यूक्रेन में रूसी सेना के घुसने पर क्या कह रहे हैं रूसी नागरिक?

सदमा, ख़ौफ़ और हैरानी- ये तीन शब्द गुरुवार को राजधानी मॉस्को और दक्षिणी शहर रोस्तोफ़ में लोगों का मूड बताने के लिए काफ़ी हैं.

यूक्रेन पर आक्रमण के राष्ट्रपति पुतिन के फ़ैसले का समर्थन किया जाए या विरोध, इसे लेकर भी लोग बंटे हुए हैं.

जब अच्छे से तैयार युवा बीबीसी से बात करने के लिए रुके तो उनमें से एक यूक्रेन पर आक्रामण को लेकर बिलकुल निश्चिंत नज़र आया.

वो कहता हैं, "हां हमने सुना है कि कुछ हो रहा है लेकिन क्या हो रहा है ये अभी हम समझ नहीं पाए हैं."

वो अपनी बात पूरी करता इससे पहले ही उसे रोकते हुए उसके दोस्त ने कहा, "हम हैरान हैं. हमने अपनी ज़िंदगी में कोई युद्ध नहीं देखा है जो अब देखने जा रहे हैं."

नीले रंग का चमकीला जैकेट पहने एक व्यक्ति बहुत परेशान दिख रहा था.

"हम नहीं जानते कि क्या करना है और ये सब बहुत डराने वाला है. लेकिन डर से इतर, हमारी सरकार जो कर रही है उसे लेकर शर्म और भय का माहौल भी है. मेरे दोस्तों के बीच यही सामान्य भावना है."

"मैंने कभी भी सत्ताधारी पक्ष को वोट नहीं दिया है, और जो मैं कर सकता था मैंने किया भी. रूस में राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश में लोग प्रदर्शन में जाते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि अब प्रदर्शन होंगे क्योंकि लोग बहुत डरे हुए हैं."

युद्ध से नाराज़गी

एक महिला ये नहीं जानती हैं कि जो ख़बरें उन्हें मिल रही हैं उनका क्या मतलब निकाला जाए. वो युद्ध के ख़िलाफ़ हैं.

अपनी राय ज़ाहिर करते हुए वो कहती हैं, "ये राजनेता हैं जो अपने बीच चीज़ें ठीक करना चाहते हैं लेकिन इससे आम लोगों के जीवन पर कोई असर नहीं होगा. इससे मेरे परिवार का कोई फ़ायदा नहीं है."

युद्ध का विरोध करने वाले कुछ लोग सेंट्रल मॉस्को के पुश्किन चौक पर प्रदर्शन के लिए जुटे हैं.

बीबीसी रूसी सेवा की अनास्तासिया गुलुबेवा के अनुमान के मुताबिक क़रीब 200 लोग एकजुट हुए थे जिन्हें बाद में पुलिस ने हटा दिया.

जो भी युद्ध के विरोध में नारा लगा रहा था उसे हिरासत में लिया जा रहा था.

एक युवा ने बीबीसी से कहा, "मैं पूरे दिन से रो रहा हूं. यूक्रेन में लोग मारे जा रहे हैं. बच्चे मारे जा रहे हैं. जो लोग लड़ रहे हैं वो मारे जा रहे हैं और फिर क्या होगा? मेरे जैसे 19-20 साल के रूसी युवाओं को जबरदस्ती युद्ध लड़ने के लिए भेज दिया जाएगा."

जब उससे पूछा गया कि क्या उसके दोस्त रैली में आने से डर रहे थे तो उसने कहा, "नहीं, ये डरावना नहीं है. यूक्रेन और उसकी सीमाओं के आसपास जो हो रहा है वो डरावना है. हम जो यहां कर रहे हैं या हमारे सामने जो है वो कुछ भी नहीं है."

नीले रंग का नेवी कोट पहने हुए एक व्यक्ति ने कहा कि वो यूक्रेन और रूस दोनों का समर्थन करता है लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन का विरोधी है. रूस में खुले तौर पर ऐसा बयान आजकल कम ही सुनाई देता है.

वो कहते हैं, "ये हमारे नेता की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए किया जा रहा है."

लेकिन तीन बुजुर्ग जिनमें दो पुरुष और एक महिला थीं, आक्रामण का समर्थन करते नज़र आए.

यूक्रेन का भी विरोध

बेसबॉल कैप लगाए एक पुरुष कहते हैं कि यूक्रेन में रूस मूल के लोगों की सुरक्षा होनी चाहिए. वो मौजूदा हालात के लिए यूक्रेन को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं कि अपनी करनी की वजह से ही वो इस स्थिति में हैं.

वो कहते हैं, "इतिहास गवाह है, यूक्रेन के लोग हमेशा परेशान करते रहे हैं."

पिंक कोट और हैट पहने एक महिला भी यूक्रेन में रह रहे रूस के लोगों का हवाला देते हुए कहती है, "वहां रूस मूल के लोग रह रहे हैं."

जब हम उनसे पूछते हैं कि वहां रह रहे यूक्रेन के लोगों का क्या?

वो कहती हैं, "यूक्रेन के अधिकतर लोग आतंकवादी हैं." वो बताती हैं कि उन्हें ये जानकारी यूट्यूब और सरकारी टीवी से मिलती है.

एक बुजुर्ग कहते हैं, "ये सब शांति के लिए हैं, बाद में सब कुछ ठीक हो जाएगा."

दक्षिण रूस के रोस्तोफ़ में जहां यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों से भागकर लोग आ रहे हैं, माहौल मॉस्को से थोड़ा अलग है.

परेशान और उलझन में लोग

चटक लाल कोट और टोपी पहने एक महिला नहीं जानतीं कि वो घटनाओं को किस तरह देखें.

वे कहती हैं, "जो हो रहा है हम उससे बहुत चिंतित हैं क्योंकि ये सब बहुत नज़दीक है. लेकिन जो हो रहा है उसे हम पूरी तरह नहीं जानते हैं क्योंकि हम टीवी पर चल रहे समाचारों पर बहुत भरोसा नहीं करते हैं."

एक अन्य महिला कहती हैं, "ये सब बहुत डराने वाला है, हम अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं."

भूरे बालों वाला एक व्यक्ति अपने दुख को छुपा नहीं पा रहा था.

वो कहता है, "एक दौर था जब हमने एक बड़ा युद्ध जीता था और आज हम आपस में ही लड़ रहे हैं."

वहीं, एक युवती जो हो रहा है उसे सही ठहराते हुए कहती हैं, "ये बिल्कुल सही है. जो अब हो रहा है. हमसे जो ले लिया गया था उसे वापस हासिल किया जा रहा है."

एक अन्य महिला को भी लगता है कि ये युद्ध एक सही फ़ैसला है. गुलाबी कोट पहने ये महिला कहती हैं, "हम सब ठीक रहेंगे, हमारे पास एक बड़ा देश है जिसके पास संसाधन हैं. कोई भी प्रतिबंध लगाकर हमें झुका नहीं सकेगा."

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