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कोविड वैक्सीनः अमेरिका के कई सैनिकों ने नहीं लगवाया टीका, क्या हो सकती है कार्रवाई
अमेरिकी सेना के दो प्रमुख अंग- नेवी और मरीन के कई सैनिकों ने कोविड वैक्सीन नहीं लगवाई है. 800 सैनिकों ने सीधे वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया.
इन सैनिकों के लिए कोविड वैक्सीन लगवाने की समयसीमा 28 नवंबर तक थी. अमेरिकी सेना के लिए वैक्सीन लगवाने की डेडलाइन 15 दिसंबर हैं.
अमेरिकी सेना में क़रीब 21 लाख लोग हैं जिनमें एक्टिव और रिज़र्व बल शामिल हैं. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वैक्सीन ना लगवाने वाले सैनिकों पर कार्रवाई की जा सकती है.
तो क्या वैक्सीन ना लगवाने वाले सैनिक और नाविक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं और उन पर क्या कार्रवाई हो सकती है? इस बारे में हम ये तथ्य जानते हैं-
समयसीमा क्या है?
अमेरिकी सेना की अलग-अलग सेवाओं में वैक्सीन लगवाने की समयसीमा अलग-अलग है
अमेरिकी वायुसेना ने एक्टिव ड्यूटी पर रहने वाले कर्मचारियों के लिए 2 नवंबर की डेडलाइन निर्धारित की है. नेवी और मरीन कॉर्प्स ने 28 नवंबर की समयसीमा तय की. जबकि अमेरिकी सेना की इसकी डेडलाइन 15 दिसंबर हैं.
रिज़र्व सैनिकों और नेशनल गार्ड (जो पार्ट-टाइम सेना के साथ हैं) के लिए समयसीमा अलग-अलग है. नेवी के रिज़र्व सैनिकों की डेडलाइन 12 दिसंबर है जबकि नेशनल गार्ड और आर्मी रिज़र्व के लिए ये 30 जून 2022 है.
कितने सैनिकों को टीका लग चुका है?
नवंबर की शुरुआत तक के डेटा के मुताबिक़ एक्टिव ड्यूटी में लगे 13 लाख अमेरिकी सैनिक जो कि कुल संख्या का 97 प्रतिशत हैं वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लगवा चुके हैं. जबकि एक्टिव ड्यूटी में शामिल 88 फ़ीसदी सैनिकों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं.
हालांकि रिज़र्व सैनिकों और नेशनल गार्ड को मिलाकर सिर्फ़ 69 फ़ीसदी अमेरिकी सैनिकों का ही टीकाकरण पूरा हुआ है.
अमेरिकी सेना के अलग-अलग अंगों में मरीन कॉर्प्स में वैक्सीन न लगवाने वालों की संख्या सबसे अधिक है. रिपोर्टों के मुताबिक समयसीमा समाप्त होने तक 10 हज़ार से अधिक मरीन सैनिक ऐसे रहे जिनका टीकाकरण नहीं हुआ.
मरीन कॉर्प्स अमेरीकी सेना की सबसे छोटी सर्विस है और इसमें वैक्सीन को लेकर हिचक सबसे ज़्यादा थी. नवंबर के शुरुआत में कमांडेंट डेविड बर्जर ने सैनिकों को चेतावनी देते हुए वीडियो संदेश भी जारी किया था. उन्होंने कहा था कि जब तक अंतिम मरीन को वैक्सीन नहीं लगती है, मिशन को लेकर फोर्स की तैयारी में खलल पड़ सकता है.
उन्होंने कहा था, "हमारे पास अतिरिक्त मरीन सैनिक नहीं है. हम एक छोटी फोर्स हैं. हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हमारी टीम का हर व्यक्ति किसी भी समय तैनाती के लिए तैयार हो."
वहीं अमेरिका की एयर फोर्स और स्पेस फोर्स के 326,000 एक्टिव ड्यूटी सैनिकों में से 97 फ़ीसदी को समय से पहले दोनों टीके लग चुके थे. अब क़रीब दस हज़ार ऐसे हैं जिन पर टीका न लगवाने की वजह से कार्रवाई हो सकती है.
एयर फोर्स ने एक बयान में कहा है कि अब 9,600 एक्टिव सैनिक ऐसे हैं जिन्हें टीका नहीं लगा है. अब इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है या इन्हें सेना से बाहर निकाला जा सकता है. एयर फोर्स का कहना है कि एक महीने के भीतर इनकी तरफ़ से दिए गए कारणों की समीक्षा की जाएगी. फोर्स के मुताबिक़ सिर्फ़ 800 सैनिकों ने ही सीधे वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया था जो की कुल फोर्स के एक फीसदी से भी कम हैं.
कोविड से कितने सैनिक बीमार हुए या मारे गए?
रक्षा मंत्रालय के डेटा के मुताबिक़ 17 नवंबर 2021 तक अमेरिकी सेना के 75 जवानों की मौत कोविड की वजह से हुई जबकि कुल 2,280 सैनिकों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.
सेना में संक्रमण की शुरुआत से 250,600 से अधिक मामले सामने आए हैं इनमें सबसे अधिक 87,885 यूएस आर्मी में सामने आए हैं.
इन आंकड़ों में सिविल डिफेंस के कर्मचारियों की हुईं 370 मौतें शामिल नहीं है. इसके अलावा आर्मी कांट्रेक्ट पर काम करने वाले 126 और सेना पर निर्भर 33 लोगों की मौत को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है.
अमेरिका के रक्षा विभाग के सभी अंगों में कुल 604 मौतें दर्ज की गई हैं.
