शी जिनपिंग की चेतावनी, चीन को आंखें दिखाई तो भुगतना होगा खामियाज़ा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीनी लोगों ने एक "नई दुनिया" बनाई है और वो अब किसी से दबेगा या झुकेगा नहीं.

उन्होंने विदेशी ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वो चीन को आंख दिखाने की कोशिश करेंगे तो उन्हें भारी नुक़सान होगा.

शी जिनपिंग ने ये बातें कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 सालों के मौक़े पर आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान की.

इस मौक़े पर चीन के प्रसिद्ध तियनानमेन स्क्वॉयर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विदेशी ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि "चीन को डराने की हिम्मत करने वाले को 1.4 अरब चीनी लोगों की ग्रेट वॉल ऑफ़ स्टील यानी फौलादी ताकत का सामना करना होगा."

उन्होंने कहा, "चीन अब किसी से दबेगा नहीं. चीन अब किसी भी विदेशी ताक़त को यह अनुमति नहीं देगा कि वो हमें आँख दिखाये, हम पर दबाव बनाये या हमें अपने आधीन करने का प्रयास करे."

उन्होंने कहा, "चीनी लोग न्यायप्रिय हैं और वो हिंसा से कतई नहीं डरते. चीन ऐसा देश है जिसे अपनी संप्रभुता पर गर्व है और खुद पर भरोसा है. चीनी लोगों को कभी न कोई डरा सका है, न कोई उन्हें अपने अधीन कर सका है और कभी कोई दूसरा देश चीनियों पर शासन नहीं कर सका है. ये न तो कभी इतिहास में हुआ है, न आज होगा और न ही आने वाले वक़्त में हम ऐसा होने देंगे."

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल

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दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बना चीन

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 सालों के दौरान चीन दुनिया की सबसे बड़ी दूसरी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है.

100 से कम लोगों की सदस्यता से शुरु हुई चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आज 9.2 करोड़ सदस्य हैं. शुरुआती दौर में कम्युनिस्ट पार्टी को पड़ोसी रूस से आर्थिक और दूसरी तरह की सहायता हासिल हुई.

वीडियो कैप्शन, कुछ पश्चिमी देशों ने चीन के वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं.

पार्टी की कमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में आने के बाद पार्टी ने समाज पर नियंत्रण को और तेज़ कर दिया है. बड़े पैमाने पर लोगों पर नज़र रखी जा रही है और सूचना के प्रवाह पर भी रोक है.

लेकिन अब पार्टी को बाहरी ताकतों से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है, "अमेरिकी नेतृत्व को इस फैलती निरंकुशता का सामना करना होगा, चीन जिस तरह से अमेरिका का प्रतिद्वंदी बनकर उभरने की कोशिश कर रहा है उसे इस बात का भी सामना करना पड़ेगा."

चीनी नेतृत्व इन वैश्विक चुनौतियों का सामना किस तरह करेगा यही आने वाले समय में उसकी दिशा तय करेगा.

कॉपी- मानसी दाश

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