शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान: अबू धाबी के कद्दावर नेता जो अब यूएई के राष्ट्रपति हैं

शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई ) के नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं.

उन्हें राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायेद नाहयान के निधन के बाद नया राष्ट्रपति चुना गया है.

शेख खलीफा की बीमारी के बाद से यूएई की नीतियों को दिशा देने में उनकी अहम भूमिका है.

शेख मोहम्मद कद्दावर नेता हैं. एक प्रशिक्षित सैनिक और फुटबॉल फैन मोहम्मद पिछले कई साल से पृष्ठभूमि से सत्ता चलाते रहे हैं.

लेकिन शुक्रवार को अपने सौतेले भाई शेख खलीफा बिन जायेद अल नाहयान के निधन के बाद सत्ता की कमान अब उनके हाथ में हैं.

शेख खलीफा 2004 से यूएई की सरकार चला रहे थे.

लेकिन 2014 में स्ट्रोक का शिकार होने के बाद उन्होंने प्रत्यक्ष तौर पर सरकार के कामकाज में हिस्सा लेना बंद कर दिया था.

नए शासक के तौर पर शेख मोहम्मद का चुनाव यूएई के सात अमीरातों की फेडरल सुप्रीम कमेटी ने किया है.

उन्हें अबू धाबी के शासक के तौर पर नामित किया गया है, जिसके पास देश के तेल संसाधन का सबसे बड़ा हिस्सा है.

महत्वाकांक्षी नेता

शेख मोहम्मद भले ही अभी राष्ट्रपति बनाए गए हैं लेकिन वे लंबे समय से यूएई की सरकार चला रहे हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2009 में विकीलिक्स की ओर से लीक के एक नोट के मुताबिक पूर्व अमेरिकी राजदूत रिचर्ड ऑल्सन ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को कहा था कि शेख मोहम्मद ही वो शख्स हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात को चला रहे हैं.

शेख मोहम्मद लो-प्रोफाइल रहते हैं और अक्सर सार्वजनिक तौर पर बोलने से परहेज करते हैं. लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं जाहिर हैं.

वो संयुक्त अरब अमीरात को पश्चिम एशिया का सबसे अहम ताकतवर देश बनाना चाहते हैं.

वह खाड़ी देशों के पहले नेता हैं, जिन्होंने इसराइल से रिश्ते सामान्य करने की शुरुआत की.

उनका रुख अरब लीग के दशकों पुरानी उस नीति से हट कर है, जिसमें फलस्तीनी सत्ता को मान्यता दिए जाने तक इसराइल से रिश्ते कायम करने की मनाही थी.

यूएई को समृद्ध बनाने में निभाई बड़ी भूमिका

यूएई में काफी समृद्धि है. आसमान छूती इमारतें. पाम के पेड़ से सजे द्वीप, बडे़ मॉल और ट्रेड सेंटर इसकी खासियतें हैं.

इस देश ने कम समय में ही अपना एक परमाणु कार्यक्रम बना लिया है और अपने एक नागरिक को अंतरिक्ष में भी भेज दिया है.

जुलाई में मंगल ग्रह पर मिशन भेजने वाले देशों के क्लब में यूएई में भी शामिल हो गया था. यूएई ने ये उपलब्धि अपने एकीकरण के 50वें साल पूरा होने पर हासिल की.

2004 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस बने शेख मोहम्मद शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के तीसरे बेटे हैं. उनके पिता संयुक्त अरब अमीरात के संस्थापक रहे थे.

शेख मोहम्मद संयुक्त राज्य अमीरात के डिप्टी कमांडर के तौर पर काम करते रहे हैं. वह अबू धाबी नेशनल काउंसिल के चेयरमैन भी रहे हैं, जो अमीरात के वित्तीय ताकत को नियंत्रित करती है. यूएई को समृद्ध बनाने में शेख मोहम्मद का बड़ा हाथ रहा है.

सैन्य पृष्ठभूमि

साल 1961 में अबू धाबी में पैदा हुए शेख मोहम्मद को ब्रिटेन के मिलिट्री स्कूल में भेजा गया था और 1979 में उन्होंने रॉयल मिलिट्री एकेडमी सेंडहर्स्ट से ग्रेजुएशन की डिग्री ली.

इसके बाद वह यूएई की सेना में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़े और 1993 डिप्टी स्टाफ चीफ और फिर जनरल के पद पर प्रमोट हुए.

राजनयिक उन्हें अबू धाबी का कद्दावर नेता मानते हैं. शेख मोहम्मद ने पश्चिमी देशों से संबंध बढ़ाने में काफी दिलचस्पी ली है.

माना जाता है कि 2015 हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी के सैन्य अभियान के तहत यमन में सेना भेजने का फैसला उन्हीं का था.

