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ईरान ने अफ़ग़ानिस्तान में मस्जिद पर हमले में शिया-सुन्नी की बात उठाई
अफ़ग़ानिस्तान के कंधार शहर में एक शिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए धमाके की ईरान ने कड़ी निंदा की है.
बीबी फ़ातिमा मस्जिद में हुए इस धमाके में 40 से अधिक लोगों की मौत हुई है. घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में ज़मीन पर लाशें बिछी पड़ी थीं और खिड़कियां टूटी हुई थीं जबकि बाक़ी लोग मदद की कोशिश कर रहे थे.
मस्जिद में काफ़ी भीड़ थी, जब आत्मघाती हमलावरों ने यह धमाका किया. इस्लामिक स्टेट समूह ने बयान जारी करके हमले की ज़िम्मेदारी ली है.
वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए हमले की निंदा की है और दुनिया के मुस्लिम देशों से अपील की है कि शिया और सुन्नी मुसलमानों को इस समय एक होने की ज़रूरत है.
अफ़ग़ानिस्तान में लगातार शिया मस्जिदों पर हो रहे आत्मघाती हमलों के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि इस देश में ये शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिशें हैं.
ईरान एक शिया मुस्लिम बहुल देश है और दुनिया में शिया मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने वाली किसी भी हिंसक घटना पर वो खुलकर बोलता रहा है.
ईरान ने क्या बयान जारी किया?
ईरान ने बयान जारी करते हुए इसे सीधे-सीधे शिया मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा बताया है और अपील की है कि इसे रोका जाना चाहिए.
विदेश मंत्रालय ने अपना बयान में कहा, "एक बार फिर इस्लाम के दुश्मनों ने आपराधिक तकफ़ीरी (जो किसी दूसरे शख़्स को अधर्मी घोषित करे) आतंकियों के तार को छेड़ा है और जुमे की नमाज़ के वक़्त अफ़ग़ानिस्तान के पीड़ित लोगों का ख़ून बहाया है."
"कंधार की फ़ातिमा मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाज़ी शहीद और घायल हुए हैं. तकफ़ीरियों के इस आतंकी हमले की ईरानी विदेश मंत्रालय निंदा करता है. अफ़ग़ानिस्तान के प्यारे लोगों और शहीद हुए लोगों के परिजनों के प्रति विदेश मंत्रालय संवेदनाएं प्रकट करता है और शोकाकुल परिवारों के संयम की शांति और घायलों के जल्द ठीक होने के लिए हम प्रार्थना करते हैं."
इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिशों पर भी बात की है.
बयान में कहा गया है, "विदेश मंत्रालय ने इस्लामी देशों के दुश्मनों की साज़िशों को लेकर चेतावनी दी है कि वो विभाजन पैदा करना चाहते हैं. मंत्रालय ने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि शिया और सुन्नियों को एकजुटता दिखाने की ज़रूरत है ताकि इस्लाम के नाम पर चरमपंथ और हिंसा को नकारा जा सके."
ईरान ने इस घटना के साथ-साथ कुंदूज़ की शिया मस्जिद में हुए आतंकी हमले का ज़िक्र भी किया है.
एक सप्ताह पहले ही अफ़ग़ानिस्तान के कुंदूज़ में एक शिया मस्जिद पर हमले में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे. इस हमले की ज़िम्मेदारी भी अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की शाखा आईएस-खुरासान (IS-K) ने ली थी.
ईरान ने अपने बयान में कहा है, "यह दिल दहला देने वाली घटना और इससे पहले कुंदूज़ में हुए आतंकी हमले की दुखद घटना ने ज़ोर दिया था कि अफ़ग़ानिस्तान में शिया और सुन्नियों की मस्जिदों के साथ-साथ जहां पर भीड़ इकट्ठा होती है, वहाँ पर सुरक्षा बढ़ाने और मज़बूत करने की ज़रूरत है."
"इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इस बात को लेकर आश्वस्त है कि अफ़ग़ानिस्तान में हमारे मुस्लिम भाई और बहन अपने दुश्मनों की विभाजनकारी योजनाओं को एकजुटता और साथ मिलकर की गई कोशिशों से विफल कर देंगे."
