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यूक्रेन युद्ध: Z क्यों बना रूस में युद्ध की हिमायत करने का सिंबल
- Author, पॉल किर्ले और रॉबर्ट ग्रीनॉल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
रूसी जिमनास्ट इवान कुलियाक ने पिछले दिनों पैरेलल बार प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता.
पदक लेने जब वो पोडियम पर खड़े हुए तो उनके कपड़ों पर 'Z' लिखा हुआ था. इवान, यूक्रेनी खिलाड़ी इलिया कोवतुन के बगल में खड़े थे, जिन्होंने इसी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया था.
रूसी खिलाड़ी इवान को अपने कपड़ों पर 'Z' लिखने की वजह से अंतरराष्ट्रीय जिमनास्टिक्स फेडरेशन द्वारा कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.
'Z' अक्षर का मतलब क्या है
रूस में 'ज़ेड' अक्षर युद्ध-समर्थक प्रतीक के रूप में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है. इसे रूसी राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण के कट्टर समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है.
न केवल राजनेता इसका समर्थन कर रहे हैं बल्कि कारों, वैन और विज्ञापन होर्डिंग्स तक पर इसे लिखा हुआ देखा गया.
इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही हैं. रूसी राजनेता मारिया बुटीना ने भी एक वीडियो शेयर किया था जिसमें जैकेट पर 'Z' लिखा था.
स्कूल ऑफ स्लावोनिक एंड ईस्टर्न यूरोपियन स्टडीज़ में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की लेक्चरर एग्लाया स्नेत्कोव का कहना है कि ऐसा इसलिए है ताकि आप अपने काम भी कर सकें और बिना शोर किए अपनी मंशा भी ज़ाहिर कर सकें.
वह कहती हैं कि रूस में 'ज़ेड' का प्रसार न केवल सोशल मीडिया की वजह से हुआ है बल्कि इसके पीछे शासन का हाथ भी है.
हालाँकि एग्लाया मानती हैं कि इसे फासीवाद के प्रतीक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
उनका मानना है कि भले ही 'ज़ेड' को स्वास्तिक के तौर पर दिखाने वाले बहुत सारे मीम्स हों लेकिन यह उन लोगों द्वारा किया जाता है जो शासन पर दबाव डालना चाहते हैं.
रूस की सिरिलिक वर्णमाला
अगर रूस की सिरिलिक वर्णमाला देखें तो उसमें ज़ेड अलग तरह से लिखा जाता है. यह दिखने में 3 जैसा लगता है. अधिकांश रूसी लैटिन अक्षरों को पहचानते हैं.
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टिट्यूट में रिसर्च फ़ेलो ऐमिली फ़ेरिस का कहना है कि 'Z' बेहद प्रभावशाली और आसानी से पहचाने जाने वाला प्रतीक है.
वह कहती हैं कि आमतौर पर प्रॉपेगैंडा के साथ सबसे सरल चीजें सबसे तेज़ी से मशहूर होती हैं.
राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण का समर्थन करने वालों के बीच 'Z' शब्द को लोकप्रिय होने में दो हफ़्ते से भी कम समय लगा.
रूस के कज़ान शहर में एक बिल्डिंग के सामने लगभग 60 बच्चों और कर्मचारियों ने 'Z' आकृति बनाते हुए फोटो खिंचवाया था.
लेकिन पहली बार सोशल मीडिया पर इस आकृति ने सबका ध्यान तब खींचा जब 'Z' लिखे रूसी टैंक यूक्रेन के रास्ते में देखे गए.
शुरुआत में सोचा गया कि 'Z' अंग्रेज़ी का अक्षर न होकर गणित की संख्या '2' है, जो 22.02.2022 को दर्शाती है जब रूस ने पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्सक और लुहान्स्क क्षेत्रों को स्वतंत्र राज्यों के तौर पर मान्यता दी थी. लेकिन अब ज़्यादातर लोगों का मानना है कि ये प्रतीक रूस की सेना ने अपने सैन्य बलों की पहचान के लिए बनाया होगा.
पिछले हफ़्ते, रूस के सरकार नियंत्रित चैनल ने दर्शकों को बताया कि रूसी सैन्य उपकरणों पर 'ज़ेड' एक सामान्य चिह्न था. पुतिन के समर्थन वाली वेबसाइट ज़ारग्रेड ने लिखा कि एक सामान्य चिह्न आपको किसी अनहोनी से बचा सकता है और ऐसा करने से आपकी पहचान बाकियों से अलग हो जाती है.
रूसी विशेष बलों में अपनी सेवाएँ दे चुके सर्गेई कुविकिन ने रूस की मैगज़िन वेबसाइट 'लाइफ' को बताया कि अलग-अलग प्रतीक भिन्न सैन्य इकाइयों को दर्शाते हैं. जैसे चौरस खाने में ज़ेड, एक सर्कल में 'ज़ेड', एक स्टार के साथ 'ज़ेड' या केवल 'ज़ेड'.
केवल Z नहीं, अक्षर V के भी हैं कुछ मायने
'Z' की ही तरह 'V' अक्षर भी सिरिलिक वर्णमाला में नहीं है लेकिन रूसी रक्षा विभाग के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की पोस्ट में 'Z' के साथ 'V' भी दिखाई देता है.
एक मान्यता ये है कि ये दोनों लैटिन अक्षर 'वोस्तोक' और 'ज़ापद' के लिए हो सकते हैं. जैसे V से वोस्तोक जिसका अर्थ है पूर्व और Z से ज़ापद जिसका अर्थ है पश्चिम.
हालाँकि सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार यूक्रेनी सेना का मानना है कि 'ज़ेड' रूस के 'पूर्वी बलों' को दर्शाता है और 'वी', 'नौसेना इन्फ़ैन्ट्री' को.
इवान कुलियाक की वजह से इन प्रतीक चिह्नों पर ख़ूब चर्चा हो रही है लेकिन तमाम विचारों में एक बात जो आम है, वह यह कि वर्तमान स्थिति में ये अक्षर सकारात्मक नहीं है.
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