श्रीलंका संकट: जब प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन की किचन में खाया खाना, बीबीसी संवाददाता का आंखों देखा हाल

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- Author, रंजन अरुण प्रसाद
- पदनाम, बीबीसी तमिल
श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुज़र रहा है लेकिन शनिवार को श्रीलंका में जो कुछ हुआ, उसे आने वाले कल में लंबे समय तक याद रखा जाएगा.
शनिवार को श्रीलंका में कुछ ऐसा हुआ जिसकी पृष्ठभूमि तो महीनों से तैयार हो रही थी लेकिन शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि नाराज़ लोग राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के निजी आवास में घुस जाएंगे.
राष्ट्रपति भवन के अंदर दाख़िल होकर तोड़फोड़ करेंगे और पीएम के निजी आवास को आग लगा देंगे.
लेकिन ये सब कुछ कल श्रीलंका में हुआ. शनिवार को आम लोगों ने संभवत: पहली बार यह भी अनुभव किया कि राष्ट्रपति कैसे रहते हैं. उनके 'महल' में किस-किस तरह की सुविधा होती है.
बीबीसी के संवाददाता रंजन अरुण प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन का दौरा किया. आप भी पढ़ें उन्होंने वहां क्या-क्या देखा.

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आंखों देखा हाल
श्रीलंका के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब सरकार और उसकी नीतियों से नाराज़ चल रहे लोग राष्ट्रपति भवन में दाखिल हो गए.
सिर्फ़ राष्ट्रपति भवन में नहीं, उन्होंने वहां के चप्पे-चप्पे को देखा. लगभग हर कमरे में दाख़िल हुए.
ये वो ही भवन था, जो कुछ घंटों पहले तक सुरक्षाकर्मियों और अंगरक्षकों की कड़ी निगरानी में था.
राष्ट्रपति भवन में दाख़िल हुए प्रदर्शनकारी आज भी यानी रविवार, 10 जून को भी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के सरकारी आवास के अंदर मौजूद हैं. लेकिन सबसे पहले इस राजभवन में किसने प्रवेश किया?
बताया जा रहा है कि भवन के विशाल मुख्यद्वार को पार करने का काम एक युवा ने किया था. एक तमिल युवक सबसे पहले ऊपर चढ़ा और मुख्य द्वार को कूदकर पार कर लिया. उसके बाद तो भवन में दाखिल होने वालों का सैलाब उमड़ पड़ा.
जब आम लोगों ने राष्ट्रपति भवन की विलासिता को ख़ुद अनुभव किया
जिस भवन की हर एक चीज़ पर पहरा रहता था वो शनिवार की दोपहर आम लोगों के हाथों में थी. लोगों ने भवन के अंदर की कई चीज़ों को छूआ-देखा.
शुरू में तो जब गुस्साई हुई भीड़ अंदर दाख़िल हुई तो उसने चीज़ों को तोड़ना शुरू कर दिया.
लेकिन भीड़ में हर तरह के लोग थे. कुछ प्रदर्शनकारी जहां बिना किसी नेतृत्व के रोष जताने आए थे, वहीं कुछ संगठित तौर पर, किसी नेतृत्व के तहत आए थे. लेकिन इसमें भी विविधता थी.
प्रदर्शनकारियों का एक समूह जहां बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में आया था, वहीं ईसाई मिशनरियां भी नेतृत्व कर रही थीं. कुछ इस्लामी बुज़ुर्ग नेता थे तो कुछ छात्र भी थे, जो अपने-अपने दल का नेतृत्व कर रहे थे.
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प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश
इनमें से कुछ लोगों ने तोड़फोड़ मचाने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश भी की और उनके इस कृत्य की निंदा भी की.
उन्हें 'हिंसक' हो गए प्रदर्शनकारियों को यह समझाते हुए देखा गया. वे उनसे अपील कर रहे थे कि राजभवन के अंदर मौजूद चीज़ें सार्वजनिक संपत्ति ही हैं, और उन्हें नुकसान ना पहुंचाएं.
धार्मिक बुज़ुर्गों और नेता प्रदर्शनकारियों को सलाह दे रहे थे कि वे राष्ट्रपति भवन की चीज़ों को देखें, उनका मज़ा लें.
इसके बाद वो राजभवन से बाहर चलें जाएं ताकि दूसरों को अंदर आने और राष्ट्रपति भवन को देखने और यहां की सुविधाओं का आनंद लेने का मौक़ा मिल सके.
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इसके बाद कई प्रदर्शनकारी एक कमरे से दूसरे कमरे में गए. प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन के किचन में भी पहुंचे और वहां जो कुछ भी खाने को था, वो खाया.
राष्ट्रपति भवन की सुविधाएं
संभव है कि ये वही खाना था जो एक दिन पहले राष्ट्रति भवन में बना होगा. किचन में जो कुछ खाने या पीने लायक था, लोगों ने उसे उठा लिया.
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उन रेस्टरूम का भी इस्तेमाल किया जो राष्ट्रपति और उनका परिवार इस्तेमाल करता था.
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वहां मौजूद कई लोगों को यह देखकर आश्चर्य भी हुआ कि टॉयलेट्स में भी एसी लगा हुआ है. वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के लिए वहां बाथरूम देखना किसी सपने जैसा था, जो किसी बड़े कमरे जितना बड़ा और सुविधाओं से भरपूर था.

