इस शहर की सड़कों पर क्यों दिखाई देने लगे हैं मगरमच्छ

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- Author, रिकार्डो सेनरा
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
अगर आप घर से कहीं जाने के लिए निकलें हों और रास्ते में आपको मगरमच्छ दिख जाए तो... ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में तब लोगों के होश उड़ गए जब उन्हें बस टर्मिनल पर घूमता हुआ एक मगरमच्छ दिखा.
29 मार्च को सुबह के 5:40 हो रहे थे, जब शहर के भीड़-भाड़ वाले बस टर्मिनल पर पैदल यात्रियों के लिए बने पुल के किनारे लोग भीड़ लगाकर खड़े थे. वो अपने फोन से किसी चीज़ की फोटो या वीडियो ले रहे थे.
तभी एक शख़्स ने चिल्लाया, ''देखो ये जानवर खतरनाक है.'' ये सुनते ही लोग पीछे हटने लगे.
ये जानवर था 2.5 मीटर लंबा घड़ियाल जिसका वज़न करीब 40 किलो होगा. वो यहां से बाहर निकलने के लिए इस पतले से पुल पर ऊपर-नीचे जा रहा था. लोग उसे देखकर चिल्लाए और भागने लगे.
लेकिन, लोगों से ज़्यादा वो खुद डरा हुआ था. बस टर्मिनल पर मगरमच्छ का वीडियो तुरंत वायरल हो गए. हाउस कीपिंग असिस्टेंट 24 साल के फर्नांडो किरॉस ने सबसे पहले इसके बारे में ट्वीट किया था, ''मैं बस टर्मिनल के पुल पर पहुंचकर वापस लौट आया, क्योंकि वहां पर मुझसे भी बड़ा एक मगरमच्छ था.''
फर्नांडो ने बीबीसी से कहा, ''वो बहुत बड़ा था. मैं सुबह पांच बजे पहुंचा था और उस वक़्त अंधेरा हो रहा था. दो लोग पुल की एंट्री पर थे और हमें वापस जाने के लिए कह रहे थे. वो नहीं चाहते थे कि कोई उस जानवर को देखे और हंगामा हो जाए.''
रियो डी जेनेरो के सिविल डिफेंस विभाग के मुताबिक बहुत संभावना है कि ये जानवर एक किलोमीटर की दूरी बनी झील से आया होगा. एक घंटे के बचाव अभियान के बाद मगरमच्छ को पिंजरे में डालकर पास की झील में छोड़ दिया गया. लोगों और मगरमच्छ को कोई नुक़सान नहीं हुआ.
वहां काम करने वाले एक शख़्स ने बताया, ''बारिश के दिनों में यहां अंधेरी जगहों पर जाने में डर लगता है कि कहीं मगरमच्छ से सामना ना हो जाए.''
उनका डरना स्वाभाविक है क्योंकि यहां इस तरह के मामले होते रहते हैं.

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जंगली जानवर मिलने के बढ़ते मामले
पिछले कुछ महीनों में रियो डी जेनेरो के शहरी इलाक़ों में कई बार जंगली जानवर देखे गए हैं जो सुर्खियां भी बने हैं.
बस टर्मिनल वाली घटना के चार दिन पहले दो अप्रैल को ही भारी बारिश के बाद तीन मगरमच्छ गलियों में तैरते हुए मिले थे.
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इस इलाक़े में रहने वाले एक शख़्स ने बताया, ''अब तक तो हम इलाक़े में सिर्फ़ चूहों को देखते थे.''
इसी हफ़्ते में वायरल हुए एक और वीडियो में एक बड़ा भूरा सांप 19वीं मंज़िल के फ्लैट की छत पर छुपा हुआ था. बचाव दल ने जब प्लास्टर तोड़ा तो सांप कमरे के फर्श पर गिर गया.
तीन महीने पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाला एक शख़्स सुबह जॉगिंग के लिए निकला तो उसे अपने घर के बाहर आराम से बैठा हुआ मगरमच्छ दिखा.
इस तरह के और भी वीडियो और फोटो वायरल होते रहते हैं.
रियो में इस तरह की घटनाओं के सिविल डिफेंस विभाग के आधिकारिक आँकड़े चिंता पैदा करते हैं. शहरी इलाक़ों में जंगली जानवर मिलने के मामले बढ़ते जा रहे हैं. साल 2020 में ये मामले 2419 थे जो 2021 में बढ़कर 3534 हो गए.
इस साल एक जनवरी से 28 मार्च तक रियो में 1203 मामले सामने आए जिनमें कैपिबारा, सांप, मगरमच्छ, छिपकलियां, चमगादड़ और जंगली चूहे शहर में पाए गए. अगर यही रफ़्तार रही तो 2022 तक 4000 ऐसे मामले आ सकते हैं जिनकी एक दिन में 11 मामले मिलने की औसत बनती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक रियल स्टेट के बढ़ने, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की वजह से बार-बार ऐसा हो रहा है.

