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चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत के साथ रिश्ते सुधारने पर क्या बोले?
"आपसी विरोध और एक दूसरे को कमज़ोर करने की जगह आपसी सफलता में एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए."
बीजिंग में सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए, न कि "एक दूसरे की ऊर्जाओं को बर्बाद करने में".
बीते महीने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को लेकर एक तल्ख बयान दिया था जिसके बाद अब वांग यी का ये बयान आया है जिसमें दोनों देशों के बीच संबंधों पर उन्होंने कहा कि "हमें सही रास्ते पर आगे बढ़ना है."
उन्होंने कहा कि, "जब दोनों देश स्थिरता और समृद्धि हासिल करेंगे और यहां शांति और सद्भाव बनी रहेगी तब ही वैश्विक शांति को एक मजबूत नींव मिलेगी. जैसा कि एक भारतीय कहावत है कि अपने भाई की नाव को पार करने में मदद करें तो आपकी नाव पार पहुंच जाएगी."
"मैं उम्मीद करता हूं कि भारत और चीन एक दूसरे के साथ एक रणनीतिक सहमति बनाएंगे कि दोनों देश एक दूसरे के लिए ख़तरा नहीं बनेंगे और एक दूसरे के विकास का मौका देंगे, दोनों आपसी विश्वास बनाना जारी रखेंगे और ग़लतफ़हमी और ग़लत अनुमानों से बचेंगे और एक दूसरे की सफलता के भागीदार बनेंगे."
भारत और चीन के बीच रिश्ते जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प में भारतीय जवानों की मौत के बाद रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं.
वांग ने माना है कि हालिया सालों में भारत के साथ रिश्तों में 'कई झटके लगे हैं.' उन्होंने कहा कि 'कुछ ताक़तों' ने चीन और भारत के बीच संघर्ष और विभाजन पैदा किया है.
चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि 'कुछ ताक़तें हमेशा से चीन और भारत के बीच में तनाव को भड़काती आई हैं और क्षेत्र में विभाजन पैदा कर रही हैं. उनकी कोशिशों को लोगों ने देखा है और लोग सचेत हुए हैं.'
सीमा विवाद पर चीनी विदेश मंत्री की राय
"एक अरब से अधिक आबादी वाले इन देशों के अधिकतर लोगों को पता चला है कि स्वतंत्र रूप से ही हम अपनी मंज़िल को पा सकते हैं और विकास के हमारे लक्ष्यों को साकार कर सकते हैं."
सीमा से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा, "सीमा का सवाल बरसों से अनसुलझा रहा है. चीन लंबे समय से एक-दूसरे के मतभेदों को साझा परामर्श, सक्रिय रूप से निष्पक्ष होकर न्यायसंगत समझौता चाहता है ताकि द्विपक्षीय संबंधों से छेड़छाड़ किए बिना इसे सुलझाया जा सके. मैं सीमा और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर यहा बात कर रहा हूं. मुझे लगता है कि लोगों को इसे समझना चाहिए."
वांग ने यह स्वीकार किया कि 'हाल के सालों में दोनों देशों के संबंधों को झटका लगा है जो कि भारत और चीन के लोगों के मूलभूत सिद्धांतों के तहत नहीं है.'
उन्होंने मांग की कि 'हमारे लोगों को अधिक लाभ देने के लिए दोनों देशों के रिश्ते को सही रास्ते पर ले जाने की ज़रूरत है ताकि क्षेत्र और दुनिया में बड़ी भागीदारी की जा सके.'
इस दौरान वांग ने 'फ़ाइव आइज़ से लेकर क्वाड और आकुस' पर कहा कि "भारत-प्रशांत क्षेत्र पर रणनीति का वास्तविक लक्ष्य नेटो का इंडो-पैसेफिक रूप बनाना है. अमेरिका के पास "54321" रणनीति है जो कि फ़ाइव आइज़, क्वाड, आकुस और इस क्षेत्र में रिश्ते की ओर इशारा करता है." उन्होंने इसे हानिकारक बताया.
चीन में भारत के पूर्व राजदूत और भारत के पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने चीनी विदेश मंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, "चीन के विदेश मंत्री के बयान की अहम बात ये है कि अमेरिका भारत-प्रशांत क्षेत्र में जो '54321' स्ट्रैटेजी बना रहा है वो किसी भी तरह से लाभकारी नहीं बल्कि एक भयानक क़दम है. वो संबंध जोड़ रहे हैं और लाइनें खींच रहे हैं."
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का तल्ख़ बयान
बीते महीने ही भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के रिश्तों पर कहा था कि चीन के सीमा समझौतों के उल्लंघन के बाद फिलहाल भारत और चीन के संबंध सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (एमएससी) 2022 में परिचर्चा के दौरान ये बयान दिया था.
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि, "भारत को चीन के साथ एक समस्या है. वो ये कि 1975 से 45 साल तक सीमा पर शांति रही, सीमा प्रबंधन स्थिर रहा, कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ"
उन्होंने कहा, "लेकिन अब ये बदल गया है क्योंकि हमने चीन के साथ सीमा - जो असल में वास्तविक नियंत्रण रेखा है - उस पर सैन्यबलों की तैनाती नहीं करने के लिए समझौते किए... लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया है."
विदेश मंत्री ने कहा, "स्वाभाविक तौर पर सीमा की स्थिति दोनों देशों के बीच के संबंधों की स्थिति को भी तय करेगी."
उन्होंने कहा, "ज़ाहिर तौर पर मौजूदा समय में चीन के साथ भारत के संबंध बहुत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं." उन्होंने ये भी कहा कि पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्ते जून 2020 से पहले भी बेहद अच्छे थे.
इससे पहले भी जयशंकर ने कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि चीन ने दोनों देशों के बीच हुए लिखित समझौतों की अवहेलना की.
उस समय विदेश मंत्री ने कहा था, "जब एक बड़ा देश लिखित समझौतों की अवहेलना करता है, तो यह पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का कारण बनता है."
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच गतिरोध पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया में कहा था, "वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति चीन की ओर से 2020 में भारत के साथ लिखित समझौतों की अवहेलना के कारण उत्पन्न हुई है, न कि सीमा पर बड़े पैमाने पर सैन्यबलों की तैनाती के कारण."
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