पाकिस्तानी करेंसी का बुरा हाल, डॉलर के मुक़ाबले 200 के करीब पहुंचा रुपया

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डॉलर के मुक़ाबले में भारत का रुपये बुधवार को ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर रहा. सुबह जब बाज़ार खुला तो रुपया 6 पैसे गिरकर 77.57 रुपये पर खुला.
भारतीय रुपया लगातार डॉलर के मुक़ाबले गिर रहा है लेकिन ऐसा नहीं है सिर्फ़ भारत की मुद्रा कमज़ोर हो रही है.
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की मुद्रा रुपये का भी हाल डॉलर के आगे बुरा है. डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया 200 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है.
पाकिस्तान के पत्रकार सिरिल अलमीडा ने ट्वीट करके कहा है कि 'रुपया आज या कल 200...?'
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मंगलवार को पाकिस्तानी रुपये की क़ीमत डॉलर के मुक़ाबले ऐतिहासिक रूप से 195.74 रुपये तक चली गई.
बीते वित्त वर्ष की तुलना में इस वित्त वर्ष में डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तान रुपये में 24.24 फ़ीसदी की गिरावट हुई है और बीते 13 महीनों से रुपया लगातार नीचे ही जा रहा है.
10 अप्रैल को जब अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए इमरान ख़ान सरकार को हटाया गया उस समय पाकिस्तानी रुपये की क़ीमत डॉलर के मुक़ाबले 182.93 रुपये थी. तब से अब तक पाकिस्तानी रुपये अपनी 7 फ़ीसदी वैल्यू को खो चुका है.

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लगातार गिरते रुपये की क्या है वजह
पाकिस्तान में तेल और बिजली पर सब्सिडी दी जा रही है और विश्लेषकों का मानना है कि सरकार जब तक सब्सिडी नहीं हटाती है तब तक पाकिस्तानी रुपये गिरता रहेगा.
दूसरी ओर ऐसा कहा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जब तक 1 अरब डॉलर की अगली सहायता राशि जारी नहीं करेगा तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने साल 2019 में IMF के एक बैलआउट पैकेज पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत पाकिस्तान को छह अरब डॉलर की आर्थिक सहायता दी जानी थी.
हालांकि IMF ने इसमें कई कड़ी शर्तें लागू कर दी थीं. इसके तहत सब्सिडी को समाप्त करना था और राजस्व और टैक्स कलेक्शन को बेहतर बनाना था.
इस ज़रूरी फ़ंड को जारी करने के लिए पाकिस्तन के अधिकारी बुधवार को IMF के साथ बातचीत शुरू करने जा रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, पाकिस्तान अपने बढ़ते राष्ट्रीय क़र्ज़, बढ़ती महंगाई और गिरते रुपये के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांगता रहा है और बैलआउट पैकेज जारी करने के लिए यह बैठक होने जा रही है.
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने बताया है कि यह बातचीत क़तर की राजधानी दोहा में शुरू होने जा रही है और इसके अगले सप्ताह भी जारी रहने की उम्मीद है.

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IMF क्या कर सकता है?
IMF सब्सिडी पर ठोस जवाब पाकिस्तान से चाहता है. वहीं पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल का कहना है कि वो चाहते हैं कि दोनों पक्ष 'बीच का रास्ता खोजें.'
अर्थशास्त्री शाहरुख़ वानी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "सरकार IMF को राज़ी करने की कोशिश करेगी क्योंकि राजनीतिक स्थिरता के लिए कुछ सब्सिडी बरक़ार रखना महत्वपूर्ण है."
उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से IMF कह सकता है कि ये टिकाऊ नहीं है और व्यापार करने के लिए और बजट घाटे के प्रबंधन के लिए इन्हें वापस लिया जाना चाहिए."
इमरान ख़ान के जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने जब सत्ता संभाली तो उन्हें एक बेहद ख़राब अर्थव्यवस्था विरासत में मिली. विश्लेषकों का मानना है कि ख़राब अर्थव्यवस्था के बावजूद उनकी सरकार कड़े फ़ैसले लेने में नाकाम रही.
वॉशिंगटन में विल्सन सेंटर के दक्षिण एशिया के उप-निदेशक माइकल कूगलमन कहते हैं, "यह एक ऐसा प्रशासन है जिसने अंततः आर्थिक राहत लाने के लिए कठोर राजनीतिक कदम उठाने से इनकार कर दिया है, लेकिन आईएमएफ़ में जाकर यह बलिदान वास्तव में करना चाहिए."

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और क्या हैं वजहें
पाकिस्तानी रुपये की गिरती क़ीमत के बीच सोमवार को देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक ख़ास बैठक की.
शरीफ़ ने एक्स्चेंज़ कंपनीज़ एसोसिएशन ऑफ़ पाकिस्तान के चेयरमैन मलिक बोस्टन के साथ ऑनलाइन बैठक की जिसमें उन्हें बताया गया कि IMF के क़र्ज़ में देरी, राजनीतिक अस्थिरता और अत्यधिक क़र्ज़ लेने के कारण रुपये की यह हालत हुई है.
ऑनलाइन बैठक के दौरान बोस्टन ने कहा, "आयात करने वाले अधिक क़र्ज़ ले रहे हैं जबकि निर्यात करने वालों में कमी आई है. इसके कारण इंटरबैंक मार्केट में मांग बढ़ी है और सप्लाई कम हुई है."
उन्होंने बताया कि एक्सचेंज कंपनिया डॉलर के दाम में बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं और मुक्त बाज़ार में डॉलर की दर को तब तक कम नहीं किया जा सकता है तब तक इंटरबैंक मार्केट में दर कम नहीं हो जाती है.
कॉपी - मोहम्मद शाहिद
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