पैंडोरा पेपर्स की आँच पाकिस्तान तक, इमरान ख़ान बोले- जाँच होगी

इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि दौलत छुपाने के मामले में लीक हुई जानकारियों में देश के जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी सरकार उसकी जांच कराएगी.

इस लीक को पैंडोरा पेपर्स नाम दिया गया है. इनमें पाकिस्तान के सैंकड़ों के लोगों नाम हैं. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के मंत्रिमंडल के कई लोगों के नाम भी इसमें शामिल हैं. लीक के मुताबिक ऑफ़शोर कंपनियों में निवेश के जरिए ये लोग गुपचुप तरीके से दौलत बाहर ले गए.

इस लीक को दुनिया के अब तक के सबसे बड़े वित्तीय लीक्स में से एक माना जा रहा है. इसके जरिए दुनिया भर के कारोबारियों और नेताओं की गुप्त डील सामने लाई गई हैं.

इमरान ख़ान ने कहा कि अगर किसी तरह की कोई गड़बड़ी पाई गई तो वो कार्रवाई करेंगे.

गुपचुप तरीके से रखी गई दौलत की जानकारी ग्लोबल इन्वेस्टिगेशन (वैश्विक स्तर पर हुई जांच) के जरिए सामने आई. ये जांच इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) को लीक की गईं 1.2 करोड़ फाइलों पर आधारित है. आईसीआईजे ने दुनिया भर के 140 से अधिक मीडिया ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर काम किया.

पाकिस्तान की मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक पैंडोरा पेपर्स में देश के 700 से ज़्यादा लोगों के नाम हैं. इनमें इमरान ख़ान के मंत्रिमंडल के दो सदस्य शामिल हैं.

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मंत्रियों के नाम

लीक हुए दस्तावेजों के मुताबिक पाकिस्तान के वित्त मंत्री शौकत तरीन और उनके परिवार के सदस्यों की चार ऑफ़ोशर फर्म हैं.

कंपनियों के पेपरवर्क को देखने वाले वित्तीय सलाहकार तारिक़ फवाद मलिक ने आईसीआईजे को बताया कि ये कंपनियां तरीन के परिवार ने इस इरादे से बनाईं थीं कि सऊदी के कारोबारी संपर्कों के जरिए एक बैंक में निवेश किया जा सके. मलिक ने आगे बताया कि लेकिन ये डील आगे नहीं बढ़ पाई.

पाकिस्तान के वित्त मंत्री

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लीक दस्तावेज़ों से भी पता चलता है कि जल संसाधन मंत्री चौधरी मुनीस इलाही ने ऑफ़शोर टैक्स पनाहगाहों में निवेश की योजना से हाथ खींच लिया जब उन्हें चेतावनी दी गई कि इनके बारे में पाकिस्तान के टैक्स विभाग को सूचित कर दिया जाएगा.

हालाँकि इलाही परिवार के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि उनकी संपत्तियों का ब्यौरा क़ानून के हिसाब से घोषित किया गया है.

प्रवक्ता ने कहा,"इन दस्तावेज़ों में राजनीतिक बदले की भावना से डेटा को ग़लत संदर्भ में पेश किया गया है."

इमरान ख़ान ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा कि वो इन पेपर्स में उजागर की गई बातों का स्वागत करते हैं.

2016 में, प्रधानमंत्री बनने से पहले इमरान ख़ान ने देश के उन अमीरों की दौलत बाहर छिपाने की जाँच करवाने के लिए विपक्ष की ओर से की जा रही माँग की अगुआई की थी जिनके नाम इससे पहले जारी हुए पनामा पेपर्स लीक में सामने आए थे.

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दावे पर विवाद

इस बीच, पाकिस्तान में एक अलग ही विवाद खड़ा हो गया जब सरकारी टीवी चैनल पीटीवी ने ये ग़लत दावा कर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के एक नाती जुनैद सफ़दर का भी नाम इन दस्तावेज़ों में शामिल है.

सरकारी टीवी पर आरोप लगाया गया कि सफ़दर के नाम पर पाँच कंपनियाँ रजिस्टर्ड हैं. इसे इमरान ख़ान के एक असिस्टेंट और सरकार के एक अन्य सदस्य ने भी ट्वीट किया.

रविवार को "PandoraLeaks" के नाम से एक ट्विटर एकाउंट भी सामने आया जिसमें जुनैद सफ़दर के बारे में दावे किए गए. मगर इस एकाउंट का पैंडोरा पेपर्स से कोई संबंध नहीं है.

पाकिस्तान में पैंडोरा पेपर्स जाँच से जुड़े पत्रकारों की एक टीम ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है कि दस्तावेज़ों में जुनैद सफ़दर का नाम नहीं है.

नवाज़ शरीफ़ ने 2017 में पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

हालाँकि उनके दामाद अली डार का नाम पैंडोरा पेपर्स में आए नामों में शामिल है. डार ने कोई भी अवैध काम करने से इनकार किया है और कहा है कि वो टैक्स के लिहाज से पाकिस्तान के निवासी नहीं हैं.

आईसीआईएज के मुताबिक़, 117 देशों के 600 से ज़्यादा पत्रकारों ने पैंडोरा पेपर्स दस्तावेज़ों पर काम किया है. ब्रिटेन में बीबीसी पैनोरमा और गार्डियन अख़बार ने जाँच की अगुआई की.

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