ये यूएई के लिए विदेशी धरती पर सबसे लंबा सैन्य अभियान था. पहली बार यूएई के सैनिक इस अभियान में हताहत हुए .

सोची-समझी विदेश नीति

हालांकि शेख मोहम्मद सार्वजनिक तौर पर ज्यादा नहीं बोलते लेकिन यूएई की सत्ता पर उनका प्रभाव बहुत ज्यादा है.

उनके नेतृत्व में यूएई ने पश्चिमी देशों के अलावा दूसरे देशों से भी संबंध बढ़ाने में काफी पहल की. हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर यूएई अमेरिका के पक्ष में दिखा. सुन्नी अरब की दुनिया में इसने सऊदी अरब का साथ दिया.

घरेलू सुरक्षा नीति के मामले में शेख मोहम्मद ने काफी कड़ा रुख अपनाया. पर्यवेक्षकों का मानना है कि यूएई में इस्लामवादियों को कुचलने के लिए जबरदस्त अभियान चलाया.

इस्लामवादियों के संबंध रखने के आरोप में दर्जनों लोगों को जेल में डाल दिया गया. इसके साथ ही यूएई ने अपने रुढ़िवादी पड़ोसी देशों से भी संबंध सामान्य बनाए रखा.

मोहम्मद ने संयुक्त अरब अमीरात के शासक रहते अमेरिका से नजदीकी रिश्ते बनाए रखा. हालांकि बाद के दिनों में उन्होंने अपनी रणनीति बदली.

साल 2011 में जब अरब स्प्रिंग के दौरान अमेरिका ने मिस्र के शासक होस्नी मुबारक का साथ छोड़ दिया तो यूएई ने ये तय किया कि वह अब बड़े समर्थक अमेरिका पर और भरोसा नहीं कर सकता. अमेरिका से इतर दूसरे देशों से संबंध बढ़ाने की यह नीति शेख मोहम्मद की ही थी.

विश्लेषकों और राजनयिकों का कहना है कि सऊदी अरब और अमेरिका से संबंध यूएई की विदेश नीति का प्रमुख स्तंभ भी रहा है लेकिन शेख मोहम्मद ने अपने देश के आर्थिक हितों के लिए इन दोनों ध्रुवों से अलग स्वतंत्र विदेशी नीति अपनाने से भी परहेज नहीं किया.

उन्होंने अबू धाबी से बात करते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को चेतावनी दी थी कि अमेरिका अरब स्प्रिंग का समर्थन न करें. यह अरब देशों के साम्राज्यों को खत्म कर सकता है. ओबामा ने अपने संस्मरण में उन्हें खाड़ी के सबसे समझदार नेताओं में से एक माना है.

रूस और यूक्रेन की जंग के दौरान भी संयुक्त अरब अमीरात ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया.

संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ वोटिंग में यूएई ने हिस्सा नहीं लिया था.

ईरान और तुर्की से भी रिश्ते बनाने की पहल

ईरान और तुर्की से वर्षों दुश्मनी के बावजूद शेख मोहम्मद ने इन देशों से संबंध बढ़ाने से गुरेज नहीं किया.

कोविड-19 की वजह से यूएई की अर्थव्यवस्था को लगे झटके और सऊदी अरब से प्रतिस्पर्धा की वजह से शेख मोहम्मद ने आर्थिक उदारीकरण का दायरा और बढ़ा दिया है.

हालांकि उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बना कर उन्हें रोक रखा है.

शेख मोहम्मद करिश्माई और आधुनिक नेता माने जाते हैं और कई राजनयिकों का मानना है कि उन्होंने लो प्रोफाइल अबू धाबी को दुनिया का ट्रेड सेंटर बना दिया है.

अबू धाबी में सबसे ज्यादा तेल संसाधन है. एनर्जी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश की वजह से अबू धाबी दुनिया के सबसे बड़े निवेश और ट्रेड सेंटर में शुमार हो गया है.

प्रगतिशील नेता की सोच

साल 2017 में शेख ज़ायेद मस्जिद के नाम से मशहूर अबू धाबी की भव्य मस्जिद में शेख मोहम्मद ने एलान किया कि इसका नाम जीसस की मां मरियम के के नाम पर रखा जाएगा.

उनका मानना है कि मस्जिद अलग-अलग धर्मों की मानवता को एक साथ बांधे रखने का माध्यम है.

शेख मोहम्मद फुटबॉल के जबरदस्त फैन हैं. वह देश के अल-अईन क्लब के प्रेसिडेंट भी हैं. हाफ पैंट और हेलमेट पहने वह साइकिलिंग भी करते दिख जाते हैं.

वह शिकार के भी शौकीन हैं और शायरी के भी. उनके चार बेटे और पांच बेटियां हैं.

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