You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
म्यांमार में 50 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद कई ज़िलों में मार्शल लॉ
म्यांमार में सेना ने कई ज़िलों में मार्शल लॉ लगा दिया है. रविवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद ऐसा किया गया है.
फरवरी में बग़ावत के बाद सेना ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया था और आंग सान सू ची को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
रविवार को देश के कई इलाक़ों पर पुलिस और सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई, जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है.
फरवरी के बाद एक दिन में सबसे अधिक संख्या में लोग रविवार को मारे गए. सबसे ज़्यादा मौतें यंगून में हुई हैं.
प्रदर्शनकारी सू ची की रिहाई की मांग कर रहे हैं. सू की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की नेता हैं. उनकी पार्टी में नवंबर में हुए चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी.
सेना ने एनएलडी के अधिकतर नेताओं को हिरासत में ले लिया है. सेना का आरोप है कि मतदान में धाँधली की गई है. लेकिन सेना ने इस बारे में कोई सबूत नहीं दिए हैं.
एक फरवरी को हुए बग़ावत के बाद से सू ची को किसी अज्ञात जगह पर रखा गया है. सेना पर उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि सभी आरोप मनगढ़ंत हैं.
सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया जाना था, लेकिन इंटरनेट की समस्या के कारण वर्चुअल सुनवाई रद्द कर दी गई.
चीन के कई व्यापारिक ठिकानों पर हमले के बाद यंगून के दो ज़िलों में मार्शल लॉ लगाया गया. सोमवार को यंगून के कई अन्य इलाक़ों और मंडालय में भी मार्शल लॉ लगा दिया गया है.
जहाँ- जहाँ मार्शल लॉ लगा है, वहाँ प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सैन्य अदालत में मामले चलेंगे.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चीन म्यांमार में सेना का समर्थन कर रहा है. लेकिन चीनी व्यापारिक ठिकानों पर हमले के पीछे कौन है, इसका पता नहीं चल पाया है.
रविवार को सबसे ज़्यादा मौतें यंगून में हुई हैं. सेना ने जब से सत्ता संभाली है, तब से विरोध प्रदर्शनों में 120 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. ये जानकारी असिस्टेंस एसोसिएशन फ़ॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स ने दी है.
सोमवार को मंडालय और देश के अन्य इलाक़ों में विरोध प्रदर्शनों की ख़बर है. मिंग्यान और ऑन्गलान में सुरक्षाकर्मियों की गोलीबारी में कुछ लोगों के हताहत होने का समाचार है.
सू ची पर आरोप क्या हैं
एनएलडी की नेता आंग सान सू ची पर भय और डराने के साथ-साथ अवैध रूप से रेडियो उपकरण रखने और कोविड नियमों के उल्लंघन के भी आरोप लगाए गए हैं.
अगर सू ची के ख़िलाफ़ दोष सिद्ध हो जाता है, तो उन्हें कई वर्ष जेल में बिताने पड़ सकते हैं, साथ ही उन्हें चुनाव लड़ने के अयोग्य भी ठहराया जा सकता है.
पिछले सप्ताह सेना ने उन पर ये भी आरोप लगाया था कि सू ची ने ग़ैर क़ानूनी रूप से 11 किलो सोना और छह लाख डॉलर स्वीकार किए थे.
लेकिन एनएलडी इस दावे का खंडन करती है.
क्रांति की अपील
बेदखल किए गए कुछ सांसदों ने पिछले महीने की बग़ावत को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. ये नेता छिप गए हैं और उन्होंने एक नया ग्रुप बनाया है, जिसे कमेटी फ़ॉर रिप्रजेंटिंग द यूनियन पार्लियामेंट (सीआरपीएच) का गठन किया है.
अपने पहले सार्वजनिक भाषण में उनके नेता म्हान विन खैंग थान ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे सेना की कार्रवाई से बचें. उन्होंने प्रदर्शनों को क्रांति की संज्ञा दी.
उन्होंने कहा, "यह देश का सबसे काला क्षण है और वह क्षण क़रीब है, जब सुबह होगी. क्रांति की जीत होगी."
सेना सीआरपीएच को ग़ैर क़ानूनी बताती है और उसने चेतावनी दी है कि अगर कोई इस ग्रुप के साथ काम करेगा, तो उस पर देशद्रोह का मुक़दमा चलेगा.
पृष्ठभूमि
एक फ़रवरी को हुए सैन्य-तख़्तापलट के बाद से ही म्यांमार विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है.
एक फ़रवरी को म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को गिरफ़्तार करने के बाद सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.
एनएलडी को पिछले साल हुए चुनावों में बड़ी जीत हासिल हुई थी लेकिन सेना ने कहा कि चुनाव में फ़र्जीवाड़ा हुआ था.
तख्तापलट की अनुवाई करने वाले सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग ने देश में एक साल का आपातकाल लगा दिया है.
सेना ने तख्तापलट को ये कहते हुए सही ठहराया है कि बीते साल हुए चुनावों में धांधली हुई थी. इन चुनावों में आंग सान सू ची का पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने एकतरफ़ा जीत हासिल की.
सैन्य तख़्तापलट के बाद सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग म्यांमार में सबसे ताक़तवर व्यक्ति बन चुके हैं. 64 वर्षीय ह्लाइंग इसी साल जुलाई के महीने में रिटायर होने वाले थे. लेकिन आपातकाल की घोषणा के साथ ही म्यांमार में ह्लाइंग की पकड़ काफ़ी मज़बूत हो गई है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)