अमेरिका में हिंसा: चीनी मीडिया ने कहा, 'कर्मों का फल, लोकतंत्र का बुलबुला फूट गया’

- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'द होल वर्ल्ड इज़ वॉचिंग!'
'पूरी दुनिया देख रही है.'
अमेरिका में साल 1968 में जब पुलिस ने वियतनाम युद्ध के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पीटा था तब प्रदर्शनकारियों ने यह नारा बुलंद किया था- 'द होल वर्ल्ड इज़ वॉचिंग!'
आज 2021 की शुरुआत में लगभग 53 साल बाद ये नारा जैसे जीवंत हो गया, भले ही परिदृश्य उलटा रहा हो.
ट्रंप समर्थकों ने वॉशिंगटन स्थित कैपिटल हिल यानी अमेरिका के संसद भवन में घुसकर उत्पात मचाया और लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार को चुनौती दी. ये सब कुछ पूरी दुनिया ने देखा.
दुनिया भर में 'लोकतंत्र का ध्वजवाहक' बनने के लिए उतावले अमेरिका में ऐसा होते देखकर सभी हैरान रह गए.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों और आम जनता ने अमेरिका की स्थिति को लेकर चिंता ज़ाहिर की.
अमेरिका में जो कुछ हुआ, उस पर दुनिया भर की मीडिया की नज़र है. अख़बारों से लेकर समाचार वेबसाइटों और सोशल मीडिया में इसे लेकर ख़ूब प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

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अमेरिका के कर्मों का फल: चीनी मीडिया
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर अमेरिका को लेकर एक तंज़ भरा लेख प्रकाशित किया गया है.
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट्स का हवाला देते हुए लिखा है कि- अमेरिका में जो कुछ हुआ, वो उसके ही कर्मों का फल है और उसका लोकतंत्र का बुलबुला फूट गया होगा.
ग्लोबल टाइम्स ने सोशल मीडिया यूज़र्स के पोस्ट को शेयर करते हुए कटाक्ष किया- जब हॉन्गकॉन्ग में विरोध प्रदर्शन हुए थे अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों के साहस की प्रशंसा की थी और प्रदर्शनों को 'ख़ूबसूरत नज़ारा' कहा था.
ग्लोबल टाइम्स की यह ख़बर राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल में चीन और अमेरिका के तनाव भरे रिश्तों की एक झलक भी दिखाती है.

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अमेरिका में अराजकता, लोकतंत्र क़ब्ज़े में
वहीं, अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने पहले पन्ने पर प्रकाशित लीड ख़बर का बेबाक शीर्षक दिया है- ट्रंप मॉब स्टॉर्म्स कैपिटल. यानी ट्रंप की उकसाई हुई भीड़ संसद भवन में घुसी.
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि भीड़ को विद्रोह और हिंसा के लिए भड़काया.
बीबीसी के न्यूयॉर्क संवाददाता निक ब्रायंट ने अख़बार का फ़्रंट पेज ट्वीट करते हुए लिखा है- वॉशिंगटन पोस्ट का ऐतिहासिक फ़्रंट पेज.
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निक ब्रायंट ने अमेरिका के न्यूयॉर्क डेली न्यूज़ अख़बार का फ़्रंट पेज भी ट्वीट किया है. न्यूयॉर्क डेली न्यूज़ ने फ़्रंट पेज पर बड़े-बड़े अक्षरों में शीर्षक लिखा है- सीज़ (क़ब्ज़ा). अख़बार ने इसे एक ऐसा दिन बताया है जो हमेशा बदनाम रहेगा.
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ब्रितानी अख़बार द टेलीग्राफ़ की सुर्ख़ी है-डेमोक्रेसी अंडर सीज़ यानी लोकतंत्र पर क़ब्ज़ा.
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ब्रिटेन के टैबलॉयड अख़बार डेली एक्सप्रेस ने लिखा है: एनार्की इन द यूएसए (अमेरिका में अराजकता).
अख़बार ने लिखा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'हिंसा और मौत' का दरवाजा खोला'.
'ये तो बस शुरुआत है, उधड़ेंगी अमेरिकी लोकतंत्र की परतें'
लंदन से छपने वाले साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय अख़बार द इकोनॉमिस्ट ने अपनी वेबसाइट के होमपेज पर 'ट्रंप्स लीगेसी- द शेम ऐंड द अपॉर्च्युनिटी' नाम के एक विश्लेषण को प्रमुखता से जगह दी है.
लेख में कहा गया है कि ट्रंप समर्थक जिस तरह कैपिटल में घुसे, उससे जो बाइडन की ही राह आसान होगी. लेख के मुताबिक़, भले ही रिपब्लिकन्स कैपिटल में हुए हंगामे को 'शक्ति प्रदर्शन' की तरह देख रहे हों लेकिन असल में इसमें उनकी 'हार' छिपी हुई थी.
क़तर के मीडिया समूह अल-जज़ीरा की वेबसाइट पर यूएस कैपिटल में हुए फ़साद से जुड़ी कई ख़बरें और तस्वीरें हैं. मसलन, दुनिया भर के नेताओं ने अमेरिका में हुई हिंसा पर क्या कहा और कैसे ट्रंप समर्थक कैपिटल में घुसे.
अल-जज़ीरा अंग्रेज़ी की वेबसाइट ने 'अमेरिका इज़ कमिंग अनडन' नाम से वरिष्ठ पत्रकार एंड्र्यू मिट्रोवाइका का नज़रिया प्रकाशित किया है.
लेखक का मानना है कि यूएस कैपिटल में बुधवार को जो कुछ हुआ, वो सिर्फ़ शुरुआत है और बहुत मुमकिन है कि आने वाले चार वर्षों में अमेरिकी 'लोकतंत्र' की परतें दुनिया के सामने खुलती रहें.

