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कोरोना से भी बड़ी चुनौती बनता ब्लैक फ़ंगस, ठीक होने के बाद करता है हमला
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत अभी भी कोरोना महामारी की दूसरी लहर से पूरी तरह उबर नहीं सका है. बीते दो सप्ताह से कोरोना संक्रमण के मामलों में भले ही कमी आई हो लेकिन अब भी हर रोज़ संक्रमण के दो लाख से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं और मरने वालों की संख्या भी तीन हज़ार से चार हज़ार के बीच है. जानकार कोरोना महामारी की तीसरी लहर को लेकर भी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं.
इन सबके बीच भारत में ब्लैक फ़ंगस के मामले भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
भारत में जानलेवा ब्लैक फ़ंगस के 8800 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं.
आमतौर पर इस संक्रमण को म्यूकरमायकोसिस कहा जाता है. जिसमें मृत्यु दर क़रीब पचास फ़ीसद है. जबकि कई ऐसे मरीज़ हैं जिनकी आंख निकालने के बाद ही उनकी ज़िंदगी बचायी जा सकी.
लेकिन हाल के महीनों में भारत में ऐसे हज़ारों मामले सामने आए हैं जिसमें कोविड19 से ठीक हो चुके और ठीक हो रहे मरीज़ इससे प्रभावित हुए हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि इसका संबंध कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाले स्टेरॉयड से है. इसमें भी मधुमेह रोगियों को इससे विशेष तौर पर ख़तरा है.
कई डॉक्टरों से जब बीबीसी ने इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि - ऐसा लगता है कि ब्लैक फ़ंगस कोविड19 से ठीक होने के 12 से 18 दिनों के बाद शरीर पर हमला कर रहा है.
देश में ब्लैक फ़ंगस के आधे से अधिक मामले पश्चिमी राज्य गुजरात और महाराष्ट्र में दर्ज किये गए हैं. इसके अलावा कम से कम 15 अन्य राज्यों में भी आठ सौ से नौ सौ मामले सामने आए हैं.
तेज़ी से बढ़ते फ़ंगस इंफ़ेक्शन के कारण भारत के 29 राज्यों को इस बीमारी को महामारी घोषित करने के लिए कहा गया है.
डॉक्टरों का कहना है कि देश भर में इस बीमारी से पीड़ित मरीज़ों के इलाज के लिए जिन नए वॉर्ड की व्यवस्था की गई है वे तेज़ी से भरते जा रहे हैं.
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के 1100 बिस्तरों वाले महाराजा यशवंतराव अस्पताल में एक सप्ताह पहले तक जहां ब्लैक फ़ंगस के मरीज़ों की संख्या आठ थी वहीं बीते शनिवार को इनकी संख्या बढ़कर 185 हो गई थी.
अस्पताल के मेडिसीन विभाग के प्रमुख वीपी पांडेय ने बीबीसी को बताया कि इस बीमारी के कारण भर्ती होने वाले 80 फ़ीसद मरीज़ों को तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है.
डॉक्टर पांडेय का कहना है कि "अस्पताल ने म्यूकरमायकोसिस के रोगियों के इलाज के लिए कुल 11 वॉर्ड में 200 बेड की व्यवस्था की है."
उनका कहना है कि "मरीज़ों की संख्या में इस तरह की बढ़ोत्तरी अप्रत्याशित थी."
वह कहते हैं कि एक साल पहले तक इसके इक्का-दुक्का मामले ही सामने आए थे.
वो मानते हैं कि अकेले इंदौर में इस बीमारी के कम से कम चार सौ मामले थे.
डॉ. पांडेय के अनुसार, "ब्लैक फ़ंगस संक्रमण अब कोविड19 की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है. अगर मरीज़ों को सही समय पर सही इलाज नहीं मिला तो मृत्युदर 94 फ़ीसद तक हो सकती है. इस बीमारी का इलाज भी महंगा है और दवाइयों की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है."
