कोरोना वायरस: चीन के मामले में बाइडन का रुख़ ट्रंप से अलग क्यों नहीं?

अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने ख़ुफ़िया एजेंसियों को आदेश दिया है कि वो 90 दिनों में जानकारी जुटाए कि कोरोना वायरस आख़िर किस तरह इंसानों में फैला.

जाँच के इस आदेश के बाद आए पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को पढ़कर ऐसा लगा मानो वे कह रहे हों, 'मैंने तो पहले ही कहा था.'

अपने बयान में ट्रंप ने कहा, "अब सभी मान रहे हैं कि मैं सही था, जब मैंने पहले ही कहा था कि वूहान कोविड-19 का स्रोत है. मेरे लिए ये शुरुआत से ही साफ़ था लेकिन मेरी बहुत तीखी आलोचना की जाती रही. अब सभी कह रहे हैं कि मैं सही था. धन्यवाद."

ट्रंप और उनके समर्थक बहुत पहले से दावा करते रहे हैं कि कोरोना वायरस चीन की लैबोरेट्री से बाहर आया लेकिन इन दावों को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया गया था कि यह ट्रंप और उनका समर्थन करने वाले कंज़र्वेटिव मीडिया की मनगढंत कहानी है.

अमेरिका में मीडिया मोटे तौर पर दो धड़ों में बँटा है, लिबरल मीडिया को डेमोक्रेट्स का हामी और कंज़र्वेटिव मीडिया को रिपब्लिकंस का समर्थक माना जाता है, इन दोनों धड़ों के बीच कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर बहुत तीखी बहस चलती रही है.

वायरस की थ्योरी

अभी तक मिली जानकारियों के मुताबिक़ ये वायरस चीन के वूहान से फैलना शुरू हुआ. इसके फैलने की दो संभावित वजहें गिनाईं जाती रही हैं.

पहला कि ये वायरस किसी तरह संक्रमित जानवर से इंसान तक पहुँचा, और दूसरा कि ये वूहान की लैब से दुनिया भर में फैला.

पहले भी ट्रंप पर ऐसे आरोप लगे थे कि वो कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में अपनी नाकामी का ठीकरा चीन पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और उनके बयानों को राजनीतिक हथकंडे के रूप में देखा गया.

ट्रंप के बारे में ये भी याद दिलाना ज़रूरी है कि उन पर लगातार झूठ बोलने, ग़लत जानकारी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. यहां तक कि ट्विटर ने उनका अकाउंट हमेशा के लिए बंद कर दिया.

ट्रंप आज तक कहते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में भारी धांधली हुई लेकिन इसे लेकर उन्होंने कोई सुबूत पेश नहीं किए.

बाइडन की घोषणा

कोरोना वायरस फैलने की जाँच की अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जाँच रिपोर्ट के बाद हुई है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट अप्रैल महीने के अंत में आई थी.

उस रिपोर्ट की तीखी आलोचना हुई थी क्योंकि उस रिपोर्ट में ऐसी कोई नई बात नहीं थी जिसके बारे में पहले से पता नहीं था. सवाल पूछे गए कि आख़िर इतना वक़्त और संसाधन ख़र्च करने की ज़रूरत ही क्या थी जब रिपोर्ट में कोई नई बात नहीं निकली.

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया था कि ये नहीं पता लगाया जा सकता कि चीन में इंसान इस वायरस से कैसे संक्रमित हुए लेकिन सभी सुबूतों से इशारे मिलते हैं कि ये वायरस जानवरों से आया, और इसका निर्माण नहीं किया गया. और ये भी कि ये शायद चमगादड़ों में पाया जाता है.

आरोप लगे कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट पर चीन का असर था. चीन ने सभी आरोपों से इनकार किया.

पहले भी ट्रंप डब्ल्यूएचओ पर चीन के असर में काम करने का आरोप लगाते रहे थे और उनके नेतृत्व में अमरीका डब्ल्यूएचओ से बाहर आ गया था. लेकिन बाइडन राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका को फिर डब्ल्यूएचओ में लेकर आए.