कैसे हमले को अंजाम दिया गया
इस्लामिक स्टेट ने अपने बयान में बताया है कि दो हमलावरों ने मस्जिद में घुसने से और ख़ुद को उड़ाने से पहले सुरक्षा गार्डों को मार दिया था.
समाचार एजेंसी एएफ़पी से अहमदुल्लाह नामक शख़्स ने कहा, "जब हमने नमाज़ पूरी की तो गोलियां चलनी शुरू हो गईं."
"इसके बाद दो, तीन धमाके हुए और हम खिड़कियों की ओर जाकर गिरे. बहुत सारे लोग जो शहीद हुए थे या घायल हुए थे वहीं पर पड़े थे."
शुक्रवार के दिन जुमे की नमाज़ के समय सबसे ज़्यादा लोगों की भीड़ मस्जिदों में होती है. एएफ़पी के एक पत्रकार ने कहा, घटनास्थल पर कम से कम 15 एंबुलेंस पहुंची थीं.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट की है कि तालिबान के स्पेशल फ़ोर्सेज़ ने घटनास्थल को नियंत्रण में ले लिया है और लोगों को पीड़ितों की मदद करने के लिए रक्तदान करने के लिए कहा है.
तालिबान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को ट्वीट करके इस घटना पर अफ़सोस जताया. उन्होंने लिखा, "कंधार में शिया भाइयों की मस्जिदों में एक धमाके का पता चलने पर हम बहुत दुखी हैं, जिसमें काफ़ी संख्या में हमवतन शहीद हुए हैं और घायल हुए हैं."
आईएस लगातार हमलावार
इस्लामिक स्टेट देश में तालिबान के नियंत्रण के विरोध में लगातार ये हमले कर रहा है.
कंधार अफ़गानिस्तान का दूसरा बड़ा शहर और तालिबान का एक तरह से जन्म स्थान रहा है, इसलिए यहाँ पर हुए इस हमले को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पिछले शुक्रवार को भी जुमे की नमाज़ के दौरान एक शिया मस्जिद पर आत्मघाती हमला हुआ था. उत्तरी शहर कुंदूज़ में हुए इस हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई थी. IS-K ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी और अगस्त में अमेरिकी सुरक्षाबलों के देश छोड़ने के बाद इसे सबसे बड़ा जानलेवा हमला बताया गया था.
IS-K सुन्नी मुसलमानों का चरमपंथी समूह है जिसे अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद सभी जिहादी लड़ाके समूहों में सबसे अधिक हिंसक माना जाता है.
ये अफ़ग़ान सुरक्षाबलों, अफ़ग़ान राजनेताओं और मंत्रालयों, तालिबान, शिया मुस्लिम और सिख धार्मिक नेताओं, अमेरिका, नेटो फ़ोर्सेज़ और मानवीय सहायता समूहों समेत कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को निशाना बना चुका है.
शिया मुसलमान निशाना बनते रहे हैं
सुन्नी मुसलमान चरमपंथी लगातार शिया मुसलमानों को पहले भी निशाना बनाते रहे हैं और वे उन्हें अधर्मी मानते हैं.
अफ़ग़ानिस्तान की तकरीबन 10% आबादी शिया मुसलमान है. इनमें से अधिकतर हज़ारा समुदाय से हैं जो कि देश का तीसरा सबसे बड़ा जातीय समूह है. यह समूह बरसों से अफ़ग़ानिस्तान समेत पड़ोसी देश पाकिस्तान में भेदभाव और उत्पीड़न झेलता रहा है.
इस महीने की शुरुआत में मानवाधिकर समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तालिबान पर 13 हज़ारा लोगों की हत्या का आरोप लगाया था लेकिन इसका उसने खंडन किया था.
अगस्त के अंत में अमेरिकी सुरक्षाबलों के देश छोड़ने के बाद तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले लिया था. साल 2001 में तालिबान को सत्ता से हटाने के बाद दो दशकों तक अमेरिकी सेना अफ़ग़ानिस्तान में थी.
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