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रूस का यूक्रेन पर हमला: क्या पुतिन पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में मुकदमा चल सकता है?
- Author, डॉमिनिक कैसियानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अस्पतालों पर हमले को लेकर रूस पर ''युद्ध अपराध'' का आरोप लगाया है.
ज़ेलेंस्की पहले भी रूस पर युद्ध अपराध का आरोप लगा चुके हैं. पर युद्ध अपराध क्या होता है और क्या रूस पर इसके लिए कोई कार्रवाई हो सकती है.
इंटरनेशनल कमिटी ऑफ़ द रेड क्रॉस ने परिभाषित किया है, ''युद्ध अपराध के भी अपने नियम होते हैं.''
युद्ध अपराध को परिभाषित करने वाले इन नियमों को जेनेवा कन्वेंशन कहते हैं. इन अपराधों में भी मुकदमा चलता है और कार्रवाई होती है.
क्या होता है युद्ध अपराध
इसके तहत आम नागरिकों और उनके लिए ज़रूरी बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया जा सकता. तबाही के बड़े स्तर को देखते हुए कई हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है. जैसे एंटी-पर्सनल लैंडमाइन्स और केमिकल या जैविक हथियार.
बीमार और चोटिल लोगों का इलाज किया जाना चाहिए. इसमें घायल सैनिक भी शामिल हैं जिनके युद्ध बंदी के तौर पर अधिकार होते हैं. दूसरे क़ानून युद्ध में प्रताड़ना और नरसंहार से रोकते हैं. युद्ध के दौरान हत्या, रेप या नरसंहार को 'मानवता के विरुद्ध' अपराध कहा जाता है.
लेकिन, यूक्रेन में रूस पर किस तरह के युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए हैं? यूक्रेन के मुताबिक रूस का मारियुपोल में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अस्पताल पर किया गया हमला युद्ध अपराध है. यहां एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई है और 17 स्टाफ़ और मरीज़ घायल हो गए हैं.
ऐसी भी आरोप हैं कि रूस की सेना ने यूक्रेन से जा रहे आम नागरिकों पर हमला किया है.
ऐसे भी प्रमाण हैं कि रूस ने खारकीएव के आवासीय इलाक़ों में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है जो बड़े स्तर पर क्षति पहुंचाते हैं.
हालांकि, रूस और यूक्रेन दोनों ने ही इनके इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन ऐसे हमलों को युद्ध अपराध माना जा सकता है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि रूस ने थर्मोबेरिक बम का इस्तेमाल किया है जो वातावरण से ऑक्सीजन सोखकर भयंकर तबाही ला सकता है. ऐसे हथियार पर प्रतिबंध नहीं लगा है लेकिन आम नागरिकों के नज़दीक इनका इस्तेमाल युद्ध के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.
हालांकि, कई विशेषज्ञ किसी देश पर हमले को ही आक्रामक युद्ध की श्रेणी में मानते हैं.
युद्ध अपराधियों पर मुकदमा कैसे चलता है?
संदिग्ध युद्ध अपराधियों की जांच करना हर देश का कर्तव्य माना जाता है. कुछ देश इसे लेकर ज़्यादा गंभीर नज़र आते हैं.
ब्रिटेन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने यूक्रेन में युद्ध अपराध के सबूत ढूंढने में मदद करने की पेशकश की है.
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में इन अपराधों की सुनवाई हो सकती है. रवांडा नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुकदमे के लिए ट्रिब्यूनल बनाई गई थी. इस मामले में 1994 में हुतु चरमपंथियों ने 100 दिनों में आठ लाख लोगों कों हत्या कर दी थी.
आईसीजे दो देशों के बीच विवाद पर सुनवाई कर सकता है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सजा नहीं दे सकता. यूक्रेन ने आईसीजे में रूस के हमले के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया था.
आईसीजे ने रूस के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है लेकिन इसे लागू करने का काम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का है. रूस के पास सुरक्षा परिषद में वीटो पावर है, वो किसी भी प्रस्ताव या प्रतिबंध को रोक सकता है.