क्या सैनिक वैक्सीन लगवाने से मना कर सकते हैं?
अमेरिकी सैनिकों के लिए वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है और अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई और नौकरी से निकाले जाने की चेतावनी दे चुके हैं. हालांकि स्वास्थ्य और धार्मिक कारणों के आधार पर छूट दी जा सकती है.
नवंबर की शुरुआत तो अमेरिकी सेना के अलग-अलग अंगों में गिने-चुने लोगों को ही वैक्सीन से छूट दी गई थी. हालांकि इसका सटीक डेटा जारी नहीं किया गया है.
अमेरिकी सेना से जुड़े क़ानून के विशेषज्ञ और नेवी जज एडोवोकेट जनरल माइक हेज़ल कहते हैं कि वैक्सीन से छूट के मामले दुर्लभ ही होंगे.
हेज़ल कहते हैं, "धर्म के आधार पर छूट देने के लिए सेना के पास इस बात को बहत ठोस सबूत होना चाहिए कि ये मान्यता मज़बूत है और ये सिर्फ़ इसी वैक्सीन से प्रभावित नहीं हो रही है. सैनिकों को कई तरह की वैक्सीन लेनी होती है. हर सैनिक ने कई टीके लगवाए होते हैं."
वैक्सीन न लगवाने वाले सैनिकों का क्या हो सकता है?
ऐसे सैनिकों को कई तरह से दंडित किया जा सकता है. इनमें ग़ैर-न्यायिक सज़ा से लेकर कोर्ट मार्शल तक शामिल है.
सेना का कहना है कि किसी भी तरह का दंड दिए जाने से पहले सैनिकों को चेतावनी दी जाएगी.
लेकिन किसी सैनिक को दी गई बहुत कम गंभीर सज़ा-जैसे फटकार के औपचारिक पत्र- के भी सैनिक के करियर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
आर्मी के पूर्व जज एडवोकेट जनरल और बोस्टन के न्यू इंग्लैंड लॉ के प्रोफ़ेसर विक्टर हेंसन कहते हैं कि समस्या ये है कि फटकार के औपचारिक पत्र बिना टीका लगाए सेना में शामिल सैनिकों की समस्या का समाधान नहीं करेंगे.
वो कहते हैं, यदि कोई ऐसा सैनिक है जिसने टीका नहीं लगवाया है तो फिर उसे काम पर तैनात नहीं किया जा सकेगा. अहम सवाल ये है कि इन्हें कैसे बाहर किया जाए और इसके लिए सेना के पास कोर्ट मार्शल के अलावा भी कई प्रशासनिक विकल्प हैं.
सेना की कुछ सेवाओं ने स्पष्ट किया है कि जो सैनिक वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं उन्हें बाहर कर दिया जाएगा. अक्तूबर में मरीन सैनिकों को औपचारिक रूप से चेतावनी दी गई थी और कहा गया था कि जिन सैनिकों को छूट हासिल नहीं है और वो वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं उन्हें प्रशासनिक प्रक्रिया से अलग कर दिया जाएगा. नवंबर में आर्मी ने भी ऐसी ही चेतावनी जारी की थी.
हेंसन कहते हैं कि सबसे सख़्त सज़ा उन सैनिकों को दी जा सकती है जो स्वंय तो वैक्सीन के लिए मना कर ही रहे हैं साथ ही दूसरे सैनिकों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं.
वो कहते हैं, "ऐसा करना अनुशासन तोड़ना और क़ानून व्यवस्था आदेश को कमज़ोर करना है और ये सेना की मूल व्यवस्था के ख़िलाफ़ है. ऐसे सैनिकों को सख़्त दंड दिया जा सकता है."
यूएस नेवी ने 13 अक्तूबर को जारी आदेश में कहा था कि जिन सैनिकों के पास छूट नहीं है और टीकाकरण नहीं करवाया है उन्हें बाहर किया जा सकता है.
हालांकि हेंज़ल को लगता है कि वैक्सीन से जुड़े मामलों में कोर्ट मार्शल दुर्लभ ही होगा. सिर्फ़ बहुत ख़ास परिस्थितियों में ही ऐसा हो सकता है. वो कहते हैं, "यदि ऐसी परिस्थिति आई कि बहुत से सैनिक वैक्सीन के लिए मना कर दें तो हो सकता है कि किसी का कोर्ट मार्शल भी हो जाए."
सेना की तैयारी पर वैक्सीन का क्या असर होता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना के लिए दुनियाभर में अपने अभियानों के लिए तैयार रहने के लिए वैक्सीन से जुड़े मानकों को पूरा करना बेहद ज़रूरी है.
हेंसन कहते हैं, "सेना सैनिकों की तैनाती की तैयारी का जायज़ा लेने के लिए बहुत कुछ करती है. शारीरिक परीक्षण से लेकर दांतों के परीक्षण तक. यदि किसी सैनिक को वैक्सीन नहीं लगी है और उसे दूसरे सैनिकों के पास रखा जाता है तो इससे सेना की तैनात होने की तैयारी पर गंभीर असर पड़ सकता है."
उदाहरण देते हुए हेंसन कहते हैं कि अमेरिकी जंगी जहाज़ बेड़े यूएसएस रूज़वेल्ट पर एक हज़ार से अधिक नाविकों को संक्रमण हो गया था और एक नाविक की मौत भी हो गई थी.
वो कहते हैं, "इसलिए ही सभी का टीकाकरण करने पर इतना ज़ोर दिया जा रहा है. सेना के लिए तैयारी ही सबकुछ है."
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