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न्यूज़ीलैंड को पाकिस्तान दौरा रद्द करने के लिए किसने दिया था ख़ुफ़िया इनपुट? - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के दौरे पर आई न्यूज़ीलैंड क्रिकेट टीम ने शुक्रवार को मैच शुरू होने से कुछ मिनटों पहले दौरा रद्द करने का फ़ैसला सुना दिया था.
न्यूज़ीलैंड की टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दौरा रद्द किया और अब पाकिस्तान में इस बात पर बहस हो रही है कि आख़िर न्यूज़ीलैंड की टीम को ऐसा क्या ख़तरा था जिसकी जानकारी पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को नहीं थी.
कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान ने न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री से फ़ोन पर बात की और टीम को पुख़्ता सुरक्षा देने का विश्वास दिलाया फिर भी वह नहीं मानीं.
लेकिन अब न्यूज़ीलैंड की मीडिया के हवाले से पाकिस्तानी अख़बार लिख रहे हैं कि पाँच देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों के इनपुट के बाद न्यूज़ीलैंड की सरकार ने क्रिकेट दौरा रद्द करने का फ़ैसला किया.
न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसियों के एक संयुक्त संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान का दौरा कर रही न्यूज़ीलैंड की टीम पर गंभीर ख़तरा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूज़ीलैंड और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड और फिर दोनों सरकारों के बीच 12 घंटे तक बातचीत हुई जिसके बाद दौरा रद्द करने का फ़ैसला किया गया.
न्यूज़ीलैंड की टीम के दौरा रद्द करने के बाद अगले महीने इंग्लैंड की टीम के पाकिस्तानी दौरे को लेकर भी अंदेशा जताया जाने लगा है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, अगले एक दो दिन में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड अंतिम फ़ैसला लेगा कि टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी या नहीं.
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की टीम भी अगले साल फ़रवरी में पाकिस्तान का दौरा करने वाली है लेकिन ताज़ा घटनाक्रम के कारण ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के दौरे पर भी संदेह पैदा हो गया है.
तालिबान ने शरिया के अनुसार संवैधानिक ढांचे की घोषणा की
अख़बार दुनिया के अनुसार, तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में शरिया (इस्लामी क़ानून) के तहत देश के लिए एक संवैधानिक ढांचे की घोषणा की है.
अख़बार के अनुसार तालिबान की मौजूदा अंतरिम सरकार ने शनिवार को 40 बिंदुओं पर आधारित नए संवैधानिक ढांचे का एलान किया.
इसके मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान एक इस्लामी देश होगा लेकिन दूसरे धर्म के नागरिकों को इस्लामी क़ानून के तहत अपने धार्मिक विश्वास को मानने की आज़ादी होगी.
अफ़ग़ानिस्तान का झंडा सफ़ेद रंग का होगा और उस पर क़ुरान की आयतें लिखीं होंगी. इसके अलावा पश्तो और दारी देश की सरकारी भाषा होगी.
विदेश नीति इस्लामी क़ानून के तहत होगी और पड़ोसी देशों के साथ सारे मुद्दे शांतिपूर्ण तरीक़े से हल किए जाएंगे.
इस नए संवैधानिक ढांचे में यह भी कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान का कोई भी हिस्सा किसी विदेशी सरकार के अधीन नहीं होगा. इसके अलावा आम जनता के बुनियादी मानवाधिकार होंगे और सबको बराबर इंसाफ़ मिलेगा.
अफ़ग़ानिस्तान के लिए बाइडन की आलोचना सही नहीं: इमरान ख़ान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के फ़ैसले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की आलोचना करना मुनासिब नहीं है.
डॉन अख़बार के मुताबिक़, रूस के सरकारी न्यूज़ चैनल को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा, "मैं पूरे यक़ीन से नहीं कह सकता कि इस वक़्त अमेरिका की अफ़ग़ानिस्तान को लेकर कोई पुख़्ता नीति है या नहीं और वो क्या करने जा रहे हैं. इसकी वजह यह है कि अफ़ग़ानिस्तान से सेना की वापसी के लिए राष्ट्रपति बाइडन की हद से ज़्यादा आलोचना की गई जो कि मेरी समझ से बिल्कुल भी उचित नहीं है. राष्ट्रपति बाइडन ने जो किया वो बहुत ही समझदारी का फ़ैसला था."
बाइडन का बचाव करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "बाइडन की आलोचना हो रही है कि उन्होंने सैनिकों और लोगों की वापसी की सही से तैयारी नहीं की थी. लेकिन आप वापसी की तैयारी कैसे कर सकते हैं जब इस प्रक्रिया से दो हफ़्ते पहले देश का राष्ट्रपति भाग जाता है और अफ़ग़ानिस्तान की सेना हथियार डाल देती है."
इसी इंटरव्यू में पाकिस्तान पर तालिबान की मदद के आरोपों का जवाब देते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि अगर यह मान लिया जाए कि पाकिस्तान ने अमेरिका के ख़िलाफ़ तालिबान की मदद की तो इसका मतलब यही होगा कि पाकिस्तान अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों से ज़्यादा ताक़तवर है.
इमरान ने आगे कहा कि क्या पाकिस्तान इतना ताक़तवर है कि उसने मामूली हथियारों से लैस 60-65 हज़ार लड़ाकों को इस क़ाबिल बना दिया कि वो बेहतरीन आधुनिक हथियारों से लैस सेना को हराने में सफल हो गए.
तालिबान की मदद के आरोप को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक साज़िश क़रार देते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "यह हमारे ख़िलाफ़ एक प्रोपगैंडा है जो सबसे पहले अफ़ग़ान सरकार ने शुरू किया ताकि वो अपनी अयोग्यता और भ्रष्टाचार को छुपा सकें. अफ़ग़ान सरकार एक कठपुतली सरकार थी जिसका वहां की अवाम ज़रा भी सम्मान नहीं करती थी."
इमरान ख़ान ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा, "भारत ने अशरफ़ ग़नी सरकार में बहुत निवेश किया लेकिन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस प्रोपगैंडा का कोई तार्किक आधार नहीं है. पाकिस्तान की 22 करोड़ जनता के लिए कुल बजट 50 अरब डॉलर है. यह कैसे संभव है कि हम चरमपंथियों की मदद कर सकते हैं, जो अमेरिका पर हावी हो गए. वो भी एक ऐसी जंग में जहां अमेरिका ने 20 सालों में दो खरब डॉलर झोंक दिए. इसलिए यह सिर्फ़ हमारे ख़िलाफ़ एक दुष्प्रचार है."
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