सऊदी अरब ने वादे के बावजूद पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर का निवेश क्यों नहीं किया

सऊदी अरब-पाकिस्तान

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इमरान ख़ान की कैबिनेट में मंत्री रहे और बोर्ड ऑफ़ इन्वेस्टमेंट (बीओआई) के एक पूर्व सदस्य हारून शरीफ़ ने कहा है सऊदी अरब ने वादा करने के बावजूद पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर का निवेश शर्तें पूरी नहीं होने के कारण नहीं किया.

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने निवेश के लिए एक शर्त रखी थी जो पूरी नहीं हो सकी.

हारून शरीफ़ ने इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर का निवेश करने के इच्छुक थे लेकिन इसके लिए उनकी शर्त थी कि इस निवेश को राजनेताओं और ब्यूरोक्रेसी से बचाना होगा.

हारून शरीफ़ ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए मंगलवार को एक निजी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा, ''सऊदी के क्राउन प्रिंस पाकिस्तान को अच्छी तरह से समझते हैं इसलिए उन्होंने कहा था कि इसको फास्ट ट्रैक करने के लिए ब्यूरोक्रेसी से निकालना होगा ताकि इसे ज़मीन पर उतारा जा सके. हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के निवेश के लिए मुल्क में व्यवस्था बनानी होगी. सऊदी अरब हमसे यही कह रहा था. हमने सऊदी के निवेश को पूरी तरह से मिस कर दिया है. अगर मिस ना किया होता तो ऐसी स्थिति नहीं होती.''

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हारून शरीफ़ ने कहा कि साल 2019 में एक बैठक के दौरान एमबीएस कहा था कि सऊदी सरकार पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा कर रही है लेकिन जब तक आप इसे राजनीति और ब्यूरोक्रेसी से बचाएंगे नहीं, ये निवेश नहीं हो पाएगा.

हारून शरीफ़ पीटीआई सरकार में बीओआई चेयरमैन थे.

सऊदी अरब की योजना क्या थी

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान फ़रवरी 2019 में पाकिस्तान के दौरे पर आए थे. इसी दौरे में उन्होंने पाकिस्तान में पेट्रोकेमिकल्स, ऊर्जा और खनन परियोजनाओं में 20 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी. इसके अलावा सलमान ने सऊदी की जेलों में बंद 2,000 पाकिस्तानी नागरिकों के तत्काल रिहाई की घोषणा की थी.

क्राउन प्रिंस की इस घोषणा पर इमरान ख़ान ने कहा था कि ऐसा उन्होंने पाकिस्तानियों का दिल जीत लिया. इमरान ख़ान भी प्रोटोकॉल तोड़ एमबीएस को ख़ुद ही गाड़ी चला अपने आवास तक लाए थे.

एमबीएस का पाकिस्तान दौरे में जैसा स्वागत हुआ वो किसी अंतरराष्ट्रीय स्टेट्समैन से भी आगे का था.

क्राउन प्रिंस के सम्मान में प्रधानमंत्री निवास में ख़ास डिनर का आयोजन भी किया गया था. इस दौरान इमरान ख़ान ने सऊदी अरब में काम करने वाले पाकिस्तानी मज़दूरों की परेशानियों के मुद्दे पर चर्चा भी की थी.

इमरान ख़ान ने कहा था कि 25 लाख पाकिस्तानी नागरिक सऊदी अरब में काम करते हैं. उन्होंने कहा था कि ये लोग अपने परिवार को छोड़कर मेहनत मज़दूरी करने के लिए सऊदी अरब जाते हैं और लंबे वक़्त तक अपने परिवारों से दूर रहते हैं.

इमरान ख़ान ने कहा था कि ये लोग उनके दिल के बहुत क़रीब हैं. उन्होंने कहा था कि इन मेहनतकश लोगों के सामने कई तरह की दिक्क़तें हैं और क्राउन प्रिंस अपने स्तर पर उनकी परेशानियों को देखें.

पाकिस्तान के बाद सलमान भारत पहुंचे थे और यहाँ भी प्रधानमंत्री मोदी स्वागत में एयरपोर्ट पर खड़े थे. विमान से उतरते ही पीएम मोदी ने गले लगा लिया था.

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हारून शरीफ़ ने इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट कार्यक्रम के दौरान कहा कि कोई भी अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है, जब जीडीपी के अनुपात में निवेश भी बढ़ता है, लेकिन पाकिस्तान के मामले में ऐसा नहीं है.

हारून शरीफ़ के बयान को ट्वीट करते हुए पाकिस्तान के पत्रकार अहमद क़ुरैशी ने लिखा है, ''सऊदी अरब 2019 में पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर के निवेश के लिए तैयार था. सऊदी ने निवेश के लिए अच्छे माहौल की गुज़ारिश की थी लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने लोकप्रिय प्राथमिकताओं को चुना. वह इस्लामोफ़ोबिया टीवी लाने की बात करने लगे. सऊदी अरब के दबदबे वाले इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी को चुनौती देने लगे, फ़्रांस और ईयू से टकराने लगे और अमेरिका, इसराइल, यूएई के गठजोड़ से मुक़ाबले की बात करने लगे थे. इसका नतीजा यह हुआ कि निवेश आख़िरकार नहीं आया.''

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हारून शरीफ़ ने कहा कि भविष्य में एशिया वैश्विक निवेश का केंद्र होगा. कतर, यूएई, कज़ाख्स्तान और चीन से अरबों डॉलर के निवेश को हाथ से फिसलने से रोकने की ज़रूरत है.

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ा कारण है, जिससे निवेशकों का मोह भंग हो रहा है.

इमरान ख़ान और मोहम्मद बिन सलमान

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इस कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के मौजूद योजना और विकास मंत्री एहसान इक़बाल भी मौजूद थे. उन्होंने भी ये माना की राजनीतिक अस्थिरता और अपर्याप्त क़ानूनों की वजह से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है.

डॉन न्यूज़ के अनुसार एहसान इक़बाल ने 2022-23 के लिए आए बजट को किसी बुरे सपने जैसा बताया, जिसमें कारोबार या विकास कार्यों के लिए बमुश्किल ही कोई राशि आवंटित की गई. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी रोज़ के खर्च पूरे करने के लिए भी दूसरे देशों से कर्ज़ लेना पड़ रहा है.

उन्होंने ये भी बताया कि पाकिस्तान में फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफ़डीआई) भी महज़ 1.5 अरब डॉलर का है. उन्होंने कहा कि बीते 25 सालों में पाकिस्तान विकास की रेस में पिछड़ गया.

चीन के बाद सऊदी अरब ही वो देश है जो पाकिस्तान की माली हालत सुधारने के लिए क़र्ज़ दे रहा है.

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