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म्यांमार तख़्तापलट: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर चलाई रबर बुलेट
म्यांमार की राजधानी नेपीडाव में सेना के लगाए प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने रबर की गोलियां चलाई हैं.
लोकतंत्र बहाल करने की मांग को लेकर यहां हज़ारों लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए उन पर पानी की बौछारें और आंसू गैस भी छोड़ी गईं. बीसीसी बर्मी सेवा के मुताबिक़ विरोध प्रदशनों के दौरान कम से कम दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बर है.
सोमवार को नए प्रतिबंध लागू होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन मंगलवार को लगातार चौथे दिन भी चलता रहा.
सैन्य नेता मिन ऑन्ग ह्लाइंग की चेतावनी के बाद कि कोई भी क़ानून से बड़ा नहीं है, सभी तरह के बड़े सार्वजनिक समारोहों पर रोक के अलावा कई शहरों में नाइट कर्फ्यू भी लगाया गया है.
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए किसी सीधे ख़तरे की बात नहीं की, हालाँकि उनके भाषण के बाद बर्मा के सरकारी टीवी पर एक प्रसारण में कहा गया कि क़ानून तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ "कार्रवाई की जानी चाहिए."
म्यांमार में प्रदर्शनकारी चुनी हुई नेता आंग सान सू ची और नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी (एनएलडी) के वरिष्ठ नेताओं की रिहाई की माँग कर रहे हैं.
सेना द्वारा तख़्तापलट के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था जिसके बाद सेना ने देश में एक साल के आपातकाल की घोषणा कर दी है. सेना ने बिना किसी सबूत के दावा किया है कि बीते साल नवंबर में हुए चुनाव फर्जी थे.
कैसे बिगड़े हालात?
मंगलवार की सुबह, पुलिस ने नेपीडाव में प्रदर्शनकारियों को तितर0बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल शुरू किया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इसके बावजूद भीड़ ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और लोग "सैन्य तानाशाही समाप्त करो" के नारे लगाते रहे.
प्रदर्शनकारियों पर रबर की गोलियां चलाए जाने से पहले पुलिसबल ने हवा में फ़ायरिंग कर उन्हें चेतावनी भी दी.
एक स्थानीय निवासी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि पुलिस ने शुरुआत में "दो बार चेतावनी देते हुए आसमान की तरफ गोलियां चलाईं, फिर उन्होंने (प्रदर्शनकारियों पर) रबर की गोलियों से फ़ायर कर दिया."
बीबीसी बर्मी सेवा के अनुसार, एक मेडिकल अफ़सर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दो प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हैं, एक के सिर और दूसरे के सीने में चोट लगी है. हालांकि वो घायल कैसे हुए ये स्पष्ट नहीं है.
आपातकालीन सेवा से जुड़े एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने रबर की गोलियों से घायल तीन मरीज़ों का इलाज किया है. मरीज़ों को इलाज के लिए एक बड़े अस्पताल में ले जाया गया है.
कई अपुष्ट रिपोर्टों के मुताबिक़ कुछ पुलिस अधिकारियों ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ दिया है. कई इलाकों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड पार करने की भी इजाज़त दी है.
बीबीसी के दक्षिण पूर्व एशिया के संवाददाता जोनाथन हेड ने कहा कि यह स्पष्ट था कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए "कड़ा प्रयास" कर रहे थे. हालांकि उन्होंने कहा पुलिस ऐसे कदम नहीं उठा रही थी जो जानलेवा हो.
म्यांमार में 1988 और 2007 में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों में लोगों की मौत हुई थी.
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