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मोदी सरकार के इस समर्थन पर चीनी अख़बार हुआ फिदा
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम नहीं हो रहा है लेकिन शुक्रवार को भारत ने 2022 में चीन में विंटर ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स खेलों की मेज़बानी का समर्थन किया है.
दूसरी तरफ़ अमेरिका की ओर से ऐसे संकेत आ रहे थे कि वो मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में इस अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन का राजनयिक बहिष्कार कर सकता है.
चीन और भारत के बीच पिछले 19 महीनों से सीमा पर तनाव है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन, भारत से लगी सीमा पर सैन्य ठिकाना और मज़बूत कर रहा है.
लेकिन शुक्रवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लवरोफ़ और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ वर्चुअल बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विंटर ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स खेलों के आयोजन में चीन का समर्थन किया.
रूस, चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की इस बैठक के बाद साझा बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया है, ''चीन में 2022 में विंटर ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स खेलों की मेज़बानी के लिए मंत्रियों ने समर्थन किया है.''
ग्लोबल टाइम्स ने की ख़ूब तारीफ़
चीन अगले साल चार मार्च से 13 मार्च तक चीन विंटर ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स की मेज़बानी करने जा रहा है.
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उनकी सरकार चीन में खेल आयोजनों के राजनयिक बहिष्कार के बारे में विचार कर रही है.
बाइडन सरकार अपने खिलाड़ियों को तो चीन भेजेगी लेकिन अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजने पर विचार कर रही है. कहा जा रहा है कि इस मामले में अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी भी हाथ मिला सकते हैं.
भारत के इस समर्थन को लेकर चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र मानेजाने वाला दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा है, ''भारत के समर्थन से पता चलता है कि वो अमेरिका का स्वभाविक सहयोगी नहीं है.'' भारत के समर्थन की ग्लोबल टाइम्स ने जमकर तारीफ़ की है.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''चीन के साथ कई मसलों पर तनाव के कारण भारत हाल के वर्षों में अमेरिका के क़रीब हुआ है. इन सबके बीच भारत ने चीन में विंटर ओलंपिक्स का समर्थन कर सोशल मीडिया यूज़र्स और कई देशों को हैरान किया है.''
''इससे पता चलता है कि भले दोनों देशों के बीच सरहद पर तनाव है लेकिन पूरा द्विपक्षीय संबंध तनाव भरा नहीं है. दोनों देशों के कई मोर्चों पर साझे हित हैं. दोनों देशों टकराव से बच सकते हैं और 2020 के पहले वाला सहयोग बहाल कर सकते हैं.''
चौंकाने वाला क़दम
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''भारत ने विंटर ओलंपिक्स में चीन का समर्थन कर राजनयिक और रणनीतिक स्वयत्तता का परिचय दिया है. अमेरिका की तरफ़ झुकाव के बावजूद भारत ने दिखाया कि वो सभी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामले में अमेरिका के साथ नहीं रह सकता. यह बहुत ही साफ़ है कि नई दिल्ली वॉशिंगटन का स्वभाविक सहयोगी नहीं है.''
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मज़बूत होते संबंधों के बावजूद भारत ने चीन, रूस और शंघाई सहयोग संगठन के साथ ब्रिक्स के सदस्य देशों से भी संबंधों को आगे बढ़ाना जारी रखा है. इससे पता चलता है कि भारत अपनी विदेशी नीति उदार रखना चाहता है और अपने संबंधों को किसी खेमे तक सीमित नहीं रखना चाहता है.''
ग्लोबल टाइम्स से सिंघुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रैटिजिक इन्स्टि्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फ़ेंग ने कहा है, ''भारत ने एक सकारात्मक संदेश भेजा है कि वो चीन के साथ तनाव को देख लेगा और द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता लाएगा. वर्तमान गतिरोध से निपटने के लिए और धैर्य की ज़रूरत है. दोनों पक्ष और संवाद से विवाद को सुलझा सकते हैं.''
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''विंटर ओलंपिक्स में भारत के इस रुख़ से स्पष्ट है कि वो अमेरिका का छोटा भाई नहीं बनना चाहता है, जैसे कि जापान और ऑस्ट्रेलिया हैं. भारत अपने दम पर ताक़तवर बनना चाहता है और अमेरिका से जुड़ने को लेकर अनिच्छुक है.''
समर्थन क्यों?
ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख का शीर्षक दिया है- भारत ने विंटर ओलंपिक्स में चीन का समर्थन कर बता दिया है कि वो अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी नहीं है.
इस शीर्षक को ट्विटर पर शेयर करते हुए भारत के जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने लिखा है, ''जब लोकतांत्रिक देशों के बीच चीन में विटंर ओलंपिक्स के बहिष्कार की बात ज़ोर पकड़ रही है, तब चीन का यह प्रॉपेगैंड़ा अख़बार मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ़ में यह हेडलाइन दे रहा है.''
ग्लोबल टाइम्स ने विंटर ओलंपिक्स के बहिष्कार की बात पर लिखा है कि चीन ने अमेरिका या पश्चिमी देशों के नेताओं को आमंत्रित ही नहीं किया है तो बहिष्कार की बात कहाँ से आ गई.
ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''ओलंपिक के नियमों के अनुसार, खेल में नेताओं के शामिल होने के लिए आईओसी का निमंत्रण अनिवार्य है. चीन की कोई योजना नहीं है कि वो इस खेल में अमेरिका या पश्चिम के नेताओं को आमंत्रित करे.''
अगले महीने 9 और 10 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने लोकतंत्र सम्मेलन में भी चीन और रूस को आमंत्रित नहीं किया है. इसमें 110 देशों को आमंत्रित किया गया है. भारत और पाकिस्तान को आमंत्रित किया गया है लेकिन रूस, चीन, तुर्की, बांग्लादेश समेत कई देशों को नहीं बुलाया गया है.
चीन ने इसे लेकर भी अमेरिका पर हमला बोला है. लोकतंत्र को लेकर ही चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इसी साल अप्रैल में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकतंत्र कोई कोकाकोला नहीं है कि दुनिया के हर कोने में समान स्वाद का वादा किया जा सके. उन्होंने कहा था कि चीन ने ख़ुद अपने लिए जो रास्ता चुना है, अमेरिका को उसका सम्मान करना चाहिए.
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