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नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर 25 फ़रवरी को फ़ैसला
भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर फ़ैसला 25 फ़रवरी को होगा.
नीरव मोदी के मामले की सुनवाई कर रहे लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट को बताया गया है कि हीरा व्यापारी एक पोंजी जैसी स्कीम के लिए ज़िम्मेदार है जिसकी वजह से भारत के पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में बहुत बड़ा ग़बन हुआ.
दक्षिण-पश्चिम लंदन के वांड्सवर्थ कारागार के एक कमरे से वीडियो लिंक के ज़रिए दो दिनों चली सुनवाई में पेशी के दौरान नीरव मोदी बढ़ी दाढ़ी में दिखे.
भारत सरकार की तरफ से इस मामले की पैरवी अदालत में ब्रिटेन की क्राउन अभियोजन सेवा (क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस) बहस कर रही है.
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने सुनवाई के दौरान धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गवाहों को धमकाने जैसे मुद्दों पर अपना फ़ोकस रखा.
सीपीएस की बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने कहा, "यह सीधा और बिल्कुल साफ़ है कि इन्होंने (नीरव मोदी ने) अपनी तीन साझेदार कंपनियों का उपयोग अरबों डॉलर का कर्ज़ लेने में किया जो कि पूरी तरह असुरक्षित था और जिसके लिए लेटर ऑफ़ क्रेडिट पूरी तरह से फर्जी व्यापार के लिए जारी किए गए थे."
ब्रिटेने में कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के कारण इस मामले की सुनवाई वीडियो लिंक के जरिए की गई.
मैल्कम ने कहा, "बचाव पक्ष का दावा है कि यह महज एक व्यावसायिक विवाद है, जबकि पोंजी जैसी योजना की तरफ इशारा करने के लिए कई सबूत हैं जहाँ नए लेटर ऑफ़ क्रेडिट का इस्तेमाल पुराने कर्ज़ को चुकता करने में किया गया."
सीपीएस ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि नीरव मोदी ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पीएनबी के लेटर ऑफ़ क्रेडिट के फर्ज़ी इस्तेमाल के लिए अपनी कंपनियों, डायमंड्स आर अस, सोलर एक्सपोर्ट और स्टेलर डायमंड्स का उपयोग किया.
मैल्कम ने अपने तर्क के दौरान पूर्व कर्मचारी के एक वीडियो के सबूतों की बात दोहराई जिसमें यह दावा किया गया था कि नीरव और शेल कंपनियों के नकली निदेशकों की ओर से उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है, जिन्हें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से शुरू की गई जाँच की वजह से मजबूरन भारत छोड़ना पड़ा.
उन्होंने जोर देकर कहा कि जस्टिस को केवल इस बात को देखने की आवश्यकता है कि इन आरोपों पर मुक़दमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया मामला है या नहीं.
नीरव मोदी के बचाव पक्ष की अगुवाई कर रहीं बैरिस्टर क्लारे मॉन्टगोमेरी ने अपने जवाबी तर्क में इन आरोपों के आधार को चुनौती दी क्योंकि इसमें ब्योरे की कमी है और कहा कि इसकी वजह से छोटे विवरणों पर ध्यान दिए बगैर यह मामले को बेहद व्यापक ब्रश यानी सामान्य तरीके के साथ पेश करेगा.
मोन्टगोमेरी ने बीते वर्ष भारतीय हाई कोर्ट के जज अभय थिप्से के दिए गए एक्सपर्ट साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि, "इसका उचित विश्लेषण किया जाना चाहिए कि इस अपराध को बैंक धोखाधड़ी के आरोपों के तहत क्यों नहीं लाया जा सकता, क्योंकि ऑपरेटिव धोखे का यहाँ कोई मामला नहीं है."
इसके साथ ही दो दिनों तक चली सुनवाई ख़त्म हो गई और जज सैमुएल गूज़ी ने कहा कि वो इस हाई प्रोफ़ाइल प्रत्यर्पण मामले में अपना फ़ैसला 25 फ़रवरी को देंगे. लिहाजा अब 25 फ़रवरी को नीरव मोदी को बताया जाएगा कि क्या उनका प्रत्यर्पण किया जाएगा और पीएनबी ग़बन मामले में भारत में उन पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलेगा?
मार्च 2019 में गिरफ़्तारी के बाद से वांड्सवर्थ कारागार में रह रहे नीरव मोदी को अभी इसी जेल में रहना होगा. नीरव मोदी को सेंट्रल लंदन में मेट्रो बैंक से गिरफ़्तार किया गया था जहाँ वह बैंक खाता खोलने गये थे.
25 फ़रवरी को फ़ैसले से पहले नीरव मोदी को एक बार फिर वीडियो लिंक के माध्यम से ही 28 दिनों की रिमांड की सुनवाई के लिए 5 फ़रवरी को पेश होना है.
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