अमेरिका और 13 दूसरे देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट पर चिंता जताई गई, कहा गया कि रिपोर्ट को पारदर्शी और स्वतंत्र होना चाहिए. https://

ट्रंप ने लगाए थे ऐसे ही आरोप

पिछले साल जब कोरोना वायरस अमरीका में कहर ढा रहा था तब रिपब्लिकंस का समर्थन करने वाले कंज़र्वेटिव मीडिया में ऐसे आरोप लगने लगे थे कि हो सकता है कि इस वायरस का निर्माण चीन के एक लैब में एक हथियार के तौर पर हुआ हो.

मीडिया के एक बड़े हिस्से और कई वैज्ञानिकों ने इसे 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' बताकर ख़ारिज कर दिया था.

17 फ़रवरी को न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में इन आरोपों को 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' बताया गया जिसका कोई सुबूत नहीं था और जिसे वैज्ञानिकों ने ख़ारिज कर दिया था.

30 अप्रैल को अमरीका के डॉयरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस की ओर से कहा गया कि खु़फ़िया बिरादरी वैज्ञानिक सोच से सहमत है कि कोरोना वायरस का निर्माण इंसान ने नहीं किया.

उधर एक मई को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने ऐसा कुछ देखा है जो उन्हें विश्वास दिलाता है कि ये वायरस वूहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी में पैदा हुआ. इस पर ट्रंप ने कहा, "हाँ, मैंने देखा है."

इस पर ट्रंप की मीडिया में ख़ासी आलोचना हुई और आरोप लगे कि ऐसे ग़लत बयानों से कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई कमज़ोर हो रही है.

नेशनल जियोग्राफ़िक को दिए गए एक इंटरव्यू में अमेरिका की शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार एंथोनी फ़ाउची ने ट्रंप के बयान को ख़ारिज करते हुए कहा कि जो इशारे मिले हैं उनसे पता चलता है कि ये वायरस प्रकृति में पला-बढ़ा और इंसान तक पहुँचा.

फिर अब क्या बदल गया

सवाल उठ रहे हैं कि आख़िर जो बाइडन वायरस की उत्पत्ति की जाँच क्यों करवाना चाह रहे हैं, जब पहले वैज्ञानिक और जानकार इसे 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' बताकर ख़ारिज कर चुके हैं.

कुछ लोग इसे डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से जोड़कर देख रहे हैं जिससे अमरीका सहित कई देश असंतुष्ट थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये अभी साफ़ नहीं है कि क्या बाइडन का ये क़दम कुछ वैज्ञानिकों की सोच में बदलाव का नतीजा है या फिर उन पर रिपब्लिकन पार्टी का दबाव है, बाइडन पर आरोप लगता है कि वे 'चीनी साज़िश' की बात को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.

हाल ही में डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने वायरस की उत्पत्ति पर दिए गए अपने पुराने बयान से उलट कहा कि चीन में जो कुछ हुआ, उसकी जाँच जारी रखी जानी चाहिए.

माना जा रहा है कि हाल में आई मीडिया रिपोर्टों का भी असर रहा होगा जिसने बाइडन को ऐसा रुख़ अपनाने के लिए प्रेरित किया होगा.

'वॉल स्ट्रीट जरनल'की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के आख़िरी दिनों में माइक पॉम्पियो के नेतृत्व वाले स्टेट डिपार्टमेंट ने एक फ़ैक्ट-शीट जारी की थी जिसमें कहा गया कि साल 2019 की सर्दियों में चीन के वूहान लैब में कई रिसर्चर बीमार हो गए थे और उनके रोग के लक्षण कोरोना के लक्षणों से मेल खाते थे.

'वाल स्ट्रीट जर्नल'की एक और रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2012 में छह खनिक चमगादड़ों से भरे एक खदान में गए थे जिसके बाद उन्हें एक रहस्यमय रोग हो गया था और तीन खनिकों की मौत हो गई थी.

जो बाइडन ने अपने 26 मई के बयान में कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद मार्च में उन्होंने कोविड की उत्पत्ति को लेकर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा था और ये रिपोर्ट उन्हें इसी महीने मिली, जिसके बाद उन्होंने ख़ुफ़िया जाँच कराने का फ़ैसला लिया.

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