उत्तर कोरिया में सर्दियां आने के साथ क्यों बढ़ रहा है भुखमरी का डर

उत्तर कोरिया में खेती करते लोगों की फ़ाइल फोटो

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    • Author, लॉरा बिकर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, सोल से

उत्तर कोरिया में भुखमरी के हालात बनने को लेकर देश के भीतर और बाहर दोनों जगह चिंता जताई जा रही है.

उत्तर कोरिया में प्रतिबंध के चलते दक्षिण कोरिया में रह रहे उत्तर कोरियाई लोगों का कहना है कि उत्तर कोरिया में उनके परिवार भुखमरी झेल रहे हैं. उत्तर कोरिया में सर्दियां आने के साथ-साथ कमज़ोर और असहाय लोगों के भुखमरी की चपेट में आने को लेकर चिंता जताई जा रही है.

दक्षिण कोरिया में ऑनलाइन न्यज़ूपेपर डेली एनके के संपादक ली सैंग योंग कहते हैं, "उत्तर कोरिया में बच्चों के अनाथ होने और लोगों के भूख से मरने के मामले बढ़ गए हैं. देश का निम्नवर्गीय तबका सबसे ज़्यादा मुश्किलों का सामना कर रहा है."

उत्तर कोरिया के बारे में जानकारी हासिल करना बहुत मुश्किल है. कोरोना महामारी से बचने के लिए पिछले साल जनवरी से ही देश की सीमाएं बंद हैं. यहां तक कि यहां दक्षिण कोरिया गए लोगों के लिए अपने परिवार और दोस्तों को संदेश भेजना भी जोखिम भरा हो गया है.

अगर किसी के भी पास अनाधिकृत मोबाइल फ़ोन मिलता है तो उसे लेबर कैंप में भेजा जा सकता है. लेकिन फिर भी कुछ लोग गंभीर ख़तरा उठाकर अपनों को संदेश भेज रहे हैं.

इन्हीं स्रोतों के ज़रिए हम उत्तर कोरिया की स्थिति बताने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें से कुछ ने अपनी पहचान छुपाई है.

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन

'चावल का हर दाना'

उत्तर कोरिया ने हमेशा खाने के सामान की कमी का सामना किया है और कोरोना महामारी ने इस स्थिति को और ख़राब कर दिया है.

देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने इस स्थिति को 1990 में आए सूखे के कारण पैदा हुई सबसे बड़ी आपदा से तुलना की थी. 1090 में पड़े सूखे में हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी.

हालांकि, अभी तक हालात इतने ख़राब नहीं बताए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि कुछ उम्मीद बाकी है. उत्तर कोरिया चीन के साथ अपनी सीमाओं को खोलने की तैयारी कर रहा है. लेकिन, ये स्पष्ट नहीं है कि अभी तक हुए आर्थिक नुक़सान की भरपाई के लिए उसे कितने कारोबार और मदद की ज़रूरत होगी.

उत्तर कोरिया के लिए इस साल की फ़सल बहुत महत्वपूर्ण है. पिछले साल की फ़सल तूफ़ानों की भेंट चढ़ गई थी. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि देश में कम से कम दो से तीन महीने के खाने के सामान की आपूर्ति की कमी है.

इस साल अनाज की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए हज़ारों लोगों को, यहां तक कि सेना को भी धान और मक्के की खेती के काम में लगाया गया है. कथित तौर पर किम जोंग-उन ने आदेश दिया है कि देश में चावल का एक-एक दाना सुरक्षित किया जाए और जो भी खाना खाता है वो खेती में मदद करे.

ली सैंग योंग कहते हैं, "फसल की कटाई के दौरान होने वले नुक़सान को कम करने के लिए योजना तैयार की गई है. इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि चोरी या धोखाधड़ी की सूचना मिलने पर सज़ा दी जाएगी. इससे डर का माहौल बन रहा है."

सांसदों के अनुसार पिछले हफ़्ते दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय ख़ुफ़िया सेवा ने बताया कि बंद दरवाजों के पीछे हुए संसदीय सुनवाई में किम जोंग-उन ने कहा कि उन्हें लगता है वो "आर्थिक स्थिति के कारण देश जोखिम भरे हालात का सामना कर रहा है."

राष्ट्रीय ख़ुफ़िया सेवा ने कथित तौर पर कहा कि दवाई और ज़रूरी सामानों की आपूर्ति कम होने के कारण टायफ़ाइड बुखार जैसी संक्रामक बीमारियां बढ़ी हैं.

वीडियो कैप्शन, किम जोंग के उत्तर कोरिया में भूखे क्यों मर रहे लोग?

खेती की आधुनिक मशीनों की कमी

उत्तर कोरिया खाने के सामान की कमी को लेकर दो बड़े मुद्दों का सामना कर रहा है, जिनमें पहला है खेती के तरीक़े.

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने भले ही नई सैन्य तकनीक और मिसाइलों में निवेश किया हो लेकिन उसके पास तेज़ और अच्छी फसल के लिए ज़रूरी आधुनिक मशीनरी की कमी है.

कोरियन रूरल इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट के चोई यूंगो कहते हैं कि "कृषि उपकरणों की आपूर्ति कम होने के कारम खाद्य उत्पादन में कमी आती है".

दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया की तरफ़ देखते लोग
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दक्षिण कोरिया के पश्चिमी हिस्से की एक ऊंची जगह से हमें उत्तर कोरिया की तरफ देखने का मौक़ा मिला. यहां से दूरबीन से उत्तर कोरिया की ज़मीन दिखती है.

