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अफ़ग़ानिस्तान: काबुल में पाकिस्तान विरोधी रैली, तालिबान ने हवा में चलाई गोलियाँ
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक़ शहर की सड़कों पर इस समय विरोध मार्च निकाला जा रहा है.
इस विरोध प्रदर्शन में अफ़ग़ान महिलाएँ और नौजवान अपने अधिकारों की मांग करने के साथ-साथ पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगा रहे हैं.
काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मुदस्सर मलिक के मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों ने 'अल्लाहू अकबर', 'हमें एक ख़ुदमुख़्तार मुल्क चाहिए', 'हमें पाकिस्तान की कठपुतली सरकार नहीं चाहिए', 'पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान छोड़ो' जैसे नारे लगाए.
ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तालिबान लड़ाके प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हवा में फ़ायरिंग कर रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी ने बताया, "काबुल में इस समय विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. लगभग 1000 पुरुष और महिलाएं इसमें इकट्ठा हुए हैं. वे पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान ने पंजशीर में तालिबान का समर्थन किया है. प्रदर्शनकारियों में कुछ आईएसआई चीफ़ की काबुल यात्रा का भी ज़िक्र कर रहे हैं. कुछ महिलाओं के अधिकारों की भी बात कर रहे हैं. जिस जगह पर ये विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहां तालिबान के लड़ाके भी मौजूद हैं."
आह्वान
सोमवार रात काबुल से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कुछ वीडियो में लोगों को 'राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा ज़िंदा रहो' और पाकिस्तान विरोधी नारे लगाते हुए सुना जा सकता है.
अहमद मसूद ने सोमवार को एक ऑडियो संदेश भेजकर अफ़ग़ान लोगों से पूरे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ख़िलाफ़़ एक संयुक्त राष्ट्रीय विद्रोह शुरू करने का आह्वान किया.
मसूद ने काबुल और मज़ार-ए-शरीफ़ में महिलाओं के विरोध को इस प्रतिरोध का उदाहरण बताया.
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के बाहर तालिबान विरोधी प्रदर्शनों की भी प्रशंसा की.
काबुल में हाल के दिनों में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
कुछ लोगों ने अफ़ग़ानिस्तान के झंडे को हटाने का विरोध किया है और हाल के दिनों में महिलाओं ने विभिन्न शहरों में अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन भी किया है.
बल्ख़ प्रांत की राजधानी मज़ार-ए-शरीफ़ में सोमवार को महिलाओं के एक समूह ने अपने अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग को लेकर रैली की थी.
प्रदर्शनकारियों ने बल्ख़ के प्रांतीय प्रशासन भवन के सामने प्रदर्शन किया और मांग की कि तालिबान उनकी सरकार में अफ़ग़ान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करें.
रैली में भाग लेने वालों में से एक व्यक्ति ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि हालाँकि मार्च शांतिपूर्ण था, तालिबान के सदस्यों ने उन्हें और पत्रकारों को मारने की धमकी दी.
आईएसआई चीफ़ का काबुल दौरा
मंगलवार को काबुल की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के चीफ़ की काबुल यात्रा का मुद्दा भी उठा रहे थे.
आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद अफ़ग़ानिस्तान में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच शनिवार को काबुल गए थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पाकिस्तान के 'ऑब्ज़र्वर' अख़बार के हवाले से बताया था कि हमीद के नेतृत्व में पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भावी तालिबान सरकार से बातचीत करने पहुंचा था.
पाकिस्तानी मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक़ आईएसआई चीफ़ की तालिबान के कमांडरों और नेताओं से मुलाक़ात हुई थी.
सरकार गठन की तारीख़ आगे बढ़ा रहा है तालिबान
पाकिस्तान पर तालिबान को सैन्य मदद देने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है.
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के बाद आईएसआई प्रमुख का ये पहला काबुल दौरा था.
तालिबान लगातार सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसकी तारीख़ आगे बढ़ती जा रही है.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया है कि सरकार के गठन में कुछ समय और लगेगा.
(कॉपी - विभुराज)
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