डॉक्टरों का कहना है कि एम्फ़ोटेरिसन बी या एम्फ़ो-बी एक एंटी-फ़ंगल एंट्रावेनस इंजेक्शन है जिसे ब्लैक फ़ंगस के मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. उन्हें यह इंजेक्शन आठ सप्ताह तक हर रोज़ दिया जाना चाहिए. दवा के दो रूप मौजूद है- स्टैंडर्ड एम्फोटेरिसिन बी डीऑक्सीकोलेट और लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन.
डॉ. पांडेय बताते हैं कि उन्होंने शहर के चार अस्पतालों से 201 मरीज़ों का डेटा जमा किया है.
इनमें से ज्यादातर मरीज़ कोविड19 से ठीक हो चुके थे और पुरुष थे. इनमें से अधिकतर मरीज़ ऐसे थे जिन्हें कोविड19 के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दिया गया था. इसके अलावा इनमें से अधिकांश मरीज़ों को डायबिटीज़ की शिकायत भी थी.
चार भारतीय डॉक्टरों द्वारा किये गए एक अन्य शोध में 100 ऐसे लोगों पर अध्ययन किया गया जिन्हें कोरोना संक्रमण हुआ था और बाद में म्यूकरमायकोसिस संक्रमण. इस शोध में पाया गया कि इनमें 79 पुरुष थे जिन्हे ब्लैक फ़ंगस संक्रमण हुआ. जबकि 89 ऐसे लोग थे जिन्हें मधुमेह की शिकायत थी.
मुंबई के दो अस्पतालों में 45 ब्लैक फ़ंगस संक्रमित मरीज़ों पर हुए अध्ययन में पाया गया है कि सभी संक्रमित मधुमेह से पीड़ित थे या फिर जब उन्हें भर्ती किया गया तो उनमें मधुमेह की शिकायत का पता चला.
ब्लैक फ़ंगस के कई मरीज़ों का इलाज कर चुके नेत्र सर्जन डॉ. अक्षय नायर ने बीबीसी को बताया कि ब्लैक फ़ंगस के किसी भी मरीज़ का शुगर लेवल सामान्य नहीं होता है.
म्यूकरमायकोसिस क्या है?
म्यूकरमायकोसिस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है. ये म्यूकर फफूंद के कारण होता है जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्ज़ियों में पनपता है.
डॉक्टर नायर कहते हैं, "ये फंगस हर जगह होती है. मिट्टी में और हवा में. यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी ये फंगस पाई जाती है."
ये फंगस साइनस, दिमाग़ और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों या बेहद कमज़ोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में ये जानलेवा भी हो सकती है.
म्यूकरमायकोसिस के लक्षण
म्यूकरमायकोसिस में ये लक्षण पाए जाते हैं - नाक बंद हो जाना, नाक से ख़ून या काला तरल पदार्थ निकलना, आंखों में सूजन और दर्द, पलकों का गिरना, धुंधला दिखना और आख़िर में अंधापन होना. मरीज़ के नाक के आसपास काले धब्बे भी हो सकते हैं.
डॉक्टर्स बताते हैं कि अधिकतर मरीज़ उनके पास देर से आते हैं, तब तक ये संक्रमण घातक हो चुका होता है और उनकी आंखों की रोशनी जा चुकी होती है. ऐसे में डॉक्टर्स को संक्रमण को दिमाग़ तक पहुंचने से रोकने के लिए उनकी आंख निकालनी पड़ती है.
कुछ मामलों में मरीज़ों की दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है. कुछ दुर्लभ मामलों में डॉक्टरों को मरीज़ का जबड़ा भी निकालना पड़ता है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके.
इसके इलाज़ के लिए एंटी-फंगल इंजेक्शन की ज़रूरत होती है जिसकी एक खुराक़ की कीमत 3500 रुपये है. ये इंजेक्शन आठ हफ्तों तक हर रोज़ देना पड़ता है. ये इंजेक्शन ही इस बीमारी की एकमात्र दवा है.
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