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चीन के रॉकेट का बड़ा टुकड़ा गिरने वाला है पृथ्वी पर
- Author, जॉनाथन एमस
- पदनाम, बीबीसी विज्ञान संवाददाता
चीन के एक रॉकेट का मलबा पृथ्वी की तरफ़ बढ़ रहा है और इस पर कोई नियंत्रण नहीं है.
ये मलबा इस हफ़्ते पृथ्वी पर गिर सकता है, लेकिन कहाँ इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.
चीनी रॉकेट लॉन्ग मार्च 5बी को 29 अप्रैल को चीन के हाइनान द्वीप से प्रक्षेपित किया गया था, जो चीन के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के प्रमुख मॉड्यूल को पृथ्वी की निचली कक्षा की ओर ले जा रहा था.
लेकिन, अब इस रॉकेट के मलबे के पृथ्वी पर गिरने को लेकर चिंता बनी हुई है. इसका वज़न क़रीब 18 टन है और दशकों में पृथ्वी के वायुमंडल में अनियंत्रित होकर गिरने वाली ये सबसे बड़ी वस्तु है.
इस पर चीन ही नहीं बल्कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की भी नज़र बनी हुई है.
गुरुवार को अमेरिका ने कहा कि उसकी इस रॉकेट पर नज़र है लेकिन फिलहाल इसे नष्ट करने की योजना नहीं है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा, "हम आशा करते हैं कि ये उस जगह गिरेगा जहाँ किसी को कोई नुक़सान ना हो. उम्मीद है कि समुद्र में या ऐसी ही किसी जगह पर."
पृथ्वी पर कब तक पहुँचेगा
अंतरिक्ष के कचरे पर काम करने वाले कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस रॉकेट के रविवार तक पृथ्वी पर पहुंचने की संभावना है. हालांकि, ऐसे मामलों में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता.
29 अप्रैल को प्रक्षेपण के बाद से लॉन्ग मार्च-4बी लगातार नीचे गिर रहा है. रॉकेट का मलबा कितनी तेज़ी से नीचे गिरता है ये ऊंचाई पर हवा के घनत्व और खिंचाव पर निर्भर करता है. लेकिन, इस सबकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.
आमतौर पर रॉकेट का मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर जल जाता है. हालांकि, उसका भी कुछ हिस्सा बचने की संभावना होती है जो पृथ्वी की सतह तक पहुंचता है. अमूमन ये टुकड़े बहुत छोटे होते हैं.
एक साल पहले पाइप के आकार का रॉकेट का ऐसा ही मलबा अफ़्रीका में आइवरी तट पर पहुंचा था.
रॉकेट के मलबे से किसी को नुकसान पहुंचने की संभावना बहुत कम होती है. इसकी वजह ये नहीं है कि पृथ्वी के अधिकतर हिस्से में पानी है बल्कि ये है कि ज़मीन का बड़ा हिस्सा निर्जन है.
चीन पर लापरवाही का आरोप
चीन ने इससे इनकार किया है कि इतनी बड़ी वस्तु की अनियंत्रित वापसी में लापरवाही बरती गई है.
चीनी मीडिया ने रॉकेट के मलबे से नुक़सान पहुंचने की बात कहने वालीं पश्चिमी रिपोर्टों को बढ़ा-चढ़ाकर किया गया प्रचार बताया है. साथ ही संभावना जताई है कि रॉकेट अंतरराष्ट्रीय समुद्र में कहीं गिरेगा.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने वायुमंडल विशेषज्ञ सांग ज़ोनपिंग के हवाले से लिखा है कि चीन का स्पेस मॉनिटरिंग नेटवर्क इस पर कड़ी निगरानी रखेगा और नुक़सान को लेकर ज़रूरी उपाय करेगा.
लेकिन, अमेरिका में हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स में जानेमाने एस्ट्रोफिजिसिस्ट जॉनाथन मैकडावल कहते हैं, "इससे चीन की छवि पर बुरा असर पड़ा है. ये वाकई एक लापरवाही की तरह देखा जाता है."
"इस रॉकेट का दोबारा प्रक्षेपण किया गया है. आइवरी तट पर पड़ा मलबा पिछले रॉकेट का ही है जो इस रॉकेट की तरह ही था. 1979 के स्काइलैब के बाद से अब इन दोनों घटनाओं में इतनी बड़ी वस्तु को अनियंत्रित तरीक़े से पृथ्वी में प्रवेश करने के लिए जानबूझकर छोड़ दिया गया है."
अमेरिकी स्पेस स्टेशन स्काइलैब के टुकड़े 1979 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के ऊपर बिखर गए थे जिसने पूरे विश्व का ध्यान खींचा था.
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