बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला: कुमिल्ला के दुर्गा पंडाल में आख़िर हुआ क्या था?

- Author, क़ादिर कल्लोल
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला संवाददाता, कुमिल्ला से
पिछले सप्ताह ठीक आज ही के दिन दुर्गापूजा की अष्टमी के दिन बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंदुओं के ख़िलाफ़ हिंसा भड़क उठी. इसकी शुरूआत राजधानी ढाका से क़रीब 100 किलोमीटर दूर कुमिल्ला शहर से हुई थी.
कुमिल्ला के पूजा मंडप से तोड़फोड़ और हिंसा का ये सिलसिला बाद में ढाका, फ़ेनी, किशोरगंज, चांदपुर सहित बांग्लादेश के अनेक जगहों तक फैल गया.
इस हिंसा में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. वहीं मंदिरों, पूजा मंडपों और पुलिस के साथ झड़प की घटनाओं के सिलसिले में अलग-अलग ज़िलों में कई मामले दर्ज किए गए हैं.
पुलिस ने अब तक 40 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है. साथ ही अधिकारियों का कहना है कि इस घटना में शामिल कई अन्य संदिग्धों की पहचान कर ली गई है.
बांग्लादेश के कई शहरों में हुई हिंसा की इस घटना की शुरुआत कुमिल्ला में नदी तट पर जिस अस्थायी पंडाल से हुई, उसके आसपास कई हिंदू परिवार बसे हैं. ये लोग वहाँ बीते 20 सालों से भी अधिक समय से अस्थायी पंडाल बना कर दुर्गा पूजा करते रहे हैं.
पूजा के आयोजकों में से एक अचिंत्य दास ने बताया कि सप्तमी के दिन लगभग आधी रात तक लोगों का पंडाल में आना लगा रहा. जब लोगों का आना बंद हुआ तो आयोजकों ने पंडाल के मुख्य अहाते को पर्दे से घेर दिया था.
स्टेज से बाहर कुछ ही दूर पर गणेश जी की मूर्ति थी जो खुली हुई थी, वहाँ किसी का क़ुरान छूट गया था.
उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर एक निजी कंपनी के गार्ड को भी लगाया गया था, जो सुबह से वहाँ मौजूद था लेकिन जब वो क़ुरान रखी गई तब वह गार्ड वहाँ नहीं था.

999 हेल्पलाइन और फ़ेसबुक लाइव
सप्तमी के अगले दिन सुबह एक युवक ने 999 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके बताया कि उसने पंडाल में क़ुरान रखी देखी है. एक अन्य युवक ने इस पूरी घटना पर फ़ेसबुक लाइव कर डाली.
लेकिन इस घटना के चश्मदीद की कोई जानकारी नहीं है. केवल इतना ही पता है कि एक युवक ने 999 पर कॉल की और दूसरे ने फ़ेसबुक लाइव की और बाद में पुलिस ने दो युवकों फैयाज़ और इकराम को गिरफ़्तार किया.
अचिंत्य दास ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि कोमिल्ला के कोतवाली थाना के प्रभारी सुबह साढ़े सात बजे इस ख़बर के मिलने के बाद मौक़े पर पहुँच गए थे. पुलिस अधिकारी ने ही तब क़ुरान को पंडाल से हटाया. इस दौरान एक युवक वहाँ फ़ेसबुक लाइव कर रहा था.
पंडाल के बगल में रहने वाले हिंदू परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्हें सुबह ख़बर मिली कि पूजा स्थल पर क़ुरान रखा गया है. कुछ ही देर में पूरे इलाक़े में तनाव फ़ैल गया और पंडाल पर हमला बोल दिया गया.

पूजा आयोजक समिति के एक अन्य सदस्य फ़ोन पर इस घटना की ख़बर पाकर सुबह क़रीब साढ़े सात बजे वहाँ गए थे.
उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "जैसे ही क़ुरान रखे जाने की ख़बर फ़ैली, थोड़े ही समय में वहाँ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. उन्होंने पूजा को रोकने की मांग की."
"फिर भीड़ ने पंडाल पर धावा बोल दिया और अस्थायी मंच और मूर्ति को तोड़ दिया. बाद में कुमिल्ला के कई स्थानों में पंडालों और हिंदू घरों पर हमले किए गए."

आरोप-प्रत्यारोप
पूजा आयोजन समिति के कई सदस्यों ने यह शिकायत की कि पूजा का पंडाल नदी के एक तरफ था और कुमिल्ला नगर निगर के मेयर का घर दूसरी ओर और उन्हें सुबह ही इस घटना के बारे में इत्तला कर दी गई थी लेकिन वे घटनास्थल पर काफ़ी देर से पहुँचे. उनके पहुँचने से पहले वहाँ तनाव फैल गया था.
हालाँकि, मेयर मोनिरुल हक़ ने उन पर लगाए गए लापरवाही के इस आरोप का खंडन किया है.
उन्होंने कहा कि इस ख़बर के मिलने के बाद, वे घटनास्थल पर 9 बजे सुबह पहुँचे और वहाँ मौजूद पुलिस प्रशासन और हिंदू नेताओं से बात करके स्थिति को संभालने की कोशिश की.
उन्होंने उल्टा यह आरोप लगाया कि अब तक उस युवक को गिरफ़्तार नहीं किया गया है जिसने कोतवाली के थाना प्रभारी के घटनास्थल से क़ुरान हटाने को अपनी फ़ेसबुक लाइव में दिखाया था. उस युवक को उसी रोज़ शाम को गिरफ़्तार कर लिया गया.
बीबीसी ने कोतवाली थाना के पुलिस प्रभारी से बात करने और उनसे उस पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

क्या क़ुरान जान बूझ कर रखी गई थी?
13 अक्तूबर की इस घटना पर कुमिल्ला पुलिस प्रशासन की ओर से कोई भी टिप्पणी नहीं की गई.
हालाँकि, कुमिल्ला सदर अवामी लीग के सांसद केएम बहाउद्दीन बहार ने बीबीसी बांग्ला से कहा कि पुलिस की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है और उन्होंने उचित कार्रवाई की है.
कई स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि कहीं घटना के पीछे कोई आंतरिक राजनीतिक तो नहीं है.
सांसद बहार ने कहा कि उन्हें लगता है कि क़ुरान रखने की योजना बनाई गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने इस घटना के कई संदिग्धों की पहचान की है.
पूजा पंडाल में सीसीटीवी नहीं था. हालाँकि पुलिस ने आसपास के घरों से कुछ सीसीटीवी फ़ुटेज जुटाए हैं. अब तक पाँच मामलों में 40 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
इस बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि इस मामले के अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी. साथ ही उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने को भी कहा है.
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