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चीन में एप्पल ने क़ुरान ऐप को क्यों हटाया
- Author, जेम्स क्लेटोन
- पदनाम, उत्तर अमेरिका टेक्नोलॉजी रिपोर्टर
टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल ने चीन में दुनिया के सबसे मशहूर ऐप्स में से एक क़ुरान ऐप को वहाँ के अधिकारियों के अनुरोध पर हटा लिया है. कंपनी ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है.
क़ुरान मजीद ऐप स्टोर पर पूरी दुनिया में उपलब्ध है. वहाँ इसके लिए क़रीब 1.5 लाख रिव्यूज़ हैं.
हालाँकि कंपनी का कहना है कि अवैध धार्मिक विषयवस्तु को जगह देने के कारण इस ऐप को चीन के अधिकारियों के अनुरोध पर हटाया गया है. इस बारे में प्रतिक्रिया देने के अनुरोध पर चीन के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया.
एप बनने वाली कंपनी पीडीएमएस ने एक बयान जारी कर कहा है, "ऐप्पल के अनुसार अवैध विषयवस्तु को जगह देने के कारण हमारे ऐप क़ुरान मजीद को चीनी ऐप स्टोर से हटा लिया गया है. हम चीन के साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन और संबंधित चीनी अधिकारियों से बात कर मसले का हल तलाश रहे हैं."
इस ऐप के वहाँ से डिलीट किए जाने को सबसे पहले 'एप्पल सेंसरशिप' नामक वेबसाइट ने नोटिस किया. ये वेबसाइट एप्पल के ऐप स्टोर पर मौज़ूद ऐप पर नज़र रखती है.
मुसलमानों के बारे में चीन का रवैया
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी देश में इस्लाम को आधिकारिक धर्म के रूप में मान्यता देती है.
हालाँकि, चीन पर वहां के शिनजियांग प्रांत के अधिकांश वीगर मुसलमानों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों के उल्लंघन और यहाँ तक कि नरसंहार के आरोप लगते रहे हैं.
इस साल के शुरू में बीबीसी ने बताया था कि शिनजियांग प्रांत में कार्रवाई करते हुए वीगर इमामों को निशाना बनाया गया था.
एप्पल ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी देने से मना कर दिया. लेकिन उसने बीबीसी से अपनी मानवाधिकार नीति का ज़िक्र किया जिसमें कहा गया है, "हमें स्थानीय क़ानूनों का पालन करने की ज़रूरत है. कई बार ऐसे जटिल मामले आते हैं, जिस पर हम सरकारों से असहमत हो सकते हैं."
हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि इस ऐप ने चीन के कौन से नियम को तोड़ा है. क़ुरान मजीद नाम का ऐप बनाने वाली कंपनी का दावा है कि "दुनिया के 3.5 करोड़ मुसलमान उस पर भरोसा करते हैं."
एप्पल पर आरोप
पिछले ही महीने, एप्पल और गूगल दोनों ने जेल में बंद रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी के बनाए एक टैक्टिकल वोटिंग ऐप को अपने प्ले स्टोर से हटा लिया था.
रूसी अधिकारियों ने इन दोनों कंपनियों को धमकी दी थी कि अगर वो ये ऐप नहीं हटाते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा. उस ऐप में उपयोग करने वालों को बताया जाता था कि रूस की सत्तारूढ़ पार्टी को कौन हटा सकता है.
एप्पल के लिए चीन दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है. यही नहीं कंपनी के उत्पादों की पूरी सप्लाई चेन, काफी हद तक चीन की मैन्युफ़ैक्चरिंग क्षमता पर निर्भर है.
एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक पर अमेरिकी नेताओं ने पाखंड करने का आरोप लगाया है, क्योंकि अमेरिकी राजनीति पर तो वो बोलते हैं, लेकिन चीन से जुड़े मसलों पर चुप रहते हैं.
इससे पहले, टिम कुक ने 2017 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार की ओर से दुनिया के सात मुस्लिम बहुल देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की कड़ी आलोचना की थी.
लेकिन चीन की सरकार के सेंसरशिप का पालन करने और वहाँ के मुसलमान अल्पसंख्यकों के साथ चीन के व्यवहार की सार्वजनिक रूप से आलोचना न करने के आरोप उन पर लगे हैं.
दबाव
इस साल के शुरू में न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया था कि चीन की सरकार के रोक लगाने के बाद एप्पल उस ऐप को प्ले स्टोर से हटा लेती है. ऐप्स तियाननमेन चौक की घटना, चीन के आध्यात्मिक संप्रदाय फालुन गोंग, दलाई लामा और तिब्बत और ताइवान की आज़ादी जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं कर सकते.
इस हफ़्ते, चीन में एक और लोकप्रिय धार्मिक ऐप 'बाइबिल ऐप' को प्ले स्टोर से हटा लिया गया था. हालाँकि एप्पल ने कहा कि इस ऐप को ख़ुद कंपनी ने हटाया था. वहीं उस ऐप को बनाने वाली कंपनी ओलिव ट्री ने प्रतिक्रिया मांगने पर कोई जवाब नहीं दिया.
एप्पल सेंसरशिप के परियोजना निदेशक बेंजामिन इस्माइल ने बताया, "वर्तमान में एप्पल को बीजिंग के सेंसरशिप ब्यूरो में बदल दिया गया है. उन्हें सही काम करने की आवश्यकता है और उसके बाद चीन की सरकार की जो भी प्रतिक्रिया हो, उन्हें उसका सामना करना चाहिए."
गुरुवार को माइक्रोसॉफ़्ट ने बताया कि वो चीन में अपने सोशल नेटवर्क वेबसाइट 'लिंक्डइन' को बंद कर रही है. कंपनी ने कहा कि चीन की सरकार के नियमों का पालन करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था.
ये फ़ैसला तब लिया गया, जब लिंक्डइन पर कई पत्रकारों के प्रोफ़ाइल ब्लॉक किए जाने के बाद कंपनी से सवाल पूछे जा रहे थे.
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