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यूएई की रूस से बढ़ती नज़दीकी, अमेरिका से दूरी और पर्दे के पीछे से शेख मंसूर बिन ज़ायेद का रोल
संयुक्त अरब अमीरात के बाहर शेख मंसूर बिन ज़ायेद अल नाहयान को इंग्लिश फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर सिटी के मालिक के रूप में जाना जाता है.
अपने देश में वे डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और शासक परिवार के एक प्रमुख सदस्य हैं.
हालांकि रूसियों के साथ अबू धाबी की नजदीकी से वाकिफ़ कुछ स्रोतों ने नाम न छापने की शर्त पर ब्लूमबर्ग न्यूज़ को बताया कि शेख मंसूर की पर्दे की पीछे बड़ी भूमिका है जो हाल के महीनों में काफी बढ़ी है.
उनकी जिम्मेदारियों में संयुक्त अरब अमीरात में अपना पैसा ट्रांसफर करने के लिए इंतज़ार कर रहे दौलतमंद रूसियों के साथ संबंध स्थापित करना भी शामिल है.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शेख मंसूर लंबे समय से रूस और यूएई के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयासों में शामिल रहे हैं, लेकिन यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से उनके रोल की अहमियत बढ़ गई है.
यूक्रेन पर आक्रमण से पहले शेख मंसूर बिन जायद की रूसी कंपनियों के साथ कई बैठकें हुई थीं. इन मीटिंग्स में यूएई के 'असली' शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद भी शामिल थे.
और साल 2019 में जब मोहम्मद बिन जायद अबू धाबी में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले थे तो शेख मंसूर भी वहां मौजूद थे.
यूक्रेन पर आक्रमण से पहले संयुक्त अरब अमीरात आने वाले पर्यटकों का चौथा सबसे बड़ा समूह रूसी लोगों का था.
रूस पर प्रतिबंध
साल 2022 के पहले दो महीनों में दुबई जाने वाले रूसी पर्यटकों की संख्या लगभग 137,000 थी, जो पिछले साल के दोगुने से अधिक थी.
यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिससे ये दुनिया के सबसे अधिक प्रतिबंधों से ग्रस्त देशों में से एक बन गया, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात ने अब तक रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.
यूएई के अधिकारियों का कहना है कि अबू धाबी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है, लेकिन कुछ देशों द्वारा लगाई गई पाबंदियों का पालन नहीं करता है.
इसराइल और भारत सहित अमेरिका के अन्य सहयोगी देशों ने भी इसी तरह का रुख अपनाया है.
लेकिन इस रवैये ने पश्चिमी देशों के कुछ अधिकारियों को चिंतित कर दिया है. ये अफ़सर रूस के ख़िलाफ़ लगाए जा रहे प्रतिबंधों की खामियों को लेकर चिंतित हैं.
पिछले महीने की शुरुआत में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के उप सचिव एडिमो ने संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों से फोन पर बात की थी, जिसमें अमीर रूसी व्यापारियों की संपत्ति को यूएई में स्थानांतरित करने के बारे में अमेरिका की चिंताओं के बारे में बताया गया था. इस बातचीत के बारे में जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से ब्लूमबर्ग ने ये रिपोर्ट दी थी.
संयुक्त अरब अमीरात में निवेश
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, धनी रूसी व्यवसायी और वित्त अधिकारी यूएई में सरकार चलाने में मदद करने के लिए शेख मंसूर और उनके ऑफ़िस के संपर्क में थे. यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस की दिलचस्पी संयुक्त अरब अमीरात में निवेश को लेकर बढ़ गई है.
कुछ रूसी दुबई में अपार्टमेंट खरीदना चाहते हैं, जबकि कुछ लग्ज़री कार खरीदना चाहते हैं या बैंक खाते और वित्त कंपनियों को खोलने में मदद करना चाहते हैं.
अमीराती अधिकारी शेख मंसूर के प्रयासों को यूएई में वैश्विक व्यापार को आकर्षित करने और पूर्व और पश्चिम के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने की सरकार की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखते हैं.
रूस और यूएई के रिश्ते ख़ास तौर पर तेल की बिक्री से जुड़े हुए हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के राष्ट्रपति मामलों के मंत्रालय और विदेश मंत्रालय दोनों विभागों ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया. मैनचेस्टर सिटी फुटबॉल क्लब और उसके कार्यालयों के माध्यम से शेख मंसूर तक पहुँचने की कोशिश भी नाकाम रही. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इस साल की शुरुआत में यूएई सरकार के एक प्रवक्ता ने ब्लूमबर्ग को बताया था कि यूएई मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथ के वित्तपोषण से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह की निगरानी के लिए विदेशी भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है और इस दिशा में अपनी कोशिश करना जारी रखेगा.
कौन हैं शेख मंसूर बिन ज़ैद?
शेख मंसूर बिन ज़ायेद अल नाहयान का जन्म 20 नवंबर, 1970 को अबू धाबी में हुआ था. वे संयुक्त अरब अमीरात में शासक परिवार के प्रमुख सदस्यों में से एक हैं. उनकी गिनती देश के प्रमुख व्यापारियों में भी होती है.
उन्होंने 1997 और 2004 के बीच संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख और 2004 में राष्ट्रपति मामलों के मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेशेवर फुटबॉल में निवेश के लिए जाना जाता है. वे ब्रिटेन में मैनचेस्टर सिटी फुटबॉल क्लब के मालिक हैं.
मंसूर बिन ज़ायेद शेख ज़ायेद बिन सुल्तान अल नाहयान के बेटे हैं, जिन्होंने 1966 से 2004 तक अबू धाबी के शासक और 1971 से 2004 तक संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया.