यहां से और भी लोग उस तरफ़ के इलाक़े को देख रहे थे. मैंने सुना, दूरबीन से देख रही एक छोटी लड़की अपनी मां से कह रही थी कि 'उस तरफ रहने वाले लोग तो बिल्कुल हमारी तरह हैं'.

हमने देखा कि वहां गांव के लोग धान की कटाई कर रहे थे और उन्हें पीठ पर लादकर टैक्टर तक ले जा रहे थे.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को बांटने वाले असैन्य इलाक़े के पास दक्षिण कोरिया के एक किसान पाजू बताते हैं कि मशीन से फ़सल काटने में उन्हें एक घंटा लगता है. वो कहते हैं कि अगर ये काम हाथ से किया जाए तो इसमें उन्हें एक हफ़्ते का समय लग जाएगा. उत्तर कोरिया में फसल की कटाई का काम हाथ से ही किया जाता है.

दक्षिण कोरिया का किसान
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आपदाओं का ख़तरा ज़्यादा

महर उत्तर कोरिया को खाने के सामानों की समस्या सुलझाने के लिए तकनीक और खेती से जुड़ी आपूर्ति में कमी के साथ-साथ, लंबे समय से चली आ रही एक और समस्या को दूर करना होगा.

अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने उत्तर कोरिया को उन 11 देशों में शामिल किया है जिन पर ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे ज़्यादा असर पड़ सकता है, और इससे उत्तर कोरिया के वो सीमित इलाक़े सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे जहाँ वो अनाज उगाता है.

काउंसिल ऑन स्ट्रैटेजिक रिस्क्स नामक संस्था की कैथरीन डिल ने उत्तर कोरिया के संकट पर हाल ही में 'द कन्वर्जिंग क्राइसिस' एक रिपोर्ट लिखी है. वो कहती हैं, "अब इस बात की आशंका बढ़ गई है कि उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट पर धान और मक्के की फसलें कामयाब नहीं होंगी, जो कि उत्तर कोरिया के खाद्यान्न का कटोरा माना जाता है."

शायद इससे ये समझ में आता है कि उत्तर कोरिया ने ब्रिटेन में मौजूद अपने राजदूत को 26वें जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने क्यों भेजा.

चोई कहते हैं, "उत्तर कोरिया में प्राकृतिक आपदाओं का काफ़ी ख़तरा है. बाढ़, मानसून की बारिश और चक्रवात हर साल उन्हें परेशान करते हैं जिनसे फसल तो ख़राब होती ही है, कीड़े-मकोड़ों की भी समस्या पैदा होती है."

साल 2019 की इस तस्वीर में किम जोंग-उन

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चोई यूंगो कहते हैं, "उत्तर कोरिया में प्राकृतिक आपदाओं का भी ख़तरा अधिक रहता है. यहां बाढ़, मॉनसून की बारिश और तूफ़ान से हर साल फसल ख़राब होने का ख़तरा रहता है. साथ ही ऐसे कीड़े मकोड़ों का भी डर रहता जो फसलें नष्ट कर सकते हैं."

रिपोर्ट 'द कन्वर्जिंग क्राइसिस' ये संकेत देती है कि ये समस्या आनेवाले वर्षों में और गंभीर होती जाएगी और सूखे और बाढ़ से धान की खेती पर ख़ास तौर पर असर पड़ेगा.

कैथरीन डिल कहती हैं, "उत्तर कोरिया में अब शक्तिशाली तूफ़ान भी आने लगे हैं, 2020 और 2021 के तूफ़ानों के मौसम में ये देखने को भी मिला. और साथ ही तटीय इलाक़ों में समुद्र का जलस्तर भी बढ़ता जा रहा है."

उत्तर कोरिया वैसे तो बाहरी दुनिया ये बहुत कम संपर्क में आता है, मगर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दों पर वो बात करता है.

उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनईपी के साथ 2003 और 2012 में विभिन्न देशों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते समय काम किया. उसने क्योटो संधि और पेरिस समझौते जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

इसकी एक बड़ी वजह उसके अनाज के उत्पादन पर पर्यावरण का प्रभाव हो सकती है.

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उत्तर कोरिया में प्राकृतिक आपदाओं का ख़तरा अधिक रहता है
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2012 की यूएनईपी की रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर कोरिया का औसत तापमान 1918 से 2000 के बीच 1.9° C बढ़ गया, जो एशिया में सर्वाधिक बढ़ोतरी वाले देशों में से एक था.

2019 में ग्रीन क्लाइमेंट फ़ंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया का औसत तापमान 2050 तक 2.8-4.7°C तक बढ़ सकता है

दक्षिण कोरिया को लगता है कि ये मिलकर काम करने का एक मौक़ा है क्योंकि इस समस्या का असर दोनों देशों पर पड़ सकता है.

दक्षिण कोरिया की की पर्यावरण मंत्री हान ज्योंग-ए ने बीबीसी को पिछले सप्ताह बताया कि उन्हें उम्मीद है कि ग्लासगो में उनकी अपने उत्तर कोरियाई समकक्ष से बात होगी, मगर ऐसा नहीं हो सका है.

यदि स्कॉटलैंड में हो रहे भाषणों को उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि सुन रहे होंगे तो उन्हें पता चलेगा कि भले ही कोरोना महामारी का डर कम हो जाए और चीन के साथ उत्तर कोरिया का व्यापार बहाल हो जाए और सीमापार से सामान फिर देश में आने लग, मगर जो संकट गहरा रहा है वो पहले से ही परेशान उत्तर कोरियाई नागरिकों को और प्रभावित कर सकता है.

और अपने दम पर उत्तर कोरिया के लिए इस समस्या का हल निकालन आसान नहीं होगा.

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