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'भीड़ नरम गद्दे का अनुभव ले रही थी'
कुछ प्रदर्शनकारी उस कमरे में भी दाख़िल हुए जो संभवत: राष्ट्रपति का कक्ष रहा होगा. लोगों ने वहां मौजूद अलमारियां खोलीं, उनमें से राष्ट्रपति के कपड़े निकाले और पहनकर भी देखे.
वहां मौजूद लोगों के लिए यह बिल्कुल नए तरह का अनुभव था और वे वहां की हर चीज़ को आज़मा लेना चाहते थे. लोगों को बिस्तर के गद्दों पर कूदते हुए देखा गया.
जिस बिस्तर पर कुछ देर पहले राष्ट्रपति सोए होंगे, कुछ घंटों बाद वहां उस समय लोगों की भीड़ नरम गद्दे का अनुभव ले रही थी.
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सबसे ज़्यादा वायरल जो वीडियो हुआ, वो स्वीमिंग पूल का था.
राष्ट्रपति भवन के अंदर मौजूद स्वीमिंग पूल में लोगों को नहाते-कूदते देखा गया. जो तस्वीरें देखने को मिलीं, उन्हें देखकर लग रहा था कि वहां मौजूद प्रदर्शनकारी पूल का मज़ा ले रहे हैं.

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हटानी पड़ी सुरक्षा
प्रदर्शनकारियों को संगठित तौर पर काम करते देखा गया.
प्रदर्शनकारी छोटे छोटे समूहों में अंदर आ रहे थे और राष्ट्रपति भवन, वहां की आलीशान चीज़ें, और विलासितापूर्ण जीवन को देखकर बाहर निकल रहे थे. एक समूह के जाने के बाद, दूसरा समूह अंदर आ रहा था.
कुछ घंटों पहले तक जिस भवन के भीतर किसी आम नागरिक को जाने की इजाज़त नहीं होती थी, जिस इमारत के चारों ओर के कुछ किलोमीटर के दायरे में भी सुरक्षाकर्मी तैनात होते थे, वहां शनिवार को सड़क पर तिलभर की भी जगह नहीं थी.
भीड़ की सघनता इतनी अधिक थी कि पुलिस और सेना राष्ट्रपति भवन से हटा ली गई. उनके लिए भी ऐसा कुछ होगा, यह यक़ीन कर पाना मुश्किल हो रहा था.

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प्रधानमंत्री के निजी आवास को लगा दी गई आग
बीबीसी टीम ने श्रीलंका में प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के घर का भी दौरा किया.
उन्होंने बताया कि शनिवार देर रात प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के निजी आवास को प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी.
पीएम का यह निजी आवास कोलंबो 7 इलाक़े में है. यह शहर के सबसे हाई प्रोफ़ाइल रिहाइशी इलाक़ों में से एक है.

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बताया गया कि रनिल विक्रमसिंघे, उनकी पत्नी और बच्चे शुक्रवार शाम तक इसी घर में मौजूद थे.
लेकिन शाम के बाद उनके परिवार और स्टाफ़ के सदस्यों को एक सुरक्षित जगह ले जाया गया. घर के अंदर कोई भी नहीं था. कोई भी सुरक्षाकर्मी या अंगरक्षक भी वहाँ मौजूद नहीं मिला.
माना जा रहा है कि रनिल, उनके परिवार और स्टाफ़ को किसी गुप्त और सुरक्षित जगह ले जाया गया है.
क़रीब जाकर देखने पर घर के अंदर एक बीएमडब्ल्यू कार और कुछ अन्य वाहन दिखाई दे रहे थे. इन वाहनों को भी प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया. घर पूरी तरह से जलकर ख़ाक हो चुका है और अंदर का सामान भी राख हो गया है.

शनिवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने मनाया जश्न
लोगों में राष्ट्रपति भवन को देखने और उसकी विलासिता को अनुभव करने की खुशी दिख रही थी.
कई प्रदर्शनकारी जो अंदर नहीं जा पाए थे, वे अंदर से बाहर आए लोगों के अनुभव जानने के लिए उत्सुक थे.
शनिवार को कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पटाखे फोड़े और खुशियां मनाईं.
बीबीसी संवाददाता अनबरासन इथिराजन शनिवार को गाल शहर में थे. उन्होंने बताया कि देर रात वहां जश्न मनाया गया. लोगों ने पटाखे फोडे और उसके बाद बहुत से लोग अपने घरों को लौट गए.

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वक्त बदल गया
श्रीलंका में प्रदर्शन में शामिल बहुत से लोगों का कहना है कि जो शनिवार को हुआ, वो श्रीलंका में नए युग की शुरुआत है.
इस घटना से क़रीब एक सप्ताह पहले ही राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पीएम रनिल विक्रमसिंघे की एक तस्वीर वायरल हुई थी. इस तस्वीर में दोनों नेता संसद में मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे थे.
लोगों ने उस तस्वीर का ज़िक्र करते हुए बहुत से लोगों ने गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि वो दोनों कैसे मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे थे जबकि लाकों लोग एक-एक समय के खाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.
लेकिन राजनीति में एक सप्ताह बहुत कुछ बदल देने वाला होता है.
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शनिवार को जो हुआ वो भले ऐतिहासिक है लेकिन लोगों में नाराज़गी पिछले कई महीनों से है. इससे पहले अप्रैल में भी प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और फिर आपातकाल लगा दिया गया था.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग रही है कि राष्ट्रपति इस्तीफ़ा दें. हालांकि अप्रैल महीने में तब के पीएम ने महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफ़ा दे दिया था और उनके बाद रनिल विक्रमसिंघे पीएम पद पर आए थे.
लेकिन कल के घटनाक्रम के बाद देर शाम उन्होंने भी घोषणा कर दी कि वे इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने ट्वीट करके बताया कि सर्वदलीय पार्टी बन सके, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, इसके लिए यह फ़ैसला लिया गया है.
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