You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारत-चीन तनाव: क्या क्वॉड’ समूह के कारण भारत से परेशान रहता है चीन?
- Author, शुभम किशोर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत-चीन सीमा पर जारी विवाद के बीच ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन का विरोध किया है. भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत बैरी ओ फ्रेल ने बुधवार को अपने एक भाषण में चीन के विकास की तारीफ़ की लेकिन साथ ही ये भी कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए बने नियमों की हिफ़ाज़त करना ज़रूरी है.
ओ फ्रेल ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से ये चिंता की बात है कि बीजिंग इसके लिए समर्पित नहीं है.’’
दूसरी ओर अमरीका ने भी कहा कि वो स्थिति पर नज़र बनाए हुए है. व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी केली मैकएनी ने कहा है, “राष्ट्रपति को हालात के बारे में जानकारी है. हम अपनी संवेदना प्रकट करते हैं.”
अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के बयानों के बाद, ‘क्वॉड’ की भूमिका को लेकर एक चर्चा शुरू हो गई है. ये दोनों देश क्वॉड समूह का हिस्सा हैं.
क्या हैक्वॉड’?
द क्वाड्रिलैटरल सिक्युरिटी डायलॉग (क्यूसिड) जिसे क्वॉड (QUAD) के नाम से भी जाना जाता है, ये अमरीका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच अनौपचारिक राजनीतिक वार्ता समूह है. साल 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने पहली बार इसका प्रस्ताव रखा था जिसे भारत, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया. इसके बाद इसी साल इनकी बैठक हुई थी.
पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा बीबीसी को बताते हैं, “ये सिलसिला अनौपचारिक तरीक़े से शुरू हुआ था, किसी प्लान के तहत नहीं. जब सुनामी आई थी तब अमरीका, भारत और कुछ और देशों ने मिलकर राहत का काम शुरू किया था जिसका काफ़ी सकारात्मक असर हुआ था. उससे लगा कि हम कई चीज़ों में साझेदारी कर सकते हैं जो डिफ़ेंस से जुड़ा नहीं हो. लेकिन लोगों के फ़ायदे के लिए हो. इसके अलावा जब सोमालिया के समुद्री लुटेरों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन शुरू हुए, उसमें भी अमरीका, भारत और कुछ और देशों ने मिलकर काम किया. इसके नतीजे भी अच्छे थे. इन देशों को लगने लगा कि हम मिलकर काम कर सकते हैं.”
डोगरा आगे बताते हैं, “जब साउथ चाइना समुद्र में चीन ने अपनी प्रभुता दिखानी शुरू की तो सबको चिंता होने लगी कि दुनिया के नियमों को ताक पर रख चीन अपनी मर्ज़ी चलाने लगेगा. भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया का कारोबार इस रास्ते से होता है. क्वॉड कोई आक्रामक रवैया नहीं है, ये कुछ देशों के विचारों का मिलन है कि दुनिया नियमों और क़ानूनों से चलनी चाहिए. क्वॉड की शुरुआत एक सकारात्मक सोच के साथ हुई है."
लेकिन 2007 में शुरू होने के बाद क्वॉड अगले 10 सालों तक निष्क्रिय रहा. साल 2017 में एक बार फ़िर क्वॉड के देश मिले. 2019 में बैठक का स्तर बढ़ा और चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया.
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर इंटरनेशनल पॉलिटिक्स के प्रो. स्वर्ण सिंह के मुताबिक़, “इसका खांचा अब तैयार हुआ है और इसमें कुछ और देशों को जोड़ने की कोशिश भी हो रही है. इसी के तहत अमरीका ने पहल कर न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की. इस ग्रुप को क्वॉड प्लस का नाम दिया गया है”
उनके मुताबिक़ “दूसरें देशों का इससे जुड़ना भारत के लिहाज़ से भी अच्छा है, भारत हमेशा अन्य देशों को जोड़ने और उनके साथ बातचीत के पक्ष में रहा है.”
सैन्य गठबंधन नहीं है क्वॉड
भारत की कोशिश रही है कि क्वॉड को लेकर कभी किसी देश को ये संकेत न जाए कि ये कोई सैन्य गठबंधन है. भारत, अमरीका और जापान के साथ मालाबार में नौ-सेना अभ्यास करता आया है लेकिन उसमें ऑस्ट्रेलिया को शामिल नहीं करने के पक्ष में रहा.
डोगरा बताते हैं, “भारत का ये क़दम सही था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया का चीन के साथ तनाव बढ़ रहा था. लेकिन अब परिस्थिति बदली है. चीन के रिश्ते कई देशों के साथ दोस्ताना नहीं हैं, जैसे-जैसे चीज़ें बदल रही हैं, भारत का ये स्टैंड भी बदल सकता है. क्वॉड की स्थापना शांति के मुद्दे को लेकर हुई है. ये सोचना कि क्वॉड युद्ध के लिए बना है, ग़लत है. लेकिन क्वॉड के देशों को अगर चीन के एक्शन से क्षति पहुंचेगी तो रिएक्शन हो सकता है, लेकिन एक मिलिट्री अलायंस (सैन्य गठबंधन) की स्थिति अभी दूर है.”
चीन का आक्रामक रवैया क्वॉड को तोड़ने की कोशिश?
कई लोग अटकलें लगा रहे हैं कि भारत के ख़िलाफ़ चीन के आक्रामक रवैये के पीछे क्वॉड को तोड़ने की मंशा है. राजीव डोगरा कि राय इस मुद्दे पर अलग है.
वो कहते हैं, “ये ग़लत अटकलें है, चीन एक बड़ा मुल्क है और उसका रवैया किसी एक चीज़ की वजह से नहीं है. ये कई चीज़ों का मेल है. इस मेल का सबसे बड़ा मुद्दा चीन की महत्वाकांक्षा है. चीन की महत्वाकांक्षा उसको एक ऐसी दिशा में ले जा रही है जहां स्पर्धा और लड़ाई स्वाभाविक हो जाती है. चीन दुनिया का सुपरपावर बनना चाहता है, अमरीका को पछाड़ना चाहता है, ये सब जो हो रहा है, उसी कड़ी का हिस्सा है”
क्या है क्वॉड का भविष्य
अमरीका आक्रामक सोच रखता है, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले की तरह आक्रामक नहीं हैं और भारत हमेशा ही शांतिप्रिय देश रहा है, इन देशों के रवैये में काफ़ी फ़र्क़ है, तो क्या ये सभी मिलकर क्वॉड को आगे ले जा पाएंगे या पहले की तरह ये फिर निष्क्रिय हो जाएगा?
इसके जवाब में सिंह कहते है, “इन सभी देशों की एक सामान्य चिंता है, वो है चीन का बढ़ता दबदबा. कुछ देशों के लिए ये समस्या बहुत बड़ी है, कुछ के लिए उतनी बड़ी नहीं, लेकिन चिंता सभी को है.”
“कोविड-19 के बाद चीन की अर्थव्यवस्था और उसका दबदबा तेज़ी से बढ़ सकता है जो इन देशों की चिंताएं बढ़ा देगा, संभव है कि ये फ़ैक्टर इन्हें जोड़े रखने में मदद करेगा”
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)