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संयुक्त अरब अमीरात से छपने वाले अख़बार गल्फ़ न्यूज़ ने भी अपने फ़्रंट पेज पर यूएस कैपिटल में ट्रंप समर्थकों के उत्पाद को लीड ख़बर बनाया है.
गल्फ़ न्यूज़ की वेबसाइट पर भी इससे जुड़ी कई ख़बरें और विश्लेषण मौजूद हैं.
पाकिस्तानी अख़बर डॉन के पहले पन्ने पर ख़बर है- वॉशिंगटन में 'तख़्तापलट', ट्रंप समर्थक कैपिटल हिल में घुसे.
इसराइल ने ट्रंप को बताया शांतिप्रिय नेता, ईरान ने किया तंज़
इसराइल की समाचार वेबसाइट 'द टाइम्स ऑफ़ इसराइल' का पूरा होमपेज कैपिटल हिल घटनाक्रम और अमेरिका की ख़बरों से भरा है.
वेबसाइट के अनुसार इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने वॉशिंगटन में हुए दंगों को 'शर्मनाक' बताया है और साथ ही 'शांति की अपील' के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ़ भी की है.
इसराइल, अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों में से एक है. द टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने अपने ओप-एड सेक्शन में वरिष्ठ पत्रकार डेविड होर्वोविट्ज़ का एक नज़रिया प्रकाशित किया है.
लेख में होर्वोविट्ज़ ने आशंका जताई है कि अमेरिका में लोकंतत्र और क़ानून-व्यवस्था पर हमला, इसराइल के लिए भी चिंताजनक है. उन्होंने लिखा है, "हमने अमेरिका पर, अमेरिका के द्वारा हमला देखा है."
वहीं, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कैपिटल हिल में हुए दंगों का ज़िक्र करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है.

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हसन रूहानी ने ट्रंप की ओर इशारा करते हुए कहा, "अमेरिका में जो कुछ हुआ, वो दिखाता है कि कैसे एक लोक-लुभावन नेता अपने देश की गरिमा को नुक़सान पहुँचा सकता है."
उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप पर तंज़ करते हुए कहा, "एक ग़लत शख़्स आता है, सत्ता अपने हाथों में लेता है और पूरी दुनिया के साथ अमेरिका के रिश्ते ख़राब कर देता है और साथ ही ख़ुद ही अपनी हार चुन लेता है."
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका-ईरान के रिश्ते बद से बदतर हो गए थे. ट्रंप ने न सिर्फ़ ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया बल्कि ईरान पर कठोर प्रतिबंध भी लगा दिए थे.
तुर्की की समाचार वेबसाइट 'हुर्रियत डेली न्यूज़' पर भी अमेरिकी घटनाक्रम से जुड़ी कई ख़बरें हैं.
वेबसाइट पर छपी ख़बर के मुताबिक़ तुर्की के विदेश मंत्रालय ने यूएस कैपिटल में हुए फ़साद पर चिंता जताई और सभी पक्षों से 'कॉमन सेंस' का इस्तेमाल करने की अपील की है.
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