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शीतकालीन ओलंपिक के बहिष्कार पर अमेरिका को चीन की चेतावनी
अमेरिका ने अगले साल बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक का राजनयिक बहिष्कार करने का एलान किया है जिस पर चीन की प्रतिक्रिया आई है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ''अमेरिका को अपनी ग़लती की क़ीमत चुकानी होगी.''
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका का यह फ़ैसला ''केवल एक साज़िश है जो कि नाकाम होकर रहेगा.''
चीन ने आगे कहा है कि इससे केवल दोनों देशों की द्विपक्षीय बातचीत और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को ही नुक़सान पहुंचेगा. इसके साथ ही चीन ने जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.
चीन ने कहा है कि अमेरिका केवल बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक को बाधित करने की कोशिशें कर रहा है और इससे अमेरिका के नैतिक अधिकार और विश्वसनीयता पर ही असर पड़ेगा.
अमेरिका ने क्या कहा था
अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन की चिंताओं के कारण खेलों में अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल नहीं होगा
हालांकि ये साफ़ किया गया कि अमेरिकी खिलाड़ी इसमें भाग ले सकते हैं और उन्हें सरकार का पूरा समर्थन मिलेगा.
वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने इस बहिष्कार को 'ख़ुद के ज़रिए गढ़ा गया एक तमाशा' क़रार दिया है. दूतावास ने कहा है कि इससे खेलों की कामयाबी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
संयुक्त राष्ट्र में चीनी मिशन के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "अमेरिका सिर्फ़ खेलों का राजनीतिकरण करना चाहता है ताकि विभाजन पैदा हो और टकराव बढ़े."
इस तरह की घोषणा के बारे में चीन को पहले से ही आशंका थी. इसके मद्देनज़र चीन पहले ही कहा चुका था कि वो 'इस तरह के बहिष्कार के ख़िलाफ़ 'एक साहसी जवाबी क़दम उठाएगा.'
शिंजियांग में मानवाधिकारों के हनन का दिया हवाला
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले महीने ही कहा था कि वह साल 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का राजनयिक बहिष्कार करेंगे.
सोमवार को व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने बहिष्कार की पुष्टि करते हुए कहा कि बाइडन प्रशासन ओलंपिक के "रंगारंग आयोजन" में योगदान नहीं देगा.
उन्होंने कहा, "इन खेलों में अमेरिकी राजनयिक या आधिकारिक प्रतिनिधित्व का शामिल होना चीन के शिंजियांग में मानवाधिकारों के हनन और अत्याचारों को नज़रअंदाज़ करने जैसा होगा, हम ऐसा नहीं कर सकते."
2022 के शीतकालीन ओलंपिक के बाइडन प्रशासन के राजनयिक बहिष्कार से पहले, साल 1980 में अमेरिका ने मॉस्को ओलंपिक से अपने खिलाड़ी वापस बुला लिए थे और खेल में हिस्सा नहीं लिया था. अमेरिका ने सोवियत संघ के अफ़ग़ानिस्तान पर किए गए हमले के विरोध में ये क़दम उठाया था.
इसके बदले में सोवियत संघ ने 1984 में लॉस एंजिल्स में हुए ग्रीष्म ओलंपिक का बहिष्कार किया था.
सोमवार को साकी ने कहा कि "अमेरिकी सरकार मानती है कि उन एथलीटों को दंडित करना सही नहीं होगा जो इसके लिए लंबे समय से ट्रेनिंग ले रहे हैं, लेकिन 2022 खेलों के लिए आधिकारिक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजना 'एक स्पष्ट संदेश देगा.''
अमेरिका के बाद न्यूज़ीलैंड ने भी शीतकालीन ओलंपिक में आधिकारिक स्तर पर राजनयिक प्रतिनिधि नहीं भेजेने की घोषणा की है.
मंगलवार को देश के उप-प्रधानमंत्री ग्रांट रॉबर्टसन ने इस फ़ैसले के पीछे ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते संक्रमण को वजह बताया.
न्यूज़ीलैंड के सरकारी न्यूज़ चैनल टीवीएनज़ेड के अनुसार, अमेरिका की ओर से खेलों का बहिष्कार करने के बाद रॉबर्टसन से पत्रकारों ने न्यूज़ीलैंड का रूख़ पूछा, जिसके जवाब में उन्होंने कहा, "हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आधिकारिक स्तर पर प्रतिनिधिमंडल नहीं शामिल होंगे."
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