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यूक्रेन संकट पर रूस का दावा- हमले की तैयारी हम नहीं, वो कर रहे हैं
- Author, विटाली शेवचेंको
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
पश्चिम की तरह, रूस की मीडिया भी यूक्रेन में संघर्ष की आशंकाओं पर बारीक़ी से नज़र रखे हुए है. हालांकि, क्रेमलिन-नियंत्रित मीडिया के पास इस संघर्ष को शुरू करने वाले देश को लेकर अपनी अलग कहानी है.
रूस की मीडिया यूक्रेन की छवि ऐसे आक्रामक देश के तौर पर पेश कर रही है, जो मॉस्को समर्थित अलगाववादियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर बिना उकसावे के ही हमला करने की तैयारी कर रहा है.
क्रेमलिन समर्थक मीडिया का कहना है कि कीव सरकार को रूस से बेइंतहा नफ़रत करने वाले पश्चिमी देश उकसा रहे हैं.
क्रेमलिन की मीडिया यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंकाओं को भले ही मज़ाक में उड़ा रही है, लेकिन यहां मीडिया के संदेश कुछ इस तरह से डिज़ाइन किए जा रहे हैं, जिससे जनता को यह समझाया जा सके कि यदि रूस हमला कर भी दे तो यह पूरी तरह सही क़दम होगा.
यूक्रेन के खिलाफ़ आरोप
क्रेमलिन की मीडिया के लिए यूक्रेन कई बुराइयों से भरा देश है. सालों से क्रेमलिन की मीडिया कीव सरकार पर नाज़ी झुकाव और रूसी भाषी लोगों का उत्पीड़न करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाती रही है.
इसलिए हाल ही में क्रेमलिन मीडिया की ओर से यूक्रेन पर यह आरोप लगाना कि वह डोनबास क्षेत्र के विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले हिस्सों में रहने वाले नागरिकों पर अकारण हमला कर सकता है, रूस के दर्शकों के लिए कोई नई बात नहीं है.
पूर्व यूक्रेन में मॉस्को के समर्थन से रहने वाले कुछ अलगाववादी भी अक़्सर इस तरह के आरोप लगाते रहे हैं. उदाहरण के लिए, तथाकथित दोनेस्क पीपल्स रिपब्लिक के मुख्य बाग़ी नेता डेनिस पशलिन ने रूसी समाचार चैनल पर आकर यह कहा कि कीव ने हमले की तैयारी के तहत यूक्रेनी सेना के सभी हमलावर बलों को इस क्षेत्र में तैनात कर दिया है.
दोनेस्क क्षेत्र के ही अन्य अलगाववादी एडुअर्ड बसुरिन को टीवी पर यह आरोप लगाते दिखाया गया कि यूक्रेन नागरिकों के लिए मौजूद मूलभूत सुविधाओं को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है.
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इन आरोपों का नतीजा ही है कि अब जानेमाने लोग रूस से हस्तक्षेप किए जाने की मांग कर रहे हैं.
26 जनवरी को, मुख्य टीवी चैनलों ने यूनाइटेड रशिया पार्टी के अहम सदस्य आंद्रे तुरचक की ओर से की गई अपील को प्रसारित किया.
इस अपील में आंद्रे ने कहा, "शांति से रहने वाले नागरिकों को क़त्ल किया जा रहा है. वहीं, पश्चिमी देश यूक्रेन की सरकार को डोनबास में सीधे आक्रमण करने के लिए उकसा रही है. ऐसी परिस्थिति में रूस को चाहिए कि वह लुहांस्क और दोनेस्क के लोगों को कुछ विशेष प्रकार के हथियार देकर उन्हें ज़रूरी मदद पहुंचाए."
रूस की मीडिया के यूक्रेन की ओर से हमले की आशंका के दावों के बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने चेताया है कि रूस यूक्रेन में अपने सैन्य हमले को सही ठहराने के लिए संभवतः 'फ़ॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन' की तैयारी में जुटा हुआ है. फ़ॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन ऐसे अभियानों को कहा जाता है जिन्हें अंजाम देने वाले की पहचान पूरी तरह से छिपाई जाती है और ज़िम्मेदारी किसी और पर डाल दी जाती है.
रूस से ख़तरा "काल्पनिक"
यूक्रेन पर रूस के हमला करने की आशंका को क्रेमलिन समर्थक सिरे से ख़ारिज करते हैं.
उदाहरण के लिए, सरकारी टीवी के 'चैनल वन' ने इस ख़तरे की आशंका को ख़ारिज करते हुए इसे "काल्पनिक" बताया और चैनल के पॉलिटिकल टॉक शो के प्रेज़ेंटर यूक्रेन के ख़िलाफ़ "मौजूदा रूसी आक्रामकता" के आरोपों पर बात करते हुए अपनी हंसी नहीं रोक पाए.
यूक्रेन से सटी सीमा पर एक लाख रूसी सैनिकों की तैनाती फ़िलहाल कोई मुद्दा नहीं है जिसपर किसी का ध्यान जाए. अगर इसपर चर्चा होती भी है, तो यह संदेश देने की कोशिश रहती है कि मॉस्को अपने क्षेत्र में अपने सैनिकों को कहीं भी तैनात करने के लिए आज़ाद है.
क्रेमलिन की सरकारी मीडिया इससे भी इनकार करती है कि पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादी गुटों के साथ रूस भी मिला हुआ है. यहां का मीडिया साल 2014 में यूक्रेन के क्राइमिया पर क़ब्ज़े को जायज़ ठहराते हुए इसे रूसी क्षेत्र के "एकीककरण" के तौर पर पेश करता है.
पश्चिम के साथ तनातनी
यूक्रेन के साथ बढ़ते विवाद को क्रेमलिन का मीडिया लंबे समय से रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनातनी के एक बड़े हिस्से के तौर पर देखता है.
यूक्रेन को भी एक ऐसे देश के रूप में पेश किया जा रहा है जो अपनी स्वतंत्र नीति पर चलने में भी विफल है और इसलिए रूस से नफ़रत करने वाले पश्चिमी देश उसे अपने इशारों पर चलाते हैं.
रूसी अधिकारियों ने अपना तर्क पेश करने के लिए अपनी अलग शब्दावली तैयार कर ली है. ये अधिकारी आरोप लगाता है कि पश्चिमी देश एकजुट होकर यूक्रेन को अपने सैन्य गठबंधन में शामिल कर रहे हैं और देश में हथियार भर रहे हैं.
अमेरिका और ब्रिटेन को रूस के धुर-विरोधियों के तौर पर देखा जाता है और अक़्सर इनकी तुलना 'एंग्लो-सैक्सन्स' से की जाती है. एंग्लो सैक्सन समूह मध्य युग के शुरुआती समय में इंग्लैंड में रहते थे. माना जाता है कि यह समूह भी रूस पर क़ब्ज़ा करने की इच्छा रखता था. अब रूसी मीडिया ब्रिटेन और अमेरिका की इसी समूह से तुलना करता है.
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