. यूक्रेन में क्या हुआ उन्होंने देखा है और ये दिखाता है कि यहां भी क्या हो सकता है."
इसी इमारत के बगल वाली इमारत में कुछ लोगों का समूह सड़क या गलियों में होने वाली लड़ाई के गुर सीख रहा है. इस समूह के पास बॉडी आर्मर, हेलमेट और रेडियो कम्यूनिकेशन के उपकरण हैं.
लिसा शूए टेबल पर अपनी बंदूक लोड कर रही है. वह कहती हैं, "अगर चीन के साथ हमारा तनाव युद्ध का रूप लेता है तो मैं अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा करूंगी. इसलिए मैं हथियार चलाना सीख रही हूं."
"मेरे जैसी महिलाएं फ्रंट लाइन में लड़ने नहीं जा सकतीं. अगर युद्ध छिड़ता है तो हम अपने घरों में खुद को सुरक्षित कर पाएंगे."
ताइवान के लिए लड़ने के लिए तैयार रहना क्यों ज़रूरी है. इस पर लिसा कहती हैं, "मैं हमारी आज़ादी की सुरक्षा करूंगी. हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं. इसलिए, ये हमारे बुनियादी अधिकार हैं. हमें इन मूल्यों को मानना चाहिए."
"चीन में लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हैं. इसलिए मैं ताइवान में पैदा होने को सौभाग्य मानती हूं."
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