वहीं, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में व्यक्तिगत युद्ध अपराधों की जांच और सुनवाई हो सकती है. रोम अधिनियम 1998 के तहत इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की स्थापना 1998 में नीदरलैंड्स के हेग में हुई थी. यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नुकसान पहुंचाने के सबसे गंभीर अपराधों के अभियुक्तों पर मुक़दमा चलाने वाली और सुनवाई करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है.
यह युद्ध अपराधों, नरसंहार, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और आक्रामकता के अपराध की जांच करती है.
कोई भी देश अपनी अदालतों में संदिग्ध अभियुक्तों पर मुक़दमा चला सकती है. आईसीसी केवल उस क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है जहां कोई देश ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है या नहीं कर सकते हैं. यह 'न्याय के लिए अंतिम उपाय की व्यवस्था' है.
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के 123 सदस्य देश हैं, रूस और यूक्रेन इसके सदस्य नहीं हैं. लेकिन यूक्रेन ने अदालत के न्याय क्षेत्र को स्वीकार किया है, यानी अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यूक्रेन में कुछ निश्चित कथित अपराधों की जांच कर सकती है.
क्या आईसीसी में यूक्रेन में अपराधों का मुकदमा चल सकता है?
आईसीसी के मुख्य अभियोजक ब्रितानी वक़ील करीम ख़ान कहते हैं कि इस बात के उचित आधार हैं कि यूक्रेन में युद्ध अपराध हुआ है और उनके पास इसकी जांच करने के लिए 39 देशों की अनुमति है.
जांचकर्ता पहले और वर्तमान में लगाए आरोपों को देखेंगे. इसमें रूस के क्राइमिया पर कब्ज़े से पहले 2013 तक के आरोप देखे जाएंगे.
अगर व्यक्तियों के ख़िलाफ़ सबूत मिलते हैं तो अभियोजक आईसीसी से उनके लिए गिरफ़्तारी का वॉरेंट जारी करने की मांग करेगा.
लेकिन, इस अदालत की भी सीमाएं हैं. इस अदालत के पास अपना पुलिस बल नहीं है और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए वह संबंधित देश के सहयोग पर निर्भर है.
रूस आईसीसी का सदस्य नहीं है. यह 2016 में इससे बाहर आ गया था. राष्ट्रपति पुतिन किसी भी संदिग्ध का प्रत्यर्पण नहीं करेंगे.
अगर संदिग्ध किसी और देश में जाता है तो उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है.
क्या राष्ट्रपति पुतिन पर मुकदमा चल सकता है?
किसी सैनिक को युद्ध अपराध के लिए ज़िम्मेदार ठहराना आसान है बजाए कि सैनिक को हथियार चलाने की इजाजत देने वाले नेता पर.
लेकिन, आईसीसी आक्रामक युद्ध की शुरुआत के लिए मुकदमा चला सकती है.
इसे आत्मरक्षा के लिए की गई न्यायोचित सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक अनुचित हमला या टकराव माना जाता है.
लेकिन, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर फ़िलिप सैंड्स कहते हैं कि आईसीसी रूस के नेताओं पर मुकदमा नहीं चला सकता क्योंकि रूस आईसीसी का सदस्य नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आईसीसी से अपराध की जांच करने के लिए कह सकती है. लेकिन, रूस इस पर वीटो कर सकता है.
क्या कोई और तरीक़ा है?
आईसीसी कितना प्रभावी है और अंतरराष्ट्रीय क़ानून किस तरह से काम करते हैं ये सिर्फ़ संधियों पर निर्भर नहीं करता बल्कि राजनीति और कूटनीति पर भी निर्भर करता है.
प्रोफ़ेसर फ़िलिप सैंड्स और अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका समाधान कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों में छुपा है.
वो दुनिया के नेताओं से यूक्रेन में आक्रामकता के अपराध के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाने की अपील करते हैं.
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