उनके भाई खलीफा 2004 में अबू धाबी के शासक और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति बने.
उनके एक अन्य भाई मुहम्मद 2004 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और 2014 में संयुक्त अरब अमीरात के 'डीफैक्टो' शासक बने.
मंसूर अपनी वित्तीय गतिविधियों के लिए जाने जाते थे क्योंकि उन्होंने अबू धाबी में कई वित्तीय संस्थानों का नेतृत्व किया, जिनमें विशेष रूप से अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट, फर्स्ट गल्फ बैंक और इंटरनेशनल पेट्रोलियम इन्वेस्टमेंट कंपनी का नाम लिया जाता है.
इसके अलावा, उन्होंने वित्तीय और आर्थिक मामलों के सर्वोच्च परिषद सहित कई अन्य निकायों के निदेशक मंडल में कार्य किया है.
पर्दे के पीछे शेख़ मंसूर की भागीदारी
यूएई के बाहर उनके कई निवेश हैं. मंसूर की इन्वेस्टमेंट कंपनी 'अबू धाबी यूनाइटेड ग्रुप फॉर डेवलपमेंट एंड इनवेस्टमेंट' ने साल 2008 में मैनचेस्टर सिटी फुटबॉल क्लब को खरीद लिया था. अब ये क्लब इंग्लिश प्रीमियर लीग के सबसे सफल क्लबों में से एक है.
शेख़ मंसूर ने साल 2013 में न्यूयॉर्क सिटी फुटबॉल क्लब में एक प्रमुख निवेशक बन गए और बाद में दुनिया भर के कई अन्य क्लबों में शेयर खरीदे, जिसमें 2014 में मेलबर्न सिटी में बहुमत हिस्सेदारी और 2019 में मुंबई सिटी में बहुमत हिस्सेदारी शामिल थी.
मंसूर बिन ज़ायेद की यूएई की पब्लिक पॉलिसी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका है. राष्ट्रपति मामलों के मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी के अलावा वे अबू धाबी के न्यायिक विभाग के प्रमुख के ओहदे पर रह चुके हैं.
इसके अलावा, दुबई के शासक और संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के दामाद के रूप में, मंसूर देश के दूसरे सबसे शक्तिशाली शख़्स की हैसियत रखते हैं.
साल 2009 में उन्हें शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम का उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था.
हालांकि अधिकारियों और विदेशी मेहमानों के साथ कभी कभार होने वाली सार्वजनिक बैठकों के अलावा, देश के राजनीतिक मामलों में मंसूर की भागीदारी पर्दे के पीछे ही रहती है.
अमेरिका के साथ तनाव
हालांकि यूएई ने रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन कुछ अमीराती नेताओं, जिनमें इंडिपेंडेंट वेल्थ फंड एक्सचेंज इन्वेस्टमेंट कंपनी के चीफ़ एग़्जिक्यूटिव खलदुन अल-मुबारक और वाशिंगटन में यूएई के राजदूत यूसुफ अल-अतीबा शामिल हैं, ने अमेरिका, ब्रिटिश और यूरोपीय अधिकारियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है.
पिछले महीने दुबई में एक वित्तीय सम्मेलन में खलदुन अल-मुबारक ने कहा था कि उनकी कंपनी इस समय रूस में निवेश करने से परहेज करेगी. पश्चिमी अधिकारियों ने इस बयान का स्वागत किया था.
वास्तव में यूएई और अमेरिका के बीच संबंधों में हाल ही में खटास आई है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब दोनों ही ये चाहते हैं कि अमेरिका यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों का मुकाबला करने के लिए और कदम उठाए.
इस बीच, दोनों खाड़ी देशों ने कीमतों को कम करने के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने के वाशिंगटन के अनुरोधों को अब तक खारिज कर दिया है.
जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जूडी विटोरी अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी मामलों के जानकार हैं. वे कहते हैं कि प्रतिबंधों पर मतभेद एक विवादित मुद्दा है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही देश यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद किसी का पक्ष लेने से बचते रहे हैं.
ओपेक में तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक
मध्य पूर्व में अमेरिका के ज़्यादातर सहयोगी देश ऐसी स्थिति टालने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, और इस क्षेत्र के देशों के चीन और रूस के साथ रणनीतिक संबंध भी हैं.
यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत के बाद से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए अमेरिका का दबाव रहा है.
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात विश्व बाजार में अधिक तेल निर्यात करने की अमेरिकी ख्वाहिश पूरी नहीं करेंगे.
यूएई, सऊदी अरब और इराक़ के बाद ओपेक में तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक, संगठन के भीतर और ओपेक प्लस एलायंस में सऊदी तेल नीतियों के लिए प्रतिबद्ध है.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि यूएई और सऊदी अरब के बीच सहमति है और दोनों देश ओपेक प्लस गठबंधन के भीतर निर्णय लेने से इनकार करते हैं जो उनके सहयोगी रूस को नुकसान पहुंचा सकता है.
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने फरवरी के अंत में मॉस्को में अपने अमीराती समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाकात की थी.
18 मार्च को, रूस के सहयोगी सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया, जहां उन्होंने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की, जिन्होंने सीरिया-अरब सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया. इस बैठक में शेख मंसूर भी शामिल थे जिसकी ब्रिटेन में आलोचना हुई.
विश्लेषकों का कहना है कि ये दौरा ऐसे समय में हुआ जब मध्य पूर्व के देशों के बीच संबंध बदल रहे हैं और कई अरब देश बशर अल-असद के साथ संबंध बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
अमेरिका ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की 19 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर निराशा व्यक्त की थी.
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