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शहरी 'दबाव'
रियो डी जेनेरो में 60 लाख 70 हज़ार की आबादी है और ये एक पर्यटन स्थल है. इसलिए यहां पर रियल एस्टेट कारोबार बढ़ता जा रहा है. यहां ज़मीन कम होती जा रही है और घरों की संख्या बढ़ रही है.
जीवविज्ञानी रिकॉर्डो फ्रेतस कहते हैं कि इसके चलते यहां शहर के वन्यजीवों पर दबाव पड़ रहा है. रिकॉर्डो फ्रेतस पिछले दो दशकों से शहरो में मगरमच्छों के व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं.
वह कहते हैं, ''मगरमच्छ का बस टर्मिनल पर आना इस बात का संकेत है कि शहरीकरण ने कैसी अव्यवस्था पैदा कर दी है.''
''मान लीजिए कि दो फुटबॉल टीम मैरेकाना स्टेडियम में खेल रही हैं और आप उन्हें स्टेडियम में कुछ समस्या के कारण एक छोटे से ग्राउंड पर ले आएं. तो ये टीम कैसे खेलेंगी? तो वहां जगह के लिए झगड़ा होगा. ''
रिकॉर्डो फ्रेतस कहते हैं, ''रियो में मगरमच्छों और अन्य प्रजातियों की बिल्कुल यही हकीकत है. शहरीकरण के कारण इन जानवरों के लिए जगह कम हो गई है. इतने ही मगरमच्छ पहले ज़्यादा बड़ी जगह पर रहते थे. विकास का सीधा असर इन जानवरों पर पड़ा है.''
रिकॉर्डो कहते हैं कि इसी के चलते जानवरों को मजबूर होकर शहरों में आना पड़ रहा है ताकि उन्हें खाना और आराम करने के लिए जगह मिले. लेकिन, ऐसा करने के भी उनके लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

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घड़ियालों का खामोश क्रबिस्तान
शहर के दूसरे इकोलॉजिस्ट और जानकारों की तरह रिकॉर्डो बताते हैं, ''कई ठेकेदारों और रियल स्टेट कारोबारियों को वन्यजीवों की कोई चिंता नहीं. पर्यावरण संबंधी कार्य मानकों से नीचे होने पर काम सस्ता हो जाता है. इसी साल मुझे रियो के नमी वाले इलाक़ों में ऐसी कोई घटना ना होने की कई रिपोर्ट्स मिलीं. लेकिन, सच्चाई इससे अलग थी.''
फ्रेतस के मुताबिक रियर स्टेट कारोबारी जानवरों को डराकर वहां से भगाते हैं. ''कई लोगों को लगता है कि जानवर कंस्ट्रक्शन की मशीनों के शोर से वहां से भाग जाएंगे. लेकिन, मगरमच्छ ये शोर सुनकर पानी के अंदर चले जाते हैं और छुप जाते हैं.''
रियो डी जेनेरो में लगभग पांच हज़ार मगरमच्छ हैं. एक शिकारी जानवर के तौर पर ये जानवर वन्यजीवन का अहम हिस्सा है जो संतुलन बनाए रखता है. लेकिन, इसकी संख्या कम होती जा रही है.
रिकॉर्डो फ्रेतस बताते हैं, ''मगरमच्छ पानी के अंदर 30 मिनट से एक घंटे तक बिना सांस लिए रह सकते हैं. लेकिन, जब वो पानी के अंदर छुपे होते हैं तो बल्डिंग की मशीनें उनके ऊपर से गुजरती हैं और वो वहीं दफ़न हो जाते हैं.''
''इस तरह कई जानवरों की जान चली गई है. आज अनगिनत मगरमच्छ मारे गए हैं और इन कंस्ट्रक्शन की जगहों पर दफ़न हो चुके हैं. ''
रियो के पर्यावरण विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि शहर के वन्यजीवन की रक्षा के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''स्थानीय सरकार के विशेषज्ञों और शैक्षणिकों का एक आयोग आगे के कदमों के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करेगा.'' हालांकि, इस आयोग के काम की कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है.
बचाव कार्य बढ़ाने के अलावा स्थानीय सरकार अवैध इमारतों पर भी ध्यान दे रही है.

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प्रदूषण का ख़तरा
प्रदूषण एक दूसरा कारण है जिसके चलते जानवर अपने प्राकृतिक घरों से निकलकर बाहर आ रहे हैं.
फ्रेतस कहते हैं, ''रियो का पूरा पश्चिमी क्षेत्र प्रदूषण से भरा हुआ है. मगरमच्छ के अधिकतर घोंसले कचरे, कार्बनिक पदार्थों और सीवेज के आसपास बने होते हैं. कूड़े-कचरे के कारण जानवर मर जाते हैं. उनके लिए खाना भी कम हो जाता है.''
जंगली जानवरों को इंसानी ख़ाना खिलाने से उनके व्यवहार में भी बदलाव आता है और वो उस खाने के लिए बार-बार शहरी इलाक़ों में आते हैं.
रियो सिटी हॉल के प्रवक्ता का कहना है कि स्थानीय सरकार झीलों और नदियों को साफ़ करवा रही है जहां ये विशाल जीव रहता है.

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जलवायु परिवर्तन
पिछले हफ़्ते भारी तूफ़ान और बाढ़ के कारण रियो में अलर्ट घोषित किया गया था.
शहर में पानी भरने से मगरमच्छ और सांप उस पानी में नज़र आने लगे. जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर दिखने लगे.
हालांकि, भारी बारिश और जलवायु परिवर्तन के बीच सीधा संबंध निकालना तो संभव नहीं है, लेकिन ब्राज़ील में प्राकृतिक आपदाओं के मामले ज़्यादा आ रहे हैं.
जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाली एक पत्रिका कार्बन ब्रीफ़ का एक हालिया अध्ययन दिखाता है कि ब्राज़ील दुनिया में कार्बन डाइऑक्साइड का चौथा सबसे बड़ा उत्सर्जक है. उससे पहले सिर्फ़ अमेरिका, चीन और रूस का नंबर है.
ब्राज़ील में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 2019 में आई तेज़ी आई और 13 सालों में सबसे ज़्यादा उत्सर्जन दर्ज किया गया था.
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