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कोरोना वायरसः ब्रिटेन की सरकार ने चेताया, ऐसे रहें जैसे आपको कोविड हो गया है
- Author, निक ईयर्डले
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ब्रिटेन के लोगों से कहा जा रहा है कि वे इस तरह से व्यवहार करें जैसे कि उन्हें कोविड हो गया है.
यह सरकार की एक विज्ञापन मुहिम का हिस्सा है जिसका मकसद देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों से निबटना है.
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि लोगों को घर पर रहना चाहे और लापरवाही न बरतें.
शुक्रवार को पॉजिटिव टेस्ट आने के 28 दिन के भीतर 1,325 मौतें दर्ज की गईं जो कि अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है.
साथ ही संक्रमण के 68,053 नए मामले भी सामने आए हैं.
विज्ञापन कैंपेन
सरकारी सूत्रों का कहना है कि पुलिस का ज्यादा फोकस लोगों को नियमों को समझाने की बजाय इन्हें लागू कराने पर हो सकता है.
एक सूत्र ने बीबीसी को बताया, "एक दिन पहले 1,000 लोगों के मरने के साथ ही पहले के मुकाबले अब नियमों को सख्ती से मानना ज्यादा जरूरी हो गया है."
नए मामलों और मौतों के बढ़ने के साथ ही सरकार ने अपना विज्ञापन कैंपेन जारी कर दिया है.
इस कैंपेन को टेलीविजन, रेडियो, न्यूज़पेपर और सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
इंग्लैंड के चीफ मेडिकल ऑफिसर प्रोफेसर क्रिस विटी इस विज्ञापन में कहते हैं, "वैक्सीन भविष्य के लिए एक स्पष्ट उम्मीद देती हैं, लेकिन फिलहाल हम सभी को घर पर रहना चाहिए, एनएचएस को सुरक्षित रखिए और जिंदगियां बचाइए."
'घर पर ही रहिए'
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि हॉस्पिटल्स "महामारी की शुरुआत के बाद से अब सबसे ज्यादा दबाव में हैं. संक्रमण 'ख़तरे की घंटी' की दर से बढ़ रहा है और एनएचएस बेहद दबाव में है."
उनका यह बयान लंदन के मेयर सादिक़ खान के शुक्रवार को दिए उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना का फैलाव नियंत्रण से बाहर हो गया है और उन्होंने इसे राजधानी में 'बड़ी घटना' घोषित कर दिया.
इस तरह की घटना एक आपात स्थिति होती है जिसके लिए एक या सभी इमर्जेंसी सर्विसेज, एनएचएस या स्थानीय प्रशासन को खास इंतजाम करने होते हैं.
इसका मतलब है कि इमर्जेंसी सर्विसेज और हॉस्पिटल्स अपने सामान्य स्तर के रेस्पॉन्स की गारंटी नहीं दे सकते हैं.
हालांकि, सरकार एक बार फिर से 'घर पर ही रहिए' संदेश को आगे बढ़ा रही है, लेकिन कुछ पुलिसवालों को कोरोना वायरस पाबंदियों को तोड़ने के खिलाफ अपनाई गई एप्रोच की आलोचना सहनी पड़ी है.
सपोर्ट की जरूरत
नए राष्ट्रीय लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद दो महिलाओं को अपने घर से पांच मील दूर तक वॉक के लिए ड्राइव करके जाने के लिए बुधवार को 200 पाउंड का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया था. इसके बाद डर्बीशायर पुलिस ने कहा है कि वह इन पेनाल्टीज की समीक्षा करेगी.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की हेल्थ साइकोलॉजी की प्रोफेसर सुसैन मिशी कहती हैं, "लोगों को नए रेगुलेशंस का पालन करने के लिए ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है."
वे कहती हैं कि लोगों को सेल्फ-आइसोलेट करने में मदद देने के लिए सपोर्ट करना चाहिए न कि उन्हें सजा दी जानी चाहिए.
प्रोफेसर मिशी मौजूदा पाबंदियां बेहद ढीली हैं.
उन्होंने बताया, "जब आप आंकड़ों पर नजर डालते हैं तो दिखाई देता है कि करीब 90 फीसदी लोग नियमों का पालन कर रहे हैं, ऐसा तब है जबकि पहले से ज्यादा लोग बाहर भी दिखाई दे रहे हैं."
वायरस का नया वैरिएंट
हालांकि, वे कहती हैं कि मार्च के मुकाबले पाबंदियां कम सख्त हैं, ज्यादा लोगों को काम पर बाहर जाने की इजाजत है और बच्चों की नर्सरी ओपन हैं.
इसका मतलब है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खूब लोग आ-जा रहे हैं.
सरकार को सलाह देने वाले एक और वैज्ञानिक और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एडम कुचार्सकी कहते हैं कि चूंकि नया वैरिएंट ज्यादा जल्दी फैलता है, ऐसे में हम पहले के मुकाबले ज्यादा जोखिम में आ गए हैं.
उन्होंने कहा, "ऐसे में अगर पिछले साल के वसंत जितने दूसरों से कट जाने के स्तर पर पहुंच जाएं तब भी हम इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं हो सकते कि हमें पिछले साल जैसा असर नहीं दिखेगा."
इंग्लैंड, स्कॉटलैंड का ज्यादातर हिस्सा, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड लगातार सख्त राष्ट्रीय उपायों के तहत हैं और यहां ज्यादातर लोगों के लिए घरों पर रहने के आदेश हैं.
संक्रमण की दर
सरकार में कोरोना के लगातार फैलाव को लेकर काफी चिंता है. मंत्री भले ही लोगों की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि लोग नियमों का गंभीरता से पालन करें. ठीक ऐसा ही पिछले साल वसंत में था जब पहला लॉकडाउन लागू किया गया था.
प्रधानमंत्री ने लोगों को लापरवाही से बचने के लिए कहा है. उन्होंने कहा, "आपका नियमों का पालन करना पहले के मुकाबले अब कहीं ज्यादा अहम हो गया है."
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के हालिया आंकड़ों से पता चल रहा है कि लंदन में कोरोना वायरस संक्रमण की दर प्रति एक लाख लोगों में 1,000 से आगे निकल गई है.
राष्ट्रीय सांख्यिकीय दफ्तर के एक हालिया अनुमान के मुताबिक, लंदन के हर 30 में से एक शख्स को कोरोना वायरस है.
लंदन काउंसिल्स ने पूजा स्थलों को बंद करने का अनुरोध किया है. लंदन के बिशप सारा मुलेली ने कहा है कि चर्च को हालात की गंभीरता को समझना चाहिए.
इंटेंसिव केयर कैपेसिटी
लंदन में एक इमर्जेंसी डॉक्टर डॉ. सिमोन वाल्श ने बीबीसी को बताया कि लंदन के सभी हॉस्पिटल पिछले कुछ हफ्तों से मेजर इंसीडेंट मोड में काम कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ज्यादातर हॉस्पिटलों ने अपनी इंटेंसिव केयर कैपेसिटी को करीब तीन गुना बढ़ा लिया है. निश्चित तौर पर हमारे पास तीन गुना ज्यादा स्टाफ नहीं है, ऐसे में हमारे स्टाफ को उसी तरह से ड्यूटी पर लगाया गया है."
यूके के दूसरे हिस्सों में भी अस्पताल दबाव में हैं.
वेल्स में सीनियर एएंडई नर्स सारा फोगरासी ने कहा कि वे पिछले शनिवार को उस वक्त बेहद डर गई थीं जब रॉयल ग्लैमॉर्गन हॉस्पिटल में 13 एंबुलेंसों की कतार लग गई थी, जबकि यूनिट के पास इतनी क्षमता नहीं थी.
बर्मिंघम में पब्लिक हेल्थ के डायरेक्टर डॉ. जस्टिन वार्ने ने बताया कि वे शहर के हालात को लेकर बेहद चिंतित हैं.
अस्पतालों के अफसरों ने चेतावनी दी है कि उनके पास लगातार बढ़ रहे संक्रमण के मामलों के लोड से निबटने के लिए पर्याप्त संख्या में इंटेंसिव केयर नर्सें नहीं हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि क्रिसमस के दौरान दी गई ढील के बाद केसों में होने वाली बढ़ोतरी का पूरा असर अभी एनएचएस पर दिखाई नहीं दिया है.
वे कहते हैं, "आने वाले दिनों में तादाद और बढ़ेगी. अगर हम इसे रोकने में सफल नहीं हुए तो चीजें और खराब हो सकती हैं."
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