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यूक्रेन पर तनाव के बीच पुतिन और अर्दोआन ने क्यों की बातचीत
विभिन्न मोर्चों पर तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने फ़ोन पर बातचीत की है.
इस बातचीत को काफ़ी अहम समझा जा रहा है क्योंकि दोनों ही देश अलग-अलग मोर्चों पर कई गतिरोध का सामना कर रहे हैं.
एक ओर रूस यूक्रेन के नेटो में शामिल होने के डर से यूक्रेन पर हमला करने की धमकी दे रहा है. वहीं दूसरी ओर रूस तुर्की से इसलिए नाराज़ है क्योंकि उसने यूक्रेन को अपने हथियार बेचे हैं.
रूस को डर है कि दो पूर्वी क्षेत्रों में इन हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन उसके अलगाववादी समर्थकों पर हमला करने के लिए कर सकता है. वहीं तुर्की नेटो का सदस्य भी है और उसकी इस संगठन में दूसरी सबसे बड़ी सेना है.
क्या हुई बातचीत
तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने जानकारी दी है कि अर्दोआन और पुतिन ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की है.
क्रेमलिन के रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के हवाले से एजेंसी लिखती है कि मॉस्को ने अमेरिका और नेटो को रूस को सुरक्षा देने की गारंटी का प्रस्ताव दिया है उस पर दोनों राष्ट्रपतियों ने चर्चा की है.
रूस का कहना है कि सुरक्षा गारंटी मिलने के बाद यूक्रेन को लेकर तनाव समाप्त हो जाएगा.
ग़ौरतलब है कि रूसी सेना ने यूक्रेन की सीमा पर अपनी फ़ौज तैनात कर रखी है और इसको लेकर अमेरिका और नेटो चेतावनी दे चुका है.
तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई है जिनमें काकेशस, सीरिया और लीबिया शामिल हैं.
रूस ने हाल ही में कहा था कि वो तुर्की और आर्मीनिया के बीच काकेशस में स्थिरता के मुद्दे को लेकर बातचीत की मध्यस्थता कर सकता है.
फ़ोन पर बातचीत के दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने इस बात पर सहमति दी कि वो रूस और तुर्की के लाभ की साझेदारी को और बढ़ाएंगे.
ड्रोन को लेकर तुर्की से तनाव
पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया संस्थाओं का अनुमान है कि यूक्रेन की सीमा पर टैंकों और तोपों के साथ रूस के अभी एक लाख सैनिक तैनात हैं. अमेरिका का मानना है कि जनवरी के अंत तक इसकी संख्या 1.75 लाख तक बढ़ सकती है.
कई विश्लेषकों का मानना है कि रूस यह दबाव की रणनीति के तहत कर रहा है ताकि यूक्रेन को पश्चिमी देशों के सुरक्षा संगठन नेटो में जगह न मिल सके.
रूस को डर है कि अगर यूक्रेन नेटो का सदस्य बना तो नेटो के ठिकाने उसकी सीमा के नज़दीक खड़े कर दिए जाएंगे. हालांकि नेटो ने रूस को भरोसा दिलाया है कि उससे उसको कोई ख़तरा नहीं है.
बीते महीने पुतिन ने तुर्की में निर्मित ड्रोन को तैनात करने पर यूक्रेन की आलोचना की थी. यूक्रेन को हथियार बेचने को लेकर रूस तुर्की की आलोचना करता रहा है उसको डर है कि इनका इस्तेमाल उसके समर्थक अलगाववादियों के ख़िलाफ़ होगा.
अक्तूबर 2021 में यूक्रेन ने अपने पूर्वी हिस्से में अलगाववादियों के ख़िलाफ़ ड्रोन का इस्तेमाल किया था.
तुर्की के रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छे रिश्ते माने जाते हैं लेकिन तुर्की यूक्रेन के क़ब्ज़े में रहे क्रीमियाई प्रायद्वीप को छीने जाने पर रूस की आलोचना करता रहा है और एकीकृत यूक्रेन की मांग का समर्थन करता है.
रूस की ड्रोन बेचने की आलोचना के बाद तुर्की ने जवाब दिया था कि यूक्रेन के ड्रोन इस्तेमाल करने को तुर्की का ड्रोन नहीं कहा जा सकता है क्योंकि अगर कोई राष्ट्र तुर्की के हथियार ख़रीदता है तो वो तुर्की के उत्पाद नहीं बल्कि जो देश उन्हें ख़रीदता है वो उसके हो जाते हैं.
तुर्की की मदद भी कर रहा है रूस
तुर्की के विदेश मंत्री मेवलूत कवूसोलू ने बीते सप्ताह रूस से निवेदन किया था कि वो अपनी 'एकतरफ़ा' मांगों को छोड़ दे और यूक्रेन पर पश्चिमी देशों और नेटो के साथ चल रहे गतिरोध पर अधिक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाए.
रूस और तुर्की दक्षिणी काकेशस में स्थिरता लाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी कर रहा है. 2020 के आख़िर में नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध के कारण इस क्षेत्र में अभी भी स्थिरता नहीं आई है.
इस महीने तुर्की और आर्मीनिया के विशेष दूत संबंधों को सामान्य करने की दिशा में रूस मे मिलने जा रहे हैं. आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध के बाद फैले तनाव के बाद रूस क्षेत्रीय शांति के लिए कोशिशें कर रहा है.
वहीं, सीरिया और लीबिया में रूस और तुर्की दोनों अलग-अलग पक्षों के साथ लड़ रहे हैं लेकिन संघर्ष कम करने की दिशा में आमतौर पर सहयोग करने की कोशिशें